Lucknow Coaching Fire: जिंदा जल गए कानपुर के दो जिगरी दोस्त, दादी की तेहरवीं पर पहुंची पोते की लाश
Lucknow Coaching Fire: लखनऊ के अलीगंज में सोमवार (22 जून) को कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग ने दो और युवा जिंदगियों को जलाकर राख कर दिया। कानपुर के गोविंद नगर निवासी 28 वर्षीय संयम विज और बर्रा-सात के 25 वर्षीय सूरजभान सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों अच्छे दोस्त थे और एक एनीमेशन स्टूडियो में साथ काम करते थे। हादसे की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया।
संयम विज के परिवार पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। महज 10 दिन पहले उनकी दादी का निधन हुआ था और मंगलवार(23 जून) को उनकी तेहरवीं होनी थी। पूरा परिवार संयम का इंतजार कर रहा था, लेकिन मौत की खबर ने सब कुछ उजाड़ दिया। संयम के पिता पुष्पराज का 15 साल पहले निधन हो चुका था। मां सोनिया ने बाद में दूसरी शादी की। बड़े भाई शुभम गुरुग्राम में अपनी पत्नी पलक के साथ रहते हैं। खबर सुनते ही परिवार रो-रोकर बुरा हाल है।

सूरजभान सिंह की मौत की खबर उनके परिवार ने मां को अभी तक नहीं दी है। मोहल्ले के लोग और दोस्त सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। दोनों युवक सपनों को लेकर लखनऊ आए थे, लेकिन लापरवाही की आग ने सब कुछ खत्म कर दिया।
15 की मौत, 4 अरेस्ट, 4 सस्पेंड
इस हादसे में कुल 15 लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है, LDA और बिजली विभाग के 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। SIT और फोरेंसिक टीम जांच में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवारों को 5 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया है।
व्यक्तिगत त्रासदी से सिस्टेमिक सवाल तक
संयम (28) और सूरजभान (25) एनीमेशन स्टूडियो में काम करते हुए कोचिंग या संबंधित सुविधा के लिए उस बिल्डिंग में थे। दोनों दोस्त थे, साथ काम करते थे, साथ सपने देखते थे। संयम का परिवार पहले से कई सदमों से गुजर चुका था, पिता की मौत, दादी का हालिया निधन। तेहरवीं के दिन पोते की मौत का समाचार परिवार को तोड़कर रख गया।
ये युवा मध्यवर्ग के प्रतिनिधि थे। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर से लखनऊ आकर स्किल्ड जॉब और करियर बनाने की कोशिश कर रहे थे। उत्तर प्रदेश में लाखों ऐसे युवा हैं जो कोटा, दिल्ली या लखनऊ जैसे केंद्रों में कोचिंग, टेक्निकल ट्रेनिंग या जॉब-ओरिएंटेड कोर्स के लिए जाते हैं। लेकिन जब बुनियादी सुरक्षा नहीं होती तो सपने चिता बन जाते हैं।
लखनऊ अग्निकांड 15 युवा सपनों की चिता है। संयम और सूरजभान जैसे दोस्तों की मौत हमें याद दिलाती है कि प्रशासनिक लापरवाही कितनी खतरनाक हो सकती है। दादी की तेहरवीं पर पोते की लाश का पहुंचना किसी भी शासन के लिए चेतावनी है।













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