वो इंस्पेक्टर सुबोध ही थे, जिन्होंने वृंदावन में गो तस्करों की शामत ला दी थी
जांबाज पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह जिस वक्त वृंदावन में तैनात थे, गो तस्करों में उनके नाम का खौफ था।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में सरकार और पुलिस के बड़े-बड़े दावों के बीच पुलिस के अफसरों की सुरक्षा की उसके लिए चुनौती बनी हुई है। सोमवार को बुलंदशहर के स्याना इलाके में गो हत्या की सूचना पर हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और जमकर बवाल किया। इस बवाल में भीड़ के हाथों यूपी पुलिस के एक जांबाज अफसर थाना इंचार्ज सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई। बुलंदशहर के स्याना थाने में पोस्टिंग से पहले इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की तैनाती वृंदावन में थी। सुबोध जुलाई 2017 से लेकर अगस्त 2018 तक वृंदावन में तैनात रहे और जब तक तैनात रहे, उन्होंने गो तस्करों के खिलाफ कड़ा अभियान छेड़ा।

गो तस्करों में सुबोध के नाम का खौफ
इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को नजदीक से जानने वाले लोग बताते हैं कि कानून-व्यवस्था के मामले में वो कभी समझौता नहीं करते थे। वृंदावन में तैनाती के दौरान सुबोध कुमार ने गो तस्करों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान छेड़ा। बताया जाता है कि सुबोध कुमार की सख्ती का ही नतीजा था कि गो तस्करों में उनका नाम का एक खौफ था। दिसंबर 2017 में वाहन चोरी कर भाग रहे कुछ बदमाशों से उनकी मुठभेड़ भी हुई थी। इस मुठभेड़ में सुबोध कुमार को गोली लगी थी। इसके बाद अगस्त 2018 में उनका तबादला बुलंदशहर के स्याना थाने में हो गया। यहां भी अपराधियों को लेकर सुबोध कुमार का रुख बेहद सख्त था, जिसे लेकर लोगों में चर्चा भी होती थी।

घर से दूर रहकर भी गांव की सोचते थे सुबोध
इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत की खबर से उनके गृह जनपद एटा में गम का माहौल है। उनके पैतृक गांव तरगवा में सन्नाटा पसरा है और इंस्पेक्टर सुबोध को करीब से जानने वाले लोग उनके मधुर व्यवहार को याद कर रो रहे हैं। नौकरी की मजबूरी ऐसी थी कि सुबोध अपने गांव कम ही आ पाते थे, लेकिन अक्सर फोन पर गांव के लोगों के हालचाल लिया करते थे। सुबोध के पिता भी पुलिस में थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा उनके दो बेटे हैं। सुबोध के करीबी मित्र श्यामवीर राठौर ने बताया कि करीब 15 दिन पहले उनका फोन आया था और उन्होंने कहा था कि वो गांव के बच्चों के लिए कुछ ऐसा करना चाहते हैं, जिससे वो पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकें। सुबोध चाहते थे कि उनके गांव के बच्चे अपनी अलग पहचान बनाएं।

मुख्य आरोपी योगेश राज की गिरफ्तारी अभी तक नहीं
इस मामले को लेकर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि जिन लोगों ने हिंसा की, उनके बारे में अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि वो किस संगठन के लोग थे। पुलिस ने अभी तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके नाम- चमन, देवेंद्र, आशीष चौहान और सतीश हैं। हिंसा के मामले में मुख्य आरोपी योगेश राज की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो सकी है। पुलिस ने इस मामले में 6 टीमों का गठन किया है। फिलहाल हालात काबू में हैं। पुलिस ने बताया कि सोमवार को हुई हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और सुमित नामक युवक की मौत हुई है। सुमित को गोली कैसे लगी, इसकी जांच की जा रही है। एडीजी ने कहा कि बिना जांच के यह नहीं कहा जा सकता कि यह इंटेलिजेंस या किसी अन्य एजेंसी की विफलता है।












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