क्या Budget 2023 MGNREGA के लिए निराशाजनक ? खर्च में 19 फीसद कटौती, कुल आवंटन ₹ 60 हजार करोड़ !
आम बजट 2023-24 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम (MGNREGA) के लिए आवंटन घटकर ₹60,000 करोड़ रह गया। 19 फीसद कटौती की बात सामने आई है।

Budget 2023 MGNREGA के लिए कैसा रहा ? इस सवाल का जवाब थोड़ा पेचिदा है। दरअसल, बजट 2023-24 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम (MGNREGA) के लिए आवंटन घटकर ₹60,000 करोड़ रह गया। हालांकि, एक अधिकारी ने प्रमुख ग्रामीण योजना के लिए कम परिव्यय को उचित ठहराया और कहा कि कोरोना महामारी से पहले जितनी संख्या में लोग मनरेगा के तहत काम हासिल कर रहे थे, ऐसे काम मांगने वाले लोगों की संख्या जुलाई और नवंबर 2022 के बीच महामारी-पूर्व स्तर के आसपास आ चुकी है। इसी आधार पर बजटीय कम किया गया है।
₹ 60,000 करोड़ के परिव्यय की संभावना
रिपोर्ट के मुताबिक महामारी से प्रभावित वित्त वर्ष 2021 में 1.10 लाख करोड़ रुपये, जबकि वित्त वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने 97,000 करोड़ रुपये खर्च किए थे। सरकार का दावा है कि अर्थव्यवस्था सामान्य होने से पहले MGNREGA के तहत काम मांगने वाले लोगों की संख्या कम होने लगी। इसी आधार पर चालू वित्त वर्ष में ₹89,400 करोड़ का संशोधित अनुमान जारी किया गया। वित्त वर्ष 2023-24 के बजटीय आवंटन के मुताबिक ₹ 60,000 करोड़ के परिव्यय की संभावना है। इस तरह बजट दस्तावेज़ के अनुसार करीब 33% की कटौती की गई है।
मनरेगा को 19% कम आवंटन मिला
अधिकारियों ने कहा कि मांग आधारित कार्यक्रम में जरूरत के मुताबिक और धन उपलब्ध कराया जाएगा। पिछली बार बजट 2019-20 में MGNREGA को ₹60,000 करोड़ की राशि आवंटित की गई थी। बजट 2022-23 में योजना के लिए 73,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान की तुलना में मनरेगा को 19% कम आवंटन मिला है।
आवास योजना में 12% की बढ़ोतरी
ग्रामीण विकास मंत्रालय की पांच प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को मामूली रूप से कम किया गया है, ग्रामीण सड़क योजना में वही बजट रखा गया है और आजीविका कार्यक्रम में मामूली वृद्धि हुई है। ग्रामीण आवास योजना में 12% की बढ़ोतरी हुई है। प्रमुख ग्रामीण योजना MGNREGA के लिए कम परिव्यय को सही ठहराते हुए, एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को जारी आर्थिक सर्वेक्षण से पता चला है कि नौकरी की मांग महामारी से पहले के स्तर पर आ गई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था सामान्य हुई
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि जुलाई से नवंबर 2022 तक MGNREGA के तहत काम मांगने वाले व्यक्तियों की संख्या महामारी-पूर्व के स्तर के आसपास देखी गई। इसे मजबूत कृषि विकास और कोविड-19 से तेजी से रिकवरी के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामान्य होने के रूप में देखा जा सकता है। मंदी, बेहतर रोजगार के अवसरों में बदली है।
मनरेगा को आवंटन में कटौती पर पूर्व ग्रामीण विकास सचिव की राय
महामारी से प्रभावित वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2022 में, केंद्र को ₹1.10 लाख करोड़ और ₹97,000 करोड़ खर्च करने पड़े थे, लेकिन अर्थव्यवस्था खुलने के बाद मांग कम होने लगी। पूर्व ग्रामीण विकास सचिव जुगल किशोर महापात्रा ने कहा कि कम आवंटन का MGNREGA योजना पर प्रभाव पड़ेगा। महापात्रा ने कहा, "सरकार का मानक उत्तर यह है कि मनरेगा मांग-संचालित कार्यक्रम है और जरूरत पड़ने पर और पैसा आएगा, लेकिन यदि प्रारंभिक आवंटन म्यूट कर दिया जाता है, तो जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन एजेंसियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। योजना के साथ ऐसा कई सालों से होता आ रहा है। सुचारू क्रियान्वयन के लिए अधिक धन की जरूरत है। अगर कर्मचारियों को डर है कि मजदूरी में देरी होगी, तो वे नहीं आएंगे। आवंटन का मांग पर प्रभाव पड़ेगा।
गरीब राज्यों को MGNREGA का जरूरी हिस्सा नहीं मिला
उन्होंने कहा कि कम आवंटन तब होता है जब सरकार गरीब राज्यों में अधिक पैसा लगाने के लिए योजना पर कम खर्च करने की कोशिश कर रही हो। दिसंबर 2022 की बैठक में खुद पीएम मोदी ने तर्क दिया था कि कार्यक्रम का उद्देश्य गरीबी उन्मूलन था, लेकिन गरीब राज्यों को मनरेगा फंड का आवश्यक हिस्सा नहीं मिल रहा था।

रोजगार मिलने पर सरकार का तर्क
हालांकि, एक अधिकारी ने कहा कि योजना के कम बजट की भरपाई प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत अधिक आवंटन से की जाएगी। उन्होंने कहा, "पीएमएवाई में, मनरेगा के तहत 90 दिनों का काम और घर बनाने की अनुमति है। सरकार को अभी भी लगभग 8 मिलियन घरों का निर्माण कराने की जरूरत है। ऐसे में बड़ी संख्या में मनरेगा श्रमिकों को ग्रामीण घरों के निर्माण में नौकरी मिलेगी।
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MISHTI योजना के तहत मैंग्रोव वृक्षारोपण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में मनरेगा के संबंध में कहा, सरकार ने अपनी नई वनीकरण योजना में MGNREGA के दायरे का विस्तार किया। उन्होंने कहा, वनीकरण में भारत की सफलता के आधार पर, 'मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटैट्स एंड टैंजिबल इनकम' (MISHTI) के तहत पौधे लगाए जाएंगे। मनरेगा, कैम्पा फंड (CAMPA) और अन्य स्रोतों से जरूरत के मुताबिक समुद्र तट के किनारे और साल्ट पैन भूमि पर मैंग्रोव वृक्षारोपण कराया जाएगा।
विपक्षी दल की आलोचना
MGNREGA बजट में कटौती को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्स) (सीपीआईएम) नेता सीताराम येचुरी ने गलत बताया। वित्त मंत्रालय के इस कदम की आलोचना कर येचुरी ने कहा, "जब बेरोजगारी की दर ऐतिहासिक ऊंचाई पर है तो बजट मनरेगा आवंटन में 33 प्रतिशत की कमी करता है। खाद्य सब्सिडी में 90,000 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। उर्वरक सब्सिडी 50,000 करोड़ और पेट्रोलियम सब्सिडी 6,900 करोड़ कम किया गया है।












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