Budget 2023 Defence Ministry के लिए सैन्य आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने वाला, ओवरऑल 13 फीसद बढ़ा आवंटन
बजट 2023 में रक्षा मंत्रालय को अहम प्रोजेक्ट के लिए लगभग दोगुना आवंटन किया गया है। सीमा सड़क संगठन (BRO) का पूंजीगत बजट 43% बढ़ा है।

Budget 2023 Defence Ministry के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिहाज से काफी अहम रहा। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि आवंटन की मात्रा बढ़ने से सरकार को प्रोजेक्ट तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। सरकार ने बताया, रक्षा मंत्रालय उत्तरी सीमाओं में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। तदनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में सीमा सड़क संगठन (BRO) का पूंजीगत बजट 43% बढ़ाकर 5,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
रणनीतिक सुरंगों का निर्माण
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 में बीआरओ का बजट 3,500 करोड़ रुपये था। सरकार ने बताया, वित्त वर्ष 2021-22 से दो साल में इस खंड के तहत आवंटन दोगुना हो गया है। इससे सीमावर्ती इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। सेला सुरंग, नेचिपु सुरंग और सेला-छबरेला सुरंग जैसी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संपत्तियां बनेंगी और सीमा संपर्क भी बढ़ेगा।

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हथियार प्रणालियों का बंदोबस्त
दरअसल, रक्षा बजट में ओवरऑल 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आधुनिकीकरण कोष को आवंटन में 6.5 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी हुई है। सरकार सेना के लिए लड़ाकू विमान, पनडुब्बी और टैंक सहित प्रमुख हथियार प्रणालियों का बंदोबस्त करने में जुटी है। अत्याधुनिक हथियारों की कमी न होने दी जाए, इस मकसद से रक्षा सेवाओं को आवंटित कुल राशि वित्त वर्ष 2023-24 में पिछले बजट की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक रही।
सेना के आधुनिकीकरण पर कितना खर्च करेगी सरकार ?
इस साल का डिफेंस बजट 5.94 लाख करोड़ रुपये का रहा। पिछले साल रक्षा मंत्रालय को 5.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक आवंटित हुआ था। सैन्य आधुनिकीकरण बजट भी पिछले वित्त वर्ष के 1.52 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में 1.62 लाख करोड़ रुपये किया गया है। आधुनिकीकरण बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर जारी मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारतीय फर्मों से हथियार प्रणालियों और उपकरणों के अधिग्रहण पर खर्च किया जाएगा। हालांकि, आधुनिकीकरण बजट में वृद्धि केवल लगभग 6.5 प्रतिशत है जिसे मामूली वृद्धि माना जाता है।
रक्षा अधिग्रहण परिषद पर नजरें
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय वायु सेना स्वदेशी लड़ाकू विमान विकास योजना में निवेश के साथ-साथ 4.5 जेनरेशन के लड़ाकू विमानों को शामिल करने की अपनी योजना के तहत लड़ाकू विमान हासिल करना चाह रही है। भारतीय नौसेना भी फ्रांस से लड़ाकू विमान प्राप्त करने के प्रयास में जुटी है, लेकिन इस साल दोनों पूरा होने की संभावना नहीं है, क्योंकि अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी शुरू की जानी है। गौरतलब है कि नौसेना ने फ्रांसीसी राफेल विमान को चुना है। परीक्षणों के पूरा होने के बाद भारत सरकार फ्रांस सरकार के साथ सौदे को अंतिम रूप देगी। इसके बाद ही खरीदने की सिफारिश होगी। रक्षा मंत्रालय की ओर से प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। रक्षा अधिग्रहण परिषद से मंजूरी लेना अभी तक बाकी है।
हथियारों के लिए मेक इन इंडिया कार्यक्रम
नौसेना प्रोजेक्ट 75 इंडिया के तहत पनडुब्बियों के अधिग्रहण पर ध्यान केंद्रित कर रही है, लेकिन इसमें भी समय लगने की संभावना है। सेना लद्दाख मोर्चे पर अपनी परिचालन आवश्यकताओं के लिए हल्के टैंक और आर्टिलरी गन हासिल करने की प्रक्रिया भी शुरू करेगी। सुरक्षाबलों ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत हथियार प्रणाली हासिल करने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की हैं। इस क्षेत्र में केवल भारतीय कंपनियों को ही नेतृत्व की अनुमति दी गई है।
सैन्य बलों का पेंशन बजट
साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डोमेन में भी भारत लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने पर प्रमुखता से फोकस कर रहा है। इस जरूरत के लिए सुरक्षाबलों ने उन्नयन की योजना बनाई है। सैन्य बलों का पेंशन बजट पिछले साल के 1.19 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष में 1.38 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। बलों के लिए राजस्व बजट भी लगभग 30,000 करोड़ रुपये बढ़ा है। इसे पिछले साल के 2.39 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.70 लाख करोड़ किया गया है।
भारत टॉप तीन इकोनॉमी में शामिल होगा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उम्मीद जताई कि इस साल का केंद्रीय बजट भारत को कुछ वर्षों के भीतर 'शीर्ष तीन' अर्थव्यवस्थाओं में जगह बनाने में मदद करेगा। उन्होंने ट्वीट किया, "केंद्रीय बजट 2023-24 से देश में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। इससे हमें कुछ वर्षों के भीतर 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और दुनिया की 'शीर्ष तीन' अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
पूंजीगत परिव्यय बढ़ेगा
केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने बजट भाषण में कहा, कुल मिलाकर, सरकार ने 2023-24 में पूंजीगत व्यय परिव्यय को 33 प्रतिशत बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है। यह अमाउंट सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3.3 प्रतिशत होगा। 2019-20 में किए गए परिव्यय का लगभग तीन गुना है।
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