Weather: पिछले 4 सालों को ट्रेंड टूटा, मानसून सामान्य से कम बारिश के साथ हुआ खत्म, जानिए क्यों हुआ ऐसा?
Weather update: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के जारी जून से सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक इस बार मानसून को लेकर पिछछे चार सालों का ट्रेंड टूट गया है। इस साल मानसून सामान्य से कम बारिश के साथ खत्म हुआ है।
2019-2022 के दौरान 'सामान्य' या 'सामान्य से ऊपर' श्रेणी में अच्छी बारिश हुई थी। लेकिन इस बार चार साल के रुझान को तोड़ते हुए, भारत ने लंबी अवधि के औसत के 94.4% पर 'सामान्य से नीचे' मानसून बारिश दर्ज की है।

क्यों हुई कम बारिश?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 30 सितंबर को कहा कि, अल नीनो की स्थिति की वजह से भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून कुछ हद तक कम रहा। जिसकी वजह से औसत से कम बारिश हुई है।
हालांकि मौसम विभाग ने साथ में ये भी कहा है कि कुछ सकारात्मक कारकों ने इस वर्ष अल नीनो स्थितियों के कारण हुई कमी को कुछ हद तक कम कर दिया, जिससे लगभग सामान्य बारिश हुई। इन कारकों में हिंद महासागर डिपोल (आईओडी) और मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (एमजेओ) शामिल हैं।
आईएमडी के महानिदेशक एम महापात्र ने कहा, "अन्य मौसम संबंधी कारकों के प्रभाव ने अल नीनो के प्रभाव को एक हद तक कम कर दिया और इसने समग्र मानसून को सामान्य के बहुत करीब ले जाने में मदद की, जैसा कि हमने इसकी पहले ही भविष्यवाणी की थी।"
देश के 73 फीसदी हिस्से में सामान्य बारिश हुई
मौसम विभाग ने इस साल +/- 4% की मार्जिन के साथ एलपीए के 96% पर 'सामान्य' मानसून की भविष्यवाणी की थी। लेकिन अगस्त में कम हुई बारिश की वजह से समग्र मानसून वर्षा को एलपीए 87 सेमी (1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर) के 94.4% तक खींच गया।
हालांकि, देश के कुल क्षेत्रफल के लगभग 73% हिस्से में 'सामान्य' वर्षा हुई और 9% में 'बहुत अधिक' बारिश हुई है। एम महापात्र ने कहा, "हम विश्लेषण कर रहे हैं कि अगस्त आखिर ऐसा क्या हुआ कि बारिश कम हुई थी। हम सभी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को इसका अध्ययन करने के लिए बोला है।''












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