Om Birla AI Video: लोकसभा स्पीकर के AI वीडियो पर बवाल, कांग्रेस मीडिया सेल को मिला नोटिस
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के AI वीडियो के आरोप में लोकसभा विशेषाधिकार विभाग ने कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस जारी किया है। नोटिस में तीन दिनों के अंदर सभी नेताओं के अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा सदन की अवमानना और विशेषाधिकार उल्लंघन के मामले में कार्रवाई करने की बात कही गई है।
वायरल वीडियो में कथित तौर पर ओम बिरला को भाजपा की चुनावी बॉन्ड नीति की आलोचना करते, राहुल गांधी की प्रशंसा करते और यह कहते हुए दिखाया गया था कि 'भाजपा डूब जाएगी'।

सुप्रिया श्रीनेत समेत 8 पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा (V.D. Sharma) की शिकायत पर कड़ा संज्ञान लेते हुए ये एक्शन लिया गया है। इस मामले में लोकसभा सचिवालय के विशेषाधिकार विभाग ने कांग्रेस की सोशल मीडिया चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत समेत 8 पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
कांग्रेस नेताओं पर क्या है आरोप?
इन नेताओं पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर स्पीकर का अपमानजनक कैरिकेचर और AI वीडियो प्रसारित कर सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने का गंभीर आरोप है। बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि कांग्रेस के मीडिया विभाग ने जानबूझकर भ्रामक एआई तकनीक और आपत्तिजनक तस्वीरों का इस्तेमाल किया।
3 दिनों का अल्टीमेटम और कानूनी प्रक्रिया
लोकसभा सचिवालय ने अपने नोटिस में कांग्रेस नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
- जवाब तलब: सभी 8 आरोपियों को पत्र मिलने के तीन दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण देना होगा।
- प्राप्ति रसीद (Receipt): सचिवालय ने पत्र की प्राप्ति की जानकारी भी तुरंत भेजने को कहा है ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
- अंतिम निर्णय: इन नेताओं के जवाब को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश किया जाएगा, जिसके बाद सदन की अवमानना के नियमों के तहत आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
क्या है 'एआई' विवाद का कारण?
यह पूरा विवाद सोशल मीडिया पर साझा की गई उस सामग्री से शुरू हुआ जिसे 'डीपफेक' या 'एआई जेनरेटेड' माना जा रहा है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की छवि खराब करने के लिए तकनीक का दुरुपयोग करना संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन है। यदि कांग्रेस नेता तय समय में संतोषजनक सफाई नहीं दे पाते हैं, तो उन पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गाज गिर सकती है।












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