बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की मीडिया रिपोर्टिंग से बैन हटाया
सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की मीडिया रिपोर्टिंग से बैन हटा
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले की कोर्ट कार्यवाही की मीडिया में रिपोर्टिंग पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है। बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई के स्पेशल कोर्ट के केस की रिपोर्टिंग पर बैन के आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस रेवती मोहिती डेरे ने इस पर सुनवाई करते हुए कहा कि जनता को ये जानने का हक है कि केस में आखिर क्या चल रहा है। उन्होंने कहा कि मीडिया को केस की रिपोर्टिंग करने से नहीं रोका जा सकता है। जस्टिस डेरे ने केस की कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग की अनुमति को लेकर दायर की गई याचिका पर ये बात कही। नौ पत्रकारों ने इस मामले को लेकर कोर्ट में याचिका दी थी।

हाईकोर्ट में है सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला
सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में केस चल रहा है। पिछले हफ्ते बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने जनहित याचिका दायर कर सीबीआई की एक विशेष अदालत के अमित शाह को आरोप मुक्त करने के 30 दिसंबर 2014 के आदेश को चुनौती न देने की सीबीआई की कार्रवाई को गैरकानूनी और दुर्भावनापूर्ण बताया। इस याचिका पर सीबीआई ने मंगलवार को कहा कि वह सोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को आरोप मुक्त करने के उसके फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका का विरोध करेगी। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील अनिल सिंह ने उच्च न्यायालय में कहा कि हम याचिका का विरोध कर रहे हैं। आरोपमुक्त करने का आदेश दिसंबर, 2014 का है, इसे लेकर समय सीमा का मुद्दा है। इस मामले पर 13 फरवरी को सुनवाई होगी।

सीबीआई ने फरवरी 2010 में इस मामले की जांच शुरू की थी
2005 में सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसी प्रजापति को कथित फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया था। सीबीआई ने फरवरी 2010 में इस मामले की जांच शुरू की और उसी साल जुलाई में अमित शाह सहित 23 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। अमित शाह उस समय गुजरात में गृह राज्य मंत्री थे। मामले की सुनवाई के दौरान समय-समय पर ट्रायल कोर्ट ने तीन आईपीएस अधिकारियों समेत कई अभियुक्तों को मामले से बरी कर दिया।

जज लोया की मौत को लेकर भी चर्चा में है ये केस
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जज लोया की मोत से जुड़े केस का मामला उठाया था। सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामले के जज रहते हुए ही उनकी संदिग्ध मौत हुई थी। जज लोया की 1 दिसंबर 2014 को रहस्यमय हालत में दिल का दौरा पड़ने से नागपुर में मृत्यु हो गई थी। जज लोया वहां एक साथी की बेटी की शादी में शामिल होने गए थे। उस समय जज लोया सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे। जज लोया की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई औओर चीफ जस्टिस के रवैये को लेकर कई गंभीर मुद्दे उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने कहा था कि चीफ जस्टिस ने मनमाने तरीके से यह केस जस्टिस अरूण मिश्रा को सौंप दिया था।












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