Black Fungus vs White Fungus vs Yellow Fungus: कौन सबसे ज्यादा घातक और किन्हें सबसे ज्यादा खतरा?
नई दिल्ली, 27 मई। कोरोना की दूसरी लहर के कहर के बीच ही ब्लैक फंगस नाम की बीमारी ने कोहराम मचाना शुरू कर दिया। ब्लैक फंगस के मामले तेजी से फैलने के चलते इसे कई राज्यों ने महामारी घोषित कर दिया। अभी ब्लैक फंगस से लड़ने की तैयारी हो ही रही थी कि व्हाइट फंगस सामने आया और अब येलो फंगस भी सामने आ चुका है। येलो फंगस को ब्लैक और व्हाइट फंगस से भी ज्यादा खतरनाक बताया जाने लगा। ऐसे में इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इन तीनों में फंगस के फैलने की वजह क्या है और किन लोगों पर इसका खतरा सबसे ज्यादा है?
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तीनों फंगस में क्या है अंतर?
ब्लैक फंगस-
ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस चेहरे, नाक, आंख या फिर दिमाग पर असर डालता है। कुछ मामलों में इससे पीड़ित मरीज आंखों की रोशनी भी खो सकता है। यह फेफड़ों में भी फैल सकता है।
व्हाइट फंगस-
सफेद फंगस को अधिक खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित करता है। यह शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। व्हाइट फंगस मस्तिष्क, श्वसन प्रणाली और पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
येलो फंगस-
विशेषज्ञों के मुताबिक यह फंगस, जो आमतौर पर सरीसृपों को प्रभावित करता है, व्हाइट फंगस और ब्लैक फंगस की तुलना में अधिक खतरनाक होता है। अगर इलाज छोड़ दिया जाए, तो येलो फंगस संक्रमण से मौत भी हो सकती है। यह फंगस खराब स्वच्छता के कारण होता है। अपने घर और आस-पास जितना हो सके, साफ रखें।

ब्लैक फंगस का खतरा किसे ज्यादा?
डॉक्टरों के अनुसार कोविड-19 से रिकवरी वाले, मधुमेह रोगियों और लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग करने वाले लोगों को ब्लैक फंगस से संक्रमित होने का खतरा अधिक होता है। लंबे समय तक आईसीयू में रहने से भी ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ सकता है।
व्हाइट फंगस का खतरा किसे ज्यादा?
जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उनमें व्हाइट फंगस से संक्रमित होने का खतरा अधिक होता है। व्हाइट फंगस संक्रामक नहीं है लेकिन ये एक रोगी से सांस के जरिए फैलता है। मधुमेह रोगियों, कैंसर से पीड़ित लोगों और लंबे समय तक स्टेरॉयड उपचार कराने वालों में भी व्हाइट फंगस का खतरा अधिक होता है।
येलो फंगस का खतरा किसे ज्यादा?
अभी व्हाइट फंगस के खतरे के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर इम्यून वाले लोगों को सतर्क रहना चाहिए। लक्षण आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

फंगस के क्या हैं लक्षण?
ब्लैक फंगस-
इस फंगल इंफेक्शन में नाक पर धब्बे, धुंधला दिखाई देने लगना, चेहरे का दर्द, दांत दर्द, सीने में दर्द और सांस फूलने जैसे लक्षण हो सकते हैं।
व्हाइट फंगस-
इसके लक्षण काफी हद तक कोविड-19 लक्षणों से मिलते-जुलते हैं। यह फेफड़ों को प्रभावित करता है। सीने में दर्द, खांसी और सांस फूलना इसके लक्षण हैं। व्हाइट फंगस से सिरदर्द, दर्द, संक्रमण और सूजन भी हो सकती है।
येलो फंगस-
इसके लक्षणों में आलस आना, भूख न लगना, वजन कम होना प्रमुख हैं।

म्यूकोरमाइकोसिस कितना खतरनाक?
फंगल इंफेक्शन कोई नई बीमारी नहीं है और न ही हर किसी पर ये बुरा असर डालती है। यह स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं और कॉमरेडिडिटी से पीड़ित लोगों के लिए काफी गंभीर हो सकता है। जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है या फिर किसी बीमारी से उबरे हैं उनती प्रतिरक्षा प्रणाली रोग से लड़ने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है। ऐसे लोगों को फंगल इंफेक्शन से अधिक सावधान रहने की जरूरत है।
क्या है इलाज?
ब्लैक फंगस, व्हाइट फंगस और येलो फंगस फंगल इंफेक्शन है। इसके इलाज में केवल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन दिया जाता है जिसे एंटीफंगल दवा के रूप में जाना जाता है।












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