दिल्ली विधानसभा 2020 में बिना सीएम चेहरे के चुनाव में उतरेगी बीजेपी!
बेंगलुरू। दिल्ली विधानसभा चुनाव का चुनाव बिल्कुल निकट है। फरवरी, 2020 को दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है और चुनाव आयोग किसी भी समय चुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। यही कारण है कि पक्ष और विपक्ष दोनो ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। एक ओर जहां आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल दिल्ली में अपनी दूसरी पारी का दम भर रहे हैं।

तो दूसरी ओर वर्ष 2015 में महज 3 सीटों पर सिमट गई बीजेपी भी अपनी जीत में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाह रही है। इसलिए बीजेपी पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव की गई गलतियों को नहीं दोहराने का संकल्प लिया है। माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार दिल्ली में मुख्यमंत्री चेहरे का ऐलान नहीं करेगी और चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर लड़ेगी और दिल्ली चुनाव के चुनावी कैंपेन में राष्ट्रवाद और राष्ट्रवादी मुद्दों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि बीजेपी दिल्ली चुनाव को मोदी बनाम केजरीवाल नहीं बनने देना चाहती है।

सीएए मुद्दे पर नेताओं के झूठ बेनकाब होने बैकफुट पर है AAP
बीजेपी इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय समेत विभिन्न इलाकों में हुई हिंसा प्रमुखता से जनता के समक्ष उठाएगी। क्योंकि सीएए मुद्दे पर जामिया कैंपस में हुए पुलिस और छात्रों के बीच हुए हिंसक झड़प में कुछ AAP नेताओं की संलिप्तता के आरोप और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया द्वारा ट्वीटर पर फैलाए गए झूठ के बेनकाब होने के बाद दिल्ली की आम आदमी पार्टी बैकफुट पर है।

दिल्ली में भड़की हिंसा को लिए आप और कांग्रेस जिम्मेदार: जावड़ेकर
राजधानी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और दिल्ली बीजेपी के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ दिल्ली में भड़की हिंसा को लिए आप और कांग्रेस जिम्मेदार हैं। जावड़ेकर ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की वजह से दिल्ली में तीन जगहों पर हिंसा हुई।

2015 विधानसभा चुनाव में किरण बेदी थी बीजेपी के सीएम चेहरा
वर्ष 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मौजूदा पुडुचेरी उप राज्यपाल किरण बेदी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बीजेपी का यह दांव उल्टा पड़ गया था और बीजेपी महज तीन वर्ष पहले 31 सीट जीतने वाली बीजेपी 3 सीटों पर सिमट गई थी जबकि नई-नवेली आम आदमी पार्टी रिकॉर्ड 70 सें 67 सीट जीतने में कामयाब रही थी।

बीजेपी की नकारात्मक राजनीति से AAP को मिली थी बड़ी जीत
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत का श्रेय बीजेपी की नकारात्मक राजनीतिक चालों को ठहराया गया। इसके अलावा बीजेपी आलाकमान द्वारा अचानक किरण बेदी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाना भी महंगा पड़ गया था, क्योंकि अगर बीजेपी दिल्ली के कद्दावर नेता डा.हर्ष वर्धन को सीएम चेहरा बनाती तो चुनाव नतीजे उसके पक्ष में आ सकते हैं।

2013 में डा.हर्ष वर्धन के नेतृत्व में दिल्ली में 31 सीटों पर जीती थी BJP
वर्ष 2013 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे से इसकी तस्दीक की जा सकती है जब बीजेपी ने डा. हर्ष वर्धन के नेतृत्व में दिल्ली में अकेले 31 विधानसभा सीट जीतकर नंबर एक पार्टी बनकर उभरी थी। बीजेपी ने तब त्रिशंकु जनादेश के बाद सरकार बनाने से इनकार कर दिया था और नई-नवेली आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के सभी आदर्श और नैतिकताओं को धता बताकर कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बना ली थी। हालांकि महज 49 दिनों के बाद सीएम केजरीवाल ने गठबंधन सरकार से इस्तीफा दे दिया था।

2020 में भी AAP ने फ्री सेवा को बनाया चुनावी जीत का आधार
वर्ष 2013 में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाली केजरीवाल का आरोप था कि वो दिल्ली की जनता से किए वादे जनलोकपाल विधयेक लाने में असमर्थता के कारण मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि केजरीवाल ने अपने दूसरे मुख्यमंत्री कार्यकाल के पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं, तब भी वह जनलोकपाल विधेयक दिल्ली विधानसभा में टेबल नहीं कर सकी है। आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने मुफ्त सेवा को फिर अपना चुनावी आधार बनाया है, जिसके सहारे केजरीवाल एंड पार्टी वर्ष 2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव में शिखर पर पहुंची थी।

सियासी मकसद से 2013 में केजरीवाल ने दिया था CM पद से इस्तीफा
वर्ष 2013 में कांग्रेस के सहयोग से दिल्ली के मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल द्वारा 49 दिनों के भीतर इस्तीफे का मकसद सियासी था, क्योंकि अन्ना आंदोलन से पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ उठे ज्वार को दिल्ली सत्ता की सीढ़ी बनाने वाले केजरीवाल केंद्र की राजनीति का सपना बुनने लगे थे। यही कारण था कि केजरीवाल वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के पीएम कैंडीडेट और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए वाराणसी पहुंच गए थे। वर्ष 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज करने के बाद भी केजरीवाल ने कुलाचे मारनी नहीं छोड़ी।

2019 लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली में सिमट गए केजरीवाल
वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की केंद्र में दोबारा जबर्दस्त वापसी की, जिससे केजरीवाल की चूलें हिल गईं और केजरीवाल के दिल में दिल्ली भी हाथ से जाने का डर घर कर गया। जून, 2019 के बाद से केजरीवाल दिल्ली की राजनीति तक सिमट गए, क्योंकि 2015 से 2019 के बीच हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में पंजाब को छोड़कर आम आदमी पार्टी को हर जगह फजीहत का सामना करना पड़ा, जहां उनके 90 फीसदी से अधिक उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गईं। जून, 2019 के बाद से दिल्ली में जमे केजरीवाल दिल्ली में पुनर्वापसी के लिए लगातार लोक-लुभावन मुफ्त सेवा की घोषणा कर रहे हैं।

सियासी रोटियां सेंकने के लिए सीएए के खिलाफ खड़ी हुई AAP?
लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बने सीएए के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुई केजरीवाल एंड पार्टी ने सियासी रोटियां सेंकने की भरपूर कोशिश की। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया द्वारा दिल्ली पुलिस के एक जवान के खिलाफ किए गए झूठे ट्वीट और प्रदर्शनकारियों को भड़काने वाले आप विधायक अमानतुल्ला खान के वायरल वीडियो ने बीजेपी ने अपना हथियार बना लिया है। बीजेपी अब राष्ट्रहित और विकासवादी मुद्दों को आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में कैंपेन बनाने जा रही है। ऐसा करके बीजेपी दिल्ली में रह रही शरर्णार्थियों की एक बड़ी आबादी को आम आदमी पार्टी का असली चेहरा दिखाने की कोशिश करेगी।

विकास और राष्ट्रहित रहेगा दिल्ली में बीजेपी का चुनावी मुद्दा
बीजेपी प्रभारी जावड़ेकर ने प्रेस कांफ्रेस इसी रणनीति का खुलासा करते हुए कह चुके हैं कि दिल्ली में होने वाला आगामी विधानसभा चुनाव आप बनाम बीजेपी की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यह झूठ बनाम सच की लड़ाई है। उन्होंने बताया कि बीजेपी का मुद्दा राष्ट्रहित और विकास का रहेगा।
बकौल जावड़ेकर, नगर निगम में बीजेपी की सत्ता है, लेकिन आप सरकार ने निगम के विकास कार्यों का गला घोंटने का काम किया है। दिल्ली में लोग बोलते है पहले साढ़े चार साल सोते रहे, आखिरी समय में काम करने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने बताया कि बीजेपी रोज दोपहर 12 से एक बजे के बीच प्रेस कांफ्रेंस करेंगे, जिसमें चुनाव से जुड़े अलग-अलग मुद्दों को मीडिया के सामने रखा जाएगा।

5 जनवरी को अमित शाह 15000 बूथ कार्यकर्ताओं को करेंगे संबोधित
दिल्ली बीजेपी के प्रभारी ने बताया कि आने वाले 5 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 15 हजार बूथ कार्यकर्ताओं को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में संबोधित करेंगे। बीजेपी की यह तैयारी दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर चल रही है, क्योंकि दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल फरवरी 2019 में खत्म हो रहा है और चुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों की समीक्षा के लिए पिछले हफ्ते बैठक की शुरुआत की थी। संभव है कि इसी हफ्ते आयोग चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।

दिल्ली में भड़की हिंसा को लेकर आम आदमी पार्टी पर हमला
जावड़ेकर ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली में भड़की हिंसा को लेकर आम आदमी पार्टी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की वजह से दिल्ली में तीन जगहों पर हिंसा हुई। इस दौरान उन्होंने एक आप विधायक (अमानतुल्ला खान) की ओर इशारा करते हुए कहा था कि उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में दंगा भड़काने का काम किया जबकि लोग शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे। लेकिन आप विधायक द्वारा प्रदर्शनकारियों को उकसाने के बाद हिंसा भड़क गई और लोगों ने गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।

अमानतुल्ला खान के भाषण के बाद दिल्ली में हिंसा भड़कीः बीजेपी
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जामिया कैंपस में छात्रों का प्रदर्शन गत 15 दिसंबर को अचानक उग्र हो गया था। इन प्रदर्शनकारियों ने कई बसों में आग लगा दी थी। साथ ही कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनारियों को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़े पड़े थे।
इस झड़प में कई छात्र घायल हो गए थे। तब बीजेपी ने आप विधायक अमानतुल्ला खान पर छात्रों को भड़काने का आरोप लगाया था। बीजेपी का कहना था कि अमानतुल्ला खान के भाषण के बाद हिंसा भड़की. उन्होंने छात्रों को हिंसा करने के लिए उकसाया। उसी दौरान एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें अमानतुल्ला खान भीड़ को भड़काते हुए देखे गए थे।

जामिया यूनिवर्सिटी के बाद हिंसा के चपेट में आ गई थी पूरी दिल्ली
जामिया यूनिवर्सिटी के बाद पूरी दिल्ली को हिंसा के चपेट में लेनी को कोशिश हुई। गत 17 दिसंबर को दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके सीलमपुर और जाफराबाद में प्रदर्शन उग्र हुआ, जहां पर प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच झड़प हुई, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव करने के साथ ही कई वाहनों में तोड़फोड़ की थी। ऐसे में पुलिस को भीड़ को नियंत्रण में करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे। इस दौरान कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया। प्रदर्शन और हिंसा के चलते सीलमपुर से जाफराबाद सड़क को बंद कर दिया गया था।
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