'कांग्रेस ने शरिया को तवज्जो दी', मुस्लिम महिलाओं पर SC की टिप्पणी पर BJP ने बोला हमला
BJP Targets Congress: मुस्लिम महिलाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला पति से गुजारा भत्ता लेने की हकदार है। शीर्ष अदालत की टिप्पणी पर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस को घेरा है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राजीव गांधी सरकार ने संविधान के ऊपर शरिया को तवज्जो दी थी।
दरअसल, 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के बाद शाहबानो की अपने पति से गुजारा भत्ता मांगने की याचिका को स्वीकार कर लिया था। हालांकि तत्कालीन राजीव सरकार ने फैसले को खारिज करने के लिए संसद में एक कानून पारित कर दिया।

कांग्रेस को भाजपा ने घेरा
अब बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया बयान में बताया कि मुस्लिम महिलाएं तलाक के बाद अपने पति से गुजारा-भत्ता मांगने की हकदार हैं। जिस पर भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक को समाप्त कर दिया है।
उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस सत्ता में रही है, संविधान खतरे में रहा है। यह (राजीव गांधी सरकार का) ऐसा फैसला था, जिसने संविधान पर शरिया को प्राथमिकता दी। कांग्रेस सरकार के दौरान संविधान की प्रतिष्ठा को जो नुकसान पहुंचाया गया था, उसे इस आदेश ने बहाल किया है। इस फैसले ने संविधान के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक को खत्म कर दिया है।"
"फैसले को धर्म के नजरिए से नहीं..."
इसी के साथ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि,"फैसले को धर्म के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। यह समान अधिकारों का मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि कोई भी धर्मनिरपेक्ष देश नहीं है, जहां हलाला, तीन तलाक और हज सब्सिडी जैसे शरिया प्रावधानों की अनुमति हो। इसी के साथ त्रिवेदी ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने भारत को आंशिक इस्लामिक राज्य में बदल दिया था।
जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि एक मुस्लिम महिला CrPC की धारा 125 के तहत तलाक के बाद अपने पति से गुजारा भत्ता मांग सकती है। साथ ही कहा कि यह प्रावधान सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होता है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 धर्मनिरपेक्ष कानून पर हावी नहीं होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भरण-पोषण कोई दान नहीं है, बल्कि यह सभी विवाहित महिलाओं का अधिकार है।












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