बीजेपी में पल में इन पल में आउट हुए साबिर अली

sabir ali
नई दिल्‍ली। कर्नाटक बीजेपी में श्रीराम सेना के चीफ प्रमोद मुथालिक को पहले शामिल करने और फिर बाहर करने वाले मुद्दे को अभी मुश्किल से 10 दिन भी नहीं हुए थे कि साबिर अली के एंट्री और इंस्‍टेंट एग्जिट ने पार्टी के लिए नई मुश्किलें पैदा कर दी हैं। शुक्रवार को जनता दल यूनाइटेड के निष्‍काष्ति नेता साबिर अली को बीजेपी की सदस्‍यता मिली और 24 घंटे के अंदर ही अंदर पार्टी ने उन्‍हें बाहर का रास्‍ता दिखा दिया। बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर इस बारे में जानकारी दी।

रविशंकर प्रसाद ने इसके साथ ही सभी इकाईयों को सख्‍त अंदाज में चेतावनी देते हुए कहा कि आगे अगर किसी भी व्‍यक्ति को पार्टी की सदस्‍यता दी जाए तो पहले आलाकमान को उसके बारे में इत्तिला दी जाएगी। जब तक इस बारे में आलाकमान की ओर से कोई फैसला नहीं आता तब तक किसी भी व्‍यक्ति को सदस्‍यता न दी जाए।

साबिर अली के पार्टी में शामिल होने के बाद ही पार्टी के अंदर घमासान की स्थिति पैदा हो गई। बीजेपी के राज्‍यसभा सांसद मुख्‍तार अब्‍बास नकवी और कुछ और वरिष्‍ठ नेताओं की ओर से साबिर को शामिल किए जाने का खुला विरोध किया गया। नकवी की ओर से ट्विटर पर लिखा गया कि साबिर अली के बाद जल्‍द ही पार्टी में दाउद इब्राहीम को भी जगह दे दी जाएगी।

नकवी के इस कड़े रुख के बाद पार्टी के कुछ और वरिष्‍ठ सदस्‍य बलबीर पुंज और विनय कटियार की ओर से भी इस बारे में विरोध दर्ज कराया गया। वहीं सूत्रों की मानें तो साबिर के पार्टी में शामिल होने को लेकर अध्‍यक्ष राजनाथ सिंह और नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत हुई थी और इनकी मंजूरी मिलने के बाद ही साबिर को पार्टी में शामिल किया गया था।

वहीं साबिर ने भी शनिवार को पार्टी से अनुरोध किया कि जब तक उन्‍हें लेकर पार्टी में एक राय न बने तब तक वह उनकी सदस्‍यता को स्‍थगित कर दें। इसक अलावा उन्‍होंने मुख्‍तार अब्‍बास नकवी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि नकवी ने उन पर जो भी आरोप लगाए हैं वह उन्‍हें साबित करके दिखाए। अगर आरोप सही साबित हुए तो वह राजनीति छोड़ देंगे। गौरतलब है कि नकवी ने अपने ट्विटर हैंडल पर साबिर को 'भटकल का दोस्‍त' बताया था।

यह बात गौर करने वाली है कि साबिर अली जिस समय जनता दल यूनाइटेड का हिस्‍सा थे, उस समय वह अक्‍सर टीवी चैनलों पर होने वाली बहस के दौरान बीजेपी के नेताओं पर हमला बोलते थे। इसके अलावा वह बिहार के
विवादित नेता के तौर पर भी जाने जाते हैं। ऐसे में शायद पार्टी ने चुनावों के मद्देनजर उनसे किनारा करना ही बेहतर समझा।

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