उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम का हो गया ऐलान, BJP President के चुनाव में अब और कितनी देर लगेगी?

BJP President Election: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के ऐलान की वजह से देरी हो रही थी। अब सीपी राधाकृष्णन एनडीए के वाइस प्रेसिडेंट कैंडिडेट घोषित किए जा चुके हैं और उनकी जीत निश्चित है। बीजेपी अब अपना पूरा फोकस राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव और उत्तर प्रदेश, गुजरात और दिल्ली में प्रदेश अध्यक्षों को चुनने में लगाएगी। पार्टी हाईकमान की इस बारे में आरएसएस (RSS) से भी चर्चा हो चुकी है। संघ ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए अंतिम फैसला पार्टी पर छोड़ दिया है।

माना जा रहा है कि अध्यक्ष पद के लिए मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान का नाम आगे चल रहा है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम ही संघ की पहली पसंद हैं. हालांकि, खट्टर भी आरएसएस के रास्ते ही बीजेपी में आए हैं और उनके पास संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है।

BJP President Election

BJP President के नाम का ऐलान में अभी और देर

भाजपा में अध्यक्ष पद के चुनाव में लगातार देरी हो रही है। लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद ही ऐलान होना था, लेकिन पहले राज्यों के संगठन का चुनाव संपन्न कराया जाना जरूरी था। बीजेपी के संविधान के मुताबिक आधे राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के संगठनात्मक चुनाव के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है। फिलहाल यूपी, गुजरात और दिल्ली के प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव होगा और इसके बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर सहमति बनाई जाएगी।

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जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा दे देने की वजह से पार्टी का पूरा ध्यान उपराष्ट्रपति कैंडिडेट के चयन पर था। संघ और बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले संगठन चुनाव पूरे किए जाएंगे।

UP में प्रदेश अध्यक्ष चुनना बड़ी चुनौती

लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सबसे बड़ा झटका उत्तर प्रदेश में लगा था। संघ और बीजेपी दोनों पार्टी के जनाधार को मजबूत करने और संगठन में सुधार की बात स्वीकार कर रहे हैं। प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसे देखते हुए आरएसएस ने स्पष्ट कर दिया है कि नया अध्यक्ष संगठन में निष्ठा के साथ काम करने वाला होना चाहिए। साथ ही, सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ तालमेल बनाकर चले, ताकि पार्टी के अंदर किसी तरह की गुटबाजी को हवा न मिल सके।

अब देखना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलता है या फिर जेपी नड्डा के नेतृत्व में एक और विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा। फिलहाल बीजेपी और एनडीए दोनों के लिए बिहार में अपना किला बचाना बहुत मुश्किल चुनौती है।

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