अमित शाह के अर्धपन्ना प्रमुख दांव को समझ नहीं पाएं कांग्रेस के रणनीतिकार
बेंगलुरु। बीजेपी का 2014 के लोकसभा चुनाव से जारी हुआ जीत अभियान कर्नाटक में भी आगे बढ़ता दिख रहा है। बीजेपी एक के बाद एक राज्यों में अपनी सरकार बनाती जा रही है। अगर बीजेपी कर्नाटक में विधानसभा चुनाव जीत जाती है तो वह देश के 21वें राज्य में अपनी सरकार बनाने में सफल हो जाएगी। बीजेपी की इस जीत के पीछे सबसे हाथ पार्टी के 'चाणक्य' कहे जाने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का है। उनकी चुनावी रणनीति और सोशल इंजीनियरिंग पर अच्छी पकड़ पार्टी को हर बार जीत का स्वाद चखा रही है।

यूपी के फार्मूले को कर्नाटक में अपनाया
कर्नाटक चुनाव में अमित शाह ने 2017 में गुजरात में हुए चुनावों से सबक लेते हुए एक अलग रणनीति तैयार की थी। कर्नाटक जीतने के लिए बीजेपी ने उन छोटी-छोटी बातों पर भी इस बार काम किया, जो गुजरात चुनाव के दौरान नरजअंदाज कर दी थी। अमित शाह ने अपने सबसे सफल पन्ना प्रमुख (आरएसएस के कार्यकर्ता)फॉर्मूले को यूपी के बाद इस बार कर्नाटक में भी लागू किया। इस फार्मूले के चलते बीजेपी लोकसभा चुनावों में 80 में से 73 सीट जीतने में सफल रही तो वहीं विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 403 में से 325 सीटें मिलीं।

कर्नाटक में तैनात किए 10 लाख अर्द्ध पन्ना
अमित शाह ने परिस्थितियों के देखते हुए पन्ना प्रमुख वाले फॉर्मूले में कर्नाटक में थोड़ा बदलाव किया है। अमित शाह ने इस बार पन्ना को दो हिस्सों में बांटा। जमानी स्तर पर शाह ने प्रचार के लिए पन्ना प्रमुख और अर्द्ध पन्ना प्रमुख दो भागों में बांटा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पहली बार बीजेपी ने राज्य में अर्द्ध पन्ना प्रमुखों की टीम बनाई। भाजपा ने राज्य के 56,696 पोलिंग बूथों के 4.96 करोड़ मतदाताओं पर करीब 10 लाख अर्द्धपन्ना प्रमुख तैनात किए हैं। यानी एक अर्द्ध पन्ना प्रमुख को 45 से 50 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी गई थी।

बीजेपी ने ऐसे तय की कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी
2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान पन्ना प्रमुखों की रणनीति को अमित शाह ने ही इजाद की थी। गुजरात में चुनाव में कांग्रेस द्वारा दी गई जबरदस्त टक्कर के बाद अमित शाह ने पन्ना प्रमुख वाली रणनीति में बदलाव किया औऱ उसे दो भागों में बांट दिया। अमित शाह ने कर्नाटक में जिम्मेदारी राज्य के चुनाव प्रबंधक मुरलीधर को सौंपी थी। चुनाव ने बीजेपी ने जिम्मेदारियों को एक क्रम में बांध दिया था। अर्द्ध पन्ना प्रमुखों के ऊपर पन्ना प्रमुख को रखा गया, उसके ऊपर बूथ प्रमुख, फिर एरिया प्रमुख और चुनाव प्रभारी को जगह दी गई। यहीं बीजेपी ने प्रचार के लिए सैंकड़ों विधायक को भी मैदान में उतारा।
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