EVM की विश्वसनीयता पर शत्रुघ्न सिन्हा ने उठाए सवाल, कहा- खराब मशीनों का इस्तेमाल क्यों?
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर उपजे विवाद में अब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भी कूद पड़े हैं। बिहार के पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने एक बार फिर पार्टी से अलग हटकर राय रखी है। इस बार सिन्हा ने निकाय चुनाव में प्रयोग में लाई जा रही EVM मशीनों के मुद्दे पर अपनी बात रखी है। सिन्हा ने ट्वीट कर कहा है कि यूपी, दिल्ली और मध्य प्रदेश में गड़बड़ ईवीएम के इस्तेमाल के बाद फिर से यूपी निकाय चुनाव में उन्हीं मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। यह क्या हो रहा है? सिन्हा ने ट्वीट कर कहा है कि चुनाव आयोग को आगे आकर चुनाव प्रणाली खासतौर से गुजरात में लोगों की विश्वसनीयता को बरकरार रखने के लिए अधिक सजगता से काम करना होगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के चकेरी क्षेत्र में नगर निकाय चुनाव को लेकर एक बड़ा आरोप लगाया गया है, यहां वॉर्ड 58 में वोटिंग करने पहुंचे मतदाताओं ने हंगामा काटा, मतदाताओं का आरोप है की ईवीएम में किसी भी पार्टी का बटन दबाने पर बीजेपी को वोट जा रहा हैं। चकेरी के तिवारीपुर वॉर्ड में बूथ 58 पर वोटिंग करके निकले मतदाताओं ने आरोप लगाया कि चाहे किसी भी पार्टी के पक्ष में वोट डालो वो सब बीजेपी में जा रहा है। विपक्षी पार्टी के लोगों को जब जानकारी हुई तो उन्होंने बूथ के बाहर हंगामा काटना शुरू कर दिया।
लोगों का कहना था की चाहे पंजे का बटन दबाओ या साइकिल का, लेकिन बत्ती केवल कमल की जल रही है। जब कमल का बटन दबाया जा रहा है तब भी केवल कमल की बत्ती जल रही है। लोगों का कहना है की ये आम जनता के साथ धोखा किया जा रहा है।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने 23 नवंबर को एक प्रेस वार्ता में कहा कि EVM में दिक्कत को लेकर तमाम शिकायतें आ रही हैं। EVM के संबंध में जहां भी शिकायत आती हैं वहां सारे वोट भारतीय जनता पार्टी को ही क्यों जाते हैं? सिंघवी ने कहा कि EVM के लिए VVPAT कापी नहीं है। मध्य प्रदेश से लेकर कई जगहों पर शिकायत आ रही है वहां जो भी बटन दबाएंगे वो सारे वोट भाजपा को ही जाते दिख रहे हैं। ऐसा क्यों हो जाता है कि जहां कहीं से भी EVM में छेड़छाड़ का मामला सामने आता है वहां वोट भाजपा को ही जाता है। सिंघवी ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद चुनाव पर आधारित है। इसलिए EVM पर मौजूद शंका और समस्याओं के लिए सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा या फिर सेवा निवृत्त जजों की एक समिति बनाई जाए।












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