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'इंदिरा गांधी ने 56 सैनिकों को पाकिस्तान में मरवा दिया?' शिमला समझौता पर BJP सांसद निशिकांत दुबे का गंभीर आरोप

Nishikant Dubey on Indira Gandhi Simla Agreement: बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है। निशिकांत दुबे ने शिमला समझौता को लेकर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने भारत का कब्जा किया हुआ 5000 स्क्वायर माईल भूभाग पाकिस्तान को देने का आरोप लगाया। वहीं बीजेपी सांसद के सवाल पर अब कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पलटवार किया है।

शिमला समझौते पर निशिकांत दुबे का विस्फोटक बयान

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लेकर शिमला समझौता को लेकर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी पर कई आरोप लगाए। जिसमें उन्होंने राज्य सभा में उस समय हुए डिबेट को कोट करते हुए लिखा कि,

शिमला समझौता आयरन लेडी इंदिरा गांधी जी ने क्या अमेरिका के दबाव में किया?

1. आयरन लेडी ने भारत का कब्जा किया हुआ 5000 स्क्वायर माईल भूभाग पाकिस्तान को क्यों दिया?

2. पाकिस्तान के पास हमारा 30 हज़ार स्क्वायर माईल भूभाग पाकिस्तानी के पास किसके दबाव में छोड़ा?

3. 93 हज़ार सैनिक लौटाने के बदले अपने 56 सैनिकों को पाकिस्तान के जेल में क्यों मरवा दिया?

यह राज्य सभा का डिबेट है,कॉंग्रेस पार्टी के सदस्य तथा पूर्व रक्षा मंत्री महावीर त्यागी जी तथा भाजपा / जनसंघ के वरिष्ठ नेता भाई महावीर जी के इन प्रश्नों का जवाब ना तो आयरन लेडी ने दिया ना विदेश मंत्री स्वर्ण सिंह जी ने?
कितना बिकेगा भारत? जनता को मूर्ख बनाइए,यही इतिहास है।

Nishikant Dubey on Simla Agreement
(Nishikant Dubey- File PIC, Simla Agreement- AI Image)

पवन खेड़ा ने किया पलटवार

वहीं निशिकांत दुबे के इस आरोप पर कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पलटवार करते हुए कहा कि, 'आप (मीडिया) एक झोलाछाप पर क्यों समय बर्बाद कर रहे हैं? ये तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के छात्र भी नहीं हैं, बल्कि व्हाट्सएप नर्सरी के हैं। उन्हें पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) जाकर कहना चाहिए कि शिमला समझौता खत्म कर दिया जाए। वो यहां समय क्यों बर्बाद कर रहे हैं?'

क्या है शिमला समझौता?

शिमला समझौता (Shimla Agreement) भारत और पाकिस्तान के बीच 2 जुलाई 1972 को हुआ एक ऐतिहासिक समझौता है, जिसे भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने शिमला (हिमाचल प्रदेश, भारत) में हस्ताक्षरित किया था। यह समझौता 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद हुआ, जिसमें पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ।

ये भी पढ़ें Shimla Agreement: क्या खत्म हो गया है शिमला समझौता? पाकिस्तान के रक्षा मंत्री और विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

शिमला समझौते के मुख्य बिंदु

शांतिपूर्ण समाधान का वादा

भारत और पाकिस्तान ने यह तय किया कि वे अपने सभी विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से, सीधे आपसी बातचीत के माध्यम से हल करेंगे - किसी तीसरे देश या संस्था की मध्यस्थता के बिना।

लाइनों का निर्धारण

1971 युद्ध के बाद जो युद्धविराम रेखा तय हुई थी, उसे "लाइन ऑफ कंट्रोल" (LoC) के रूप में स्वीकार किया गया। दोनों देशों ने यह माना कि वे LoC का उल्लंघन नहीं करेंगे।

राजनयिक संबंध बहाल करना

दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों को सामान्य करने, कैदियों को रिहा करने और युद्ध के प्रभावों को खत्म करने पर सहमत हुए।

कश्मीर का उल्लेख

समझौते में सीधे तौर पर कश्मीर का नाम नहीं लिया गया, लेकिन यह तय किया गया कि दोनों देश सभी मुद्दों को आपसी बातचीत से ही सुलझाएंगे यानि अंतरराष्ट्रीयकरण (जैसे UN या अमेरिका की मध्यस्थता) से बचेंगे।

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