1921 में पहली बार केरल के मोपला विद्रोह में दिखी थी तालिबानी मानसिकता: राम माधव
1921 में पहली बार केरल के मोपला विद्रोह में दिखी थी तालिबानी मानसिकता: राम माधव
कोकिझाड़, 20 अगस्त: भारतीय जनता पार्टी के नेता राम माधव ने 1921 में केरल में अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ हुए में हुए मोपला विद्रोह को तालिबानी मानसिकता का उदाहरण बताया है। माधव ने कहा कि बीती सदी में पहली बार तालिबानी झलक इसी दौरान दिखी थी लेकिन वामपंथियों ने इसे अंग्रेजों के खिलाफ एक विद्रोह बताकर जश्न मनाना शुरू कर दिया। जबकि सच्चाई इसके उलट है कि ये हिन्दुओं के खिलाफ एक दंगा था।

अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के लौटने के बाद तालिबान ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है। तालिबान के काबुल में काबिज होने के बाद इसकी दुनियाभर में चर्चा है। केरल के कोझिकोड में आयोजित एक कार्यक्रम में इसी पर बात करते हुए बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा, तालिबान सिर्फ एक आतंकी संगठन नहीं है, यह एक मानसिकता है। पिछली सदी में इस तरह की मानसिकता का शिकार होने वाला पहला समाज कोई और नहीं बल्कि केरल था। मोपला विद्रोह एक तरह से भारत में तालिबानी मानसिकता की पहली अभिव्यक्ति थी। बड़े देशों और दुनिया के पास उन अत्याचारों के बारे में जानने का कोई तरीका नहीं था, इसलिए उन्हें छिपाने और सही बताने का प्रयास किया गया। जिसके लिए इस पूरे घटनाक्रम को अंग्रेजों के खिलाफ एक विद्रोह और जमींदारों के खिलाफ एक कम्युनिस्ट क्रांति बताकर पेश किया गया।
माधव ने कहा कि तालिबान भारत के लिए कोई नई कहानी नहीं है क्योंकि इस तालिबानी मानसिकता का जन्म खास कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा से हुआ है, जिसकी पहली झलक मोपला विद्रोह के रूप में यहां देख चुके हैं। उन्होंने कहा, केरल ही नहीं 1947 में भारत के विभाजन के लिए भी उस समय की तालिबानी मानसिकता जिम्मेदार थी। यही मानसिकता बाद में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ भी देखी गई। यही पाकिस्तान और अफगानिस्तान में दिख रहा है।












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