2024 से पहले यूपी में OBC जनाधार को और मजबूत करने में जुटी बीजेपी, इस योजना पर कर रही है काम
बिहार में जारी हुई जातिगत जनगणना की रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस) ने जिस तरह से इस मसले को लपका है, उसके बाद बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करने का फैसला किया है।
यूपी में लोकसभा की 80 सीटों में से अभी बीजेपी के पास 66 सीटें हैं। रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा उपचुनावों में बनाए गए समीकरण से पार्टी को जो सफलता मिली थी, उसके बाद वह प्रदेश की सभी 80 सीटों को जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ऐसे में जातिगत जनगणना उसके सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।

ओबीसी जनाधार को और मजबूत करने पर अमल शुरू
लेकिन, जातीय जनगणना पर विपक्ष की फील्डिंग को देखते हुए बीजेपी ने बिना देर किए अभी से बैटिंग की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उत्तर प्रदेश में बीजेपी पिछड़ा वर्ग मोर्चा अपने कैडरों को इस तरह से तयार करने जा रही है, ताकि वह ये संदेश समाज के इस वर्ग तक पहुंचा सकें कि इस समाज के कल्याण के लिए बीजेपी ने किस तरह से योगदान दिया है।
2,00,000 ओबीसी कार्यकर्ताओं की नई फौज खड़ी करेगी
इसके लिए पार्टी 80 लोकसभा सीटों में आने वाली सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए 2,00,000 ओबीसी कार्यकर्ताओं की एक नई फौज खड़ी करने जा रही है। टारगेट एक है कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले इंडिया ब्लॉक जिस सामाजिक न्याय को मुद्दा बनाने जा रहा है, उसपर पार्टी अपनी स्थित पहले से ही मजबूत कर ले।
इंडिया ब्लॉक की रणनीति की जवाबी तैयारी
दरअसल,विपक्षी दल बिहार की तरह से यूपी समेत पूरे देश में जातीय जनगणना करवाने के साथ-साथ महिला आरक्षण के अंदर भी ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटे की वकालत करके भारतीय जनता पार्टी की ओबीसी वाली नींव हिलाने के चक्कर में हैं। उत्तर प्रदेश में ओबीसी आबादी अनुमानित तौर पर पूरी जनसंख्या से आधी से अधिक मानी जाती है और यह बीजेपी का सबसे बड़ा वोट बैंक बन चुका है।
विशेष वर्कशॉप में मिलेगी कैडरों को ट्रेनिंग
बीजेपी पिछड़ा वर्ग मोर्चा 25 सितंबर से पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए लखनऊ से एक वर्कशॉप की शुरुआत करने जा रहा है। इसमें कार्यकर्ताओं को बताया जाएगा कि पार्टी ने पिछड़े वर्ग के कल्याण के लिए क्या-क्या योगदान दिए हैं और किस तरह की योजनाएं केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से लाई गई हैं, जिसका ज्यादातर लाभ इसी वर्ग को पहुंच रहा है। पूरे अक्टूबर तक इस तरह के वर्कशॉप राज्य के सभी 75 जिलों में आयोजित किए जाने की योजना है।
हर विधानसभा क्षेत्र में 500 नए ओबीसी कैडर जोड़ेगी
यूपी बीजेपी ओबीसी मोर्चा के प्रमुख नरेंद्र कश्यप के हवाले से ईटी ने रिपोर्ट दी है कि राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी ओबीसी समाज से 500 नए कार्यकर्ताओं को जोड़ेगी। इस तरह से पार्टी अपने साथ राज्य में 2 लाख नए ओबीसी कैडरों को शामिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इस तरह से पार्टी अपनी यह छवि कायम रखना चाहती है कि वह पिछड़ों और वंचितों के लिए काम करने वाली पार्टी है।
कांग्रेस की 'पोल' खोलने की तैयारी में बीजेपी
उनके मुताबिक बीजेपी ने ओबीसी मोर्चा से जुड़े संदेशों पर नजर रखने के लिए 20,000 सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं की एक टीम भी बनाई है। कश्यप यूपी में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री भी हैं। कश्यप ने कहा है, '2010 में जब कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक पेश किया था, तो मैं संसद सदस्य था और उस समय उन्होंने ओबीसी विधेयक के अंदर कोटा की बात नहीं की थी। यह उनका दोहरा रवैया है और हम लोग लोगों को यह बता रहे हैं कि ये ऐक्ट नहीं करते हैं, सिर्फ रिएक्ट करते हैं।'
'समाज को उनकी नीयत के बारे में सावधान कर रहे हैं'
इस दिशा में उन्होंने ओबीसी मोर्चा की नीति का और खुलासा करते हुए बताया है कि 'हम लोगों को बता रहे हैं कि यह कांग्रेस की मूल नीति नहीं है, बल्कि सिर्फ नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए यह स्टैंड लिया गया है। हम समाज को उनकी नीयत के बारे में सावधान कर रहे हैं।'
उत्तर प्रदेश में 2014 से लेकर 2022 तक के तीन चुनावों (लोकसभा- 2014,2019 और विधानसभा-2022) में बीजेपी लगातार जीती है। 2019 में उसे राज्य में लगभग 50% वोट मिले थे। इसकी असल वजह ये है कि गैर-यादव ओबीसी वोटरों में उत्तर प्रदेश में उसकी जबर्दस्त पकड़ बन चुकी है। पार्टी इस जनाधार को किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देना चाहती। इसलिए इंडिया ब्लॉक के मंसूबों को भांपते हुए उसने अभी से धरातल पर काम करना शुरू कर दिया है।












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