क्या 2020 में भाजपा गिरिराज पर बड़ा दांव खेलने वाली है, नीतीश के खिलाफ खुली छूट के मायने

नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नीतीश पर हमले की खुली छूट मिली हुई है। बाढ़ को लेकर नीतीश बैकफुट पर हैं। नीतीश पर गिरिराज का हमला रोज-ब-रोज तेज हो रहा है। मोदी और शाह आंख- कान बंद किये हुए हैं। क्या यह सब जानबूझ यह सब किया जा रहा है ? बिना किसी आशीर्वाद के गिरिरराज ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकते। तो क्या भाजपा गिरिराज को बिहार में एंटी नीतीश फेस के रूप में खड़ा करने वाली है ? वे पिछले कई साल से बिहार में नीतीश के खिलाफ फील्डिंग कर रहे हैं। लेकिन नीतीश को ललकारने की छूट गिरिराज को अब मिली है। उन्होंने नीतीश को दो टूक कह दिया है कि बिहार में उनकी नहीं बल्कि दो दलों की सरकार है। अगर कुछ गलत होगा तो जरूर बोलेंगे, कोई रोक नहीं सकता। नीतीश से इस अंदाज में आज तक भाजपा के किसी नेता ने बात नहीं की थी। क्या 2020 में भाजपा गिरिराज पर कोई बड़ा दांव खेलने वाली है ?

ताल ठोक के बोले गिरिराज

ताल ठोक के बोले गिरिराज

गिरिराज सिंह की छवि एक ऐसे नेता की बन रही है जो ताल ठोक कर व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। सरकार किसी को हो, बखिया उधेड़ने में उन्हें देर नहीं लगती। अपनी हो, परायी हो, सबकी खबर लेते हैं। तो क्या सोची समझी नीति के तहत गिरिराज की ऐसी छवि को उभारा जा रहा है ? हाल के दिनों में उनकी लोकप्रियता ऐसी बढ़ी है कि अब राजद भी उनका मुरीद हो गया है। जो गिरिराज राजद को फूटी आंख नहीं सुहाते थे, अब वही उसके लिए सच बोलने वाले नेता हो गये हैं। राजद के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने गिरिराज सिंह की तहे दिल से तारीफ की है। ऐसा हो भी क्यों नहीं। जो काम राजद न कर सका वो अकेले गिरिराज कर रहे हैं। तेजस्वी ने राजद को निर्बल और लाचार बना दिया है। अब तो राजद को गिरिराज में ही ‘नेता' की छवि दिखने लगी है। सत्ता में साझीदार होते हुए भी गिरिराज विपक्ष की भूमिका में हैं। बाढ़ से निबटने में सरकार की नाकामी पर गिरिराज आग उगल रहे हैं। इससे जनता को लग रहा है कि कोई तो है जो उसके हक के लिए सरकार से लड़ रहा है।

गिरिराज लड़ाई आगे ले जाएंगे

गिरिराज लड़ाई आगे ले जाएंगे

गिरिराज सिंह ने जदयू से सवाल पूछा है कि आखिर उन्हें क्यों गाली दी रही है ? क्या बाढ़ के लिए जो अफसर दोषी हैं उन पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ? बाढ़ में फंसे लोगों का गुस्सा चरम पर है। वे सांसद, विधायक को देखते हैं तो गाली देने लगते हैं। मारने के लिए दौड़ते हैं। अफसरों को लोगों के दुख-तकलीफ से कोई मतलब नहीं है। मैं जनप्रतिनिधि होने के नाते अगर उनकी बात सरकार तक नहीं पहुंचाऊंगा तो ये काम कौन करेगा ? मुझे भी मालूम है बिहार में एनडीए की सरकार है। लेकिन जब जनता के दुख-दर्द में सरकार काम न आये तो आवाज उठानी पड़ती है। मैंने अपना काम किया तो जदयू के लोग मुझे गाली दे रहे हैं। मुझे तो गाली खाने की आदत हो गयी है, लेकिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बताएं कि मुझे क्यों गाली दी जा रही है। यानी अब गिरिराज, बिहार भाजपा के नीतीश मोह को झकझोरना चाहते हैं। अब उन्होंने अपनी लड़ाई भाजपा के चौखट तक पहुंचा दी है।

क्या मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं गिरिराज ?

क्या मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं गिरिराज ?

गिरिराज सिंह ने हाल ही में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी आधी इच्छा पूरी कर दी है, अगर बची हुई इच्छा पूरी जो जाए तो राजनीति से संन्यास ले लेंगे। हालांकि फिर वे अपनी बात से पलट गये थे। लेकिन ऐसा कह कर उन्होंने इशारों-इशारों में मुख्यमंत्री बनने की चाहत बता दी थी। क्या गिरिराज सिंह सीएम पद के भावी उम्मीदवार हो सकते है ? पिछले 15 साल से बिहार में कोई ऐसा नेता नहीं उभर सका जो नीतीश को टक्कर दे सके। या नीतीश का विकल्प बन सके। लालू यादव के राजनीति से बेदखल होने के बाद नीतीश अकेले महायोद्धा रह गये हैं। बिहार भाजपा में सुशील मोदी बड़े नेता हैं। जुझारू भी हैं। उनकी काबिलियत में कोई कमी नहीं है। लेकिन अतिशय नीतीश प्रेम उनकी राह का रोड़ है। भाजपा को एंटी नीतीश फेस चाहिए जो ठोक-बजा कर काम करे। गिरिराज बेशक नीतीश की तरह जहीन और सुलझे हुए नेता नहीं हैं लेकिन राजनीति में बौद्धिकता से अधिक लोकप्रियता मायने रखती है। लालू यादव की देशज शैली कभी नीतीश पर भारी पड़ती थी। गिरिराज भी ठेठ अंदाज में वही बोलते हैं जो भाजपा के समर्थकों को पसंद है।

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