BJP Foundation Day: 44 बरस की हुई बीजेपी, पीएम मोदी समेत इन लोगों ने कही खास बातें
BJP Foundation Day: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आज यानी 6 अप्रैल 2024 को अपना 44वां स्थापना दिवस बड़े उत्साह और उमंग के साथ मना रही है। भगवा पार्टी की स्थापना आज के दिन 1980 में हुई थी। वर्तमान समय में यह दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है।
बीजेपी के स्थापना दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। हर साल, स्थापना दिवस समारोह में पार्टी की यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों पर विभिन्न कार्यक्रम, भाषण और चर्चाएं शामिल होती हैं।
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भाजपा स्थापना दिवस पार्टी और उसके सदस्यों के लिए एक साथ आने और भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतों, विचारधारा और परिवर्तनकारी योगदान पर विचार करने का एक महत्वपूर्ण समय है। यह उत्सव, चिंतन और पार्टी के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता के नवीनीकरण का दिन है। जैसा कि देश भाजपा का 44वां स्थापना दिवस मना रहा है, राष्ट्र पार्टी के समावेशी और समृद्ध भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
पीएम मोदी और जेपी नड्डा ने सभी को दी बधाई
पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने मल्टिमीडिया साइट एक्स पर पोस्ट कर के सभी भाजपाइयों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने लिखा, "भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर देशभर के मेरे कर्मठ और परिश्रमी कार्यकर्ताओं को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। आज बीजेपी की उन सभी महान विभूतियों को नमन करने का दिन है, जिन्होंने वर्षों की अपनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और त्याग से पार्टी को सींचकर इस ऊंचाई तक पहुंचाया है। मैं आज पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि भाजपा देश की सबसे पसंदीदा पार्टी है, जो 'राष्ट्र प्रथम' के मंत्र के साथ जन-जन की सेवा में जुटी है।"
इस क्रम में प्रधानमंत्री ने कई सारे पोस्ट डालते हुए बीजेपी की उपलब्धियों को गिनाया और आगामी चुनाव में जीत को लेकर आश्वस्तता जताई। पीएम ने कहा, भारत को भ्रष्टाचार, जातिवाद, सांप्रदायिकता और वोट बैंक की राजनीति से बीजेपी ने मुक्त कराया है।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी पोस्ट के माध्यम से भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं और समर्थक को बधाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, ''भाजपा के स्थापना दिवस पर मैं अपने सभी वरिष्ठ नेताओं को नमन करता हूं, जिन्होंने अपने त्याग, समर्पण और कड़ी मेहनत से संगठन को राष्ट्रव्यापी विस्तार दिया। इस अवसर पर स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। सभी कार्यकर्ताओं को पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी भाजपा कार्यकर्ता विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ आगामी आम चुनाव में अभूतपूर्व जीत की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।''
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, "भाजपा के स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। मैं पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को बधाई देता हूं, जिन्होंने भाजपा को न केवल भारत में बल्कि दुनिया में नंबर एक राजनीतिक दल बनाया है। आज पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है..."
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कैसे हुई भाजपा की स्थापना?
4 अप्रैल, 1980 का दिन था। जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष, चन्द्रशेखर, मोहन धारिया और मधु लिमये जनसंघ (जनता पार्टी का घटक) के नेताओं से बार-बार कह रहे थे कि उनकी दोहरी सदस्यता काम नहीं करेगी। विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेई और सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री लालकृष्ण आडवाणी समझाते रहे कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमारा मातृ संगठन है, बचपन से ही हमें उनसे संस्कार मिले हैं। संघ में कोई सदस्यता नहीं है। संघ एक सांस्कृतिक संगठन है जो भारत की संस्कृति, परंपरा, राष्ट्रवाद और सनातन धर्म के लिए काम करता है।
इसके बावजूद जनता पार्टी के अन्य घटक दल सहमत नहीं हुए। सच तो यह था कि आपातकाल के बाद जनसंघ भारत का पहला राजनीतिक दल था जिसने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मिटा दिया। जनता पार्टी के नेताओं, यहां तक कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने भी अटल और आडवाणी की बात नहीं मानी और चुप रहे। अटल और आडवाणी ने पूर्व संगठन सचिव सुंदर सिंह भंडारी को 4 अप्रैल 1980 को देश के सभी प्रांतों और राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख नेताओं की आपात बैठक बुलाने को कहा था।
उस बैठक में मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता और ग्वालियर के तत्कालीन सांसद नारायण कृष्ण शेजवलकर भी शामिल हुए थे। बैठक शुरू हुई। सबसे पहले आडवाणी ने जनता पार्टी से उठे सभी मुद्दों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि दोहरी सदस्यता के नाम पर जनता पार्टी के अन्य घटक दल हमारे बारे में संघ के 'स्वयंसेवक' नहीं होने और अपने कार्यक्रमों के साथ संघ की सदस्यता छोड़ने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अटल और मैंने जनता पार्टी के नेताओं को काफी सलाह दी है। मैंने समझाने की कोशिश की और कहा कि संघ में कोई सदस्यता नहीं है, संघ से हमारा वैचारिक जुड़ाव है। लेकिन जनता पार्टी के नेताओं और अन्य घटक दलों को यह बात समझ में नहीं आयी।
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वहां श्रीजगन्नाथ राव जोशी, भैरो सिंह शेखावत, सुंदर सिंह भंडारी, केदारनाथ साहनी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार, विजय कुमार मल्होत्रा, कुशाभाऊ ठाकरे, जे.पी.माथुर, कैलाशपति मिश्र, उत्तम राव पाटिल, विष्णुकांत शास्त्री, ओ.मोरे उपस्थित थे। राजगोपाल, यज्ञदत्त शर्मा, मदनलाल खुराना, अश्विनी कुमार, केशुभाई पटेल और यदुरप्पा सहित देश के 125 से अधिक नेताओं ने एक साथ कहा कि हम सबसे पहले स्वयंसेवक हैं और संघ से हमारा संबंध मरने के बाद भी नहीं टूट सकता। इसके लिए हमें जनता पार्टी छोड़नी पड़ सकती है।
आखिरकार सभी की भावनाएं सुनकर अटल भावुक हो गए। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं और हमेशा रहेंगे लेकिन अब जनता पार्टी में शामिल नहीं होंगे। अटल की बात सुनकर उपस्थित सभी नेताओं ने तालियां बजाईं और एक स्वर में कहा कि हमने जनसंघ राजनीतिक दल का विलय जनता पार्टी में कर दिया है, लेकिन आज भी जनसंघ के कार्यकर्ता सहयोग के कारण देश के हर हिस्से में हैं जनसंघ के कार्यकर्ताओं और संघ ने कहा कि 1977 में आपातकाल की समाप्ति के बाद देश में जनता पार्टी को इतनी सीटें मिलीं। बैठक में सुंदर सिंह भंडारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया और इस समिति को सुझाव देने का काम सौंपा गया। पार्टी के लिए एक नया नाम, एक नया चुनाव चिन्ह बनाना और एक नया संविधान बनाना।
6 अप्रैल, 1980 को देशभर के प्रमुख जनसंघ नेताओं की बैठक हुई और नई भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई। चुनाव चिह्न कमल घोषित किया गया और पार्टी का संविधान बनाने का काम शुरू हुआ। बीजेपी का पहला अधिवेशन मुंबई के माहिम इलाके में हुआ। सभी वरिष्ठ नेतृत्व ने लाखों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में सर्वसम्मति से जनसंघ के तीन बार अध्यक्ष रहे अटल बिहारी वाजपेई को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया। कई प्रस्ताव पारित किये गये और यहां से भाजपा अस्तित्व में आई।
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