पहली बार इंसान ने नहीं Drone Boat ने बचाई जान, Hormuz में डूब रहे थे US Apache के पायलट, कैसे किया रेस्कयू?

Hormuz Helicopter Crash: 9 जून को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) में हुई एक घटना ने दुनिया का ध्यान खींच लिया। मामला सिर्फ अमेरिकी सेना के दो पायलटों के बचाव का नहीं था, बल्कि इस बात का था कि उन्हें बचाने के लिए पहली बार एक इंसान रहित सैन्य जहाज (Unmanned Military Vessel) का इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी सेना का AH-64 Apache हेलीकॉप्टर होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में एक गश्ती मिशन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

आमतौर पर ऐसे मामलों में रेस्क्यू हेलीकॉप्टर या वॉरशिप भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार सबसे पहले जिस प्लेटफॉर्म को भेजा गया, वह था अमेरिकी नौसेना का ऑटोमैटिक ड्रोन जहाज "Corsair"। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह पहला अमेरिकी रेस्क्यू ऑपरेशन है जिसमें समुद्र में फंसे सैन्य कर्मियों को बचाने के लिए एक अनमैन्ड सरफेस वेसल (USV) का इस्तेमाल किया गया।

US Apache Crash in Hormuz

आखिर Apache हेलीकॉप्टर के साथ क्या हुआ था?

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक AH-64 Apache हेलीकॉप्टर ओमान के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नियमित समुद्री गश्त कर रहा था। हेलीकॉप्टर 8 जून को शाम लगभग 7:30 बजे (Eastern Time) हादसे का शिकार हुआ। स्थानीय समय के मुताबिक यह घटना 9 जून को सुबह लगभग 3:30 बजे हुई। बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि हेलीकॉप्टर एक ईरानी शाहेद अटैक ड्रोन से टकराने के बाद समुद्र में गिर गया।

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ईरान ने आरोपों से किया इनकार

हालांकि अमेरिका के दावों के बाद ईरान ने इस घटना में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सरकारी न्यूज एजेंसी ने एक अज्ञात सैन्य अधिकारी के हवाले से कहा कि "सैन्य हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बहाने दुश्मन किसी नई आक्रामक कार्रवाई की कोशिश न करे।" ईरान का कहना है कि हेलीकॉप्टर गिराए जाने में उसका कोई हाथ नहीं था।

हादसे के बाद भी दोनों पायलट कैसे बचे?

हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बावजूद दोनों क्रू मेंबर जिंदा बच गए। पानी के ऊपर रेस्क्यू ऑपरेशन का इंतजार कर रहे थे। Apache के पायलट और गनर ने समुद्र में गिरने के बाद सर्वाइवल किट और फ्लोटेशन डिवाइस का इस्तेमाल किया। इसके बाद सबसे बड़ी चुनौती थी उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना। आमतौर पर ऐसी स्थिति में कई हेलीकॉप्टर, विमान और नौसैनिक जहाजों वाला बड़ा Combat Search and Rescue Operation शुरू किया जाता है। लेकिन इस बार अमेरिकी कमांडरों ने एक बिल्कुल अलग रास्ता चुना।

कैसे पहुंची ड्रोन बोट पायलटों तक?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक हेलीकॉप्टर के समुद्र में गिरने के बाद दोनों पायलटों ने अपने इमरजेंसी बीकन एक्टिव कर दिए। इसके बाद क्षेत्र में तैनात Corsair Autonomous Surface Vessel को रेस्क्यू मिशन सौंपा गया। यह प्लेटफॉर्म US Naval Forces Central Command और Task Force 59 के तहत संचालित किया जा रहा था। अपने ऑनबोर्ड सेंसर, रडार और नेविगेशन सिस्टम की मदद से ड्रोन बोट ने इमरजेंसी सिग्नल को ट्रैक किया और रात के अंधेरे में खुले समुद्र में दोनों पायलटों का पता लगा लिया।

दो घंटे में पहुंची स्पॉट पर

हेलीकॉप्टर दुर्घटना के लगभग दो घंटे बाद Corsair ड्रोन बोट पायलटों तक पहुंच गई। ड्रोन बोट ने दोनों सैन्य कर्मियों को पानी से बाहर निकाला और अपने ऊपर सुरक्षित स्थान पर ले आई। हालांकि उन्हें सीधे तट पर नहीं ले जाया गया। इसके बजाय ड्रोन बोट उन्हें समुद्र में पहले से निर्धारित एक सुरक्षित क्षेत्र तक लेकर गई।

फिर कैसे पूरा हुआ रेस्क्यू?

जब Corsair सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंची तो वहां एक सैन्य हेलीकॉप्टर भेजा गया। हेलीकॉप्टर ने दोनों पायलटों को ड्रोन बोट से एयरलिफ्ट कर लिया और इस तरह पूरा रेस्क्यू मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। US Central Command के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने पुष्टि की कि इस मिशन में इस्तेमाल किया गया प्लेटफॉर्म Task Force 59 द्वारा संचालित Corsair Unmanned Surface Vessel था।

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क्या यह भविष्य के युद्ध की झलक है?

ओमान की खाड़ी में हुआ यह रेस्क्यू मिशन सिर्फ दो पायलटों की जान बचाने की कहानी नहीं है। यह उस भविष्य की झलक भी है जिसमें इंसानों की जगह मशीनें खतरनाक इलाकों में सबसे पहले पहुंचेंगी। Corsair ड्रोन बोट द्वारा किया गया यह ऑपरेशन दिखाता है कि आने वाले सालों में समुद्री युद्ध, निगरानी और बचाव अभियानों का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। अब सवाल यह नहीं है कि ड्रोन सिस्टम भविष्य हैं या नहीं, बल्कि यह है कि वे कितनी तेजी से दुनिया की सेनाओं का मुख्य हिस्सा बनेंगे।

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