2014 वाले इस फॉर्मूले को 2019 में दोहरा सकते हैं अमित शाह, BJP ने बनाई खास रणनीति
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए नए सहयोगियों की तलाश शुरु कर दी है। शाह के इस मिशन का मुख्य उद्देश यह है कि देश में पार्टी के पक्ष में मतदाताओं का विस्तार करना औऱ विपक्षी दलों द्वारा बनाए गए महागठबंधन का सामना करने के लिए एक मजबूत संगठन तैयार करना। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सभी राज्य इकाइयों को संभावित सहयोगियों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। सूची पर चर्चा उस समय की जाएगी जब अमित शाह अपने 'प्रवास' के दौरान उन राज्यों का दौरा करेंगे।

बीजेपी का छोटे दलों पर फोकस
इस अभ्यास के पीछे मुख्य वजह यह है कि, ऐसे समूहों की खोज करो जो पूरे राज्य में भले ही सक्रिय ना हो लेकिन उनका प्रभाव समाज के एक विशेष वर्ग पर हो। इसी रणनीति का बीजेपी ने 2014 से लोकसभा चुनावों में उपयोग किया था। बीजेपी ने बिहार में जहां राष्ट्रीय लोक समित पार्टी (आरएलएसपी) से, यूपी में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल जैसे छोटे संगठनं को एनडीए में शामिल किया था। जिसकी मदद से बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनावों में अन्य पार्टियों का सूपड़ा साफ कर दिया था।

सत्तारूढ़ गठबंधन को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ेगा
2014 के चुनावों में, बीजेपी ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का गठन करने के लिए 28 छोटे और बड़े क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन किया था। 543 सदस्यीय लोकसभा में एनडीए ने 334 सीटें हासिल की, जिसमें बीजेपी की 282 सीटें थी। मोदी की लोकप्रियता शायद अभी तक कम नहीं हुई है। लेकिन केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ेगा। यहीं नहीं जिन 20 राज्यों में बीजेपी और उनके सहयोगी पार्टियों की सरकार है। वहां बीजेपी और एनडीए को दोहरी सत्ता विरोधी लहर से सामना होगा।

महागठबंधन कर सकता है बीजेपी का बड़ा नुकसान
अगर 2104 के लोकसभा चुनावों की सीटों का विशलेषण करने पर तो जो नतीजे सामने आए वे बेहद ही चौंकाने वाले थे। अगर कांग्रेस, बीएसपी, सपा, आरएलडी, राजद, जेएमएम और जेवीएम एक साथ आ जाती है तो 2019 के लोकसभा में वे बीजेपी से सीटें छीन लेंगी। वहीं उत्तर प्रदेश की बात करें तो पिछले चुनाव में बीजेपी ने 80 में से 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अगर 2019 क चुनाव में सपा, बसपा, कांग्रेस और आरएलडी एक साथ हो जाती है तो वह बीजेपी से 49 सीटें तक छीन लेंगी।

ज्यादा पार्टनर जोड़ने की कोशिश
इसलिए अमित शाह 2019 के चुनावों में इन सभी समीकरणों से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पार्टनर जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी ये बात मामूल है कि, छोटी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ अगर बीजेपी गठबंधन करती है तो उसे अधिक फायदा होगा। जैसे बिहार में आरएलएसपी नेता उपेंद्र कुशवाह ओबीसी वोटों की बीजेपी में शामिल करने में बड़े फैक्टर के तौर पर देखे जाते हैं।












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