मिलिए बिलकिस को इंसाफ दिलाने वाली महिला से, जिन्होंने जख्मों पर लगाया हौसले का मलहम

Bilkis Bano Case: सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो केस में 11 दोषियों की रिहाई रद्द करके पीडिता को इंसाफ दिलाया। कोर्ट ने 11 दोषियों को जल्द से जल्द सरेंडर करने का आदेश दिया है। 20 साल से ज्यादा चली बिलकिस की कांटों से भरी इस संघर्षमय लड़ाई में पग-पग साथ रहने वाली और कोई नहीं एक महिला वकील है। जिन्होंने बिलकिस के जख्मों पर हौसले का मलहम लगाया है।

कोर्ट से मिले इंसाफ के बाद बिलकिस बानो ने अपने दिल की बयां की। जिसमें महिला वकील का जिक्र किया। बिलकिस ने बताया कि मेरी वकील इस 20 सालों से ज्यादा समय तक चले कांटों से भरे सफर में साथ चलती रहीं। उन्होंने मुझे न्याय के विचार में कभी आशा खोने नहीं दी। आइए जानते हैं कौन है ये महिला वकील ?

Bilkis Bano Case Update

बिलकिस बानो की इंसाफ की जंग में पग-पग चलने वाली वकील का नाम शोभा गुप्ता है। खास बात यह है कि केवल 7 साल के कानूनी पेशे के दौरान ही उनके हाथ में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बिलकिस बानो का केस दिया। जिसको शोभा ने बखूबी निभाया। चाहे बानो को हौसला देना हो या फिर इंसाफ की इस जंग में साथ चलना हो।

लिंक्डइन की प्रोफाइल के मुताबिक, वर्तमान में शोभा गुप्ता को वकालत का करीब 3 दशक का अनुभव है। साल 1990 में शोभा ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपने लॉ करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद, कई सरकारी पैनल और प्राइवेट फर्म की एडवोकेट रहीं। साल 2000 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से जुड़ गईं। इसके बाद, साल 2002 में गुजरात दंगों के दौरान गर्भवती बिलकिस बानो का गैंगरेप केस की बहस की।

कौन हैं वो जज? जिन्होंने बानो को दिया इंसाफ
गुजरात सरकार के 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा माफी के आदेश को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने बिलकिस को इंसाफ दिया।

जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने गुवाहाटी के सरकारी लॉ कॉलेज से कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की। उसके बाद, गौहाटी यूनिवर्सिटी से कानून में मास्टर की डिग्री हासिल की। 2010 में, गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किए गए। एक के बाद एक सफलताओं का कारवां तय करते हुए 2019 को बॉम्बे हाईकोर्ट और फिर 22 अक्टूबर 2021 को तेलंगाना हाईकोर्ट के जस्टिस के रूप में ट्रांसफर हुआ। 14 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के रूप में नियुक्त हुए।

वहीं, जस्टिस बीवी नागरत्ना का जन्म स्थान कर्नाटक के पन्दवापुरा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बेंगलुरु में एक वकील के रूप में की थी। 2008 में कर्नाटक हाईकोर्ट में एक अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति मिली। 2010 में स्थायी न्यायाधीश हुईं। 2021 में बीवी नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बनीं।

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