Bilkis Bano: गुजरात सरकार ने SC को बताया-केंद्र ने दी थी बलात्कारियों की रिहाई को मंजूरी
सु्प्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो केस मामले में 11 दोषियों को रिहाई में दी गई छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर गुजरात सरकार से जवाब मांगा है। उच्चतम न्यायालय ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सु्प्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो केस मामले में 11 दोषियों को रिहाई में दी गई छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर गुजरात सरकार से जवाब मांगा है। उच्चतम न्यायालय ने गुजरात सरकार को इस मामले में नोटिस जारी किया है। दो सप्ताह के बाद इस मामले में सुनवाई होगी।
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गुजरात सरकार ने इस मामले में अपने फैसले का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। जिसमें कहा गया कि उन्हें जेल में 14 साल की सजा पूरी करने के बाद छूट दी गई थी और उनका व्यवहार अच्छा पाया गया था। साथ ही ये भी कहा कि केंद्र ने दोषियों की रिहाई की मंजूरी दी थी।
केंद्र ने दी थी मंजूरी
वहीं, गुजरात सरकार की ओर से दायर हलफनामे से पता चलता है कि एसपी, सीबीआई, एससीबी, मुंबई और विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) मुंबई ने दोषियों की सजा में छूट का विरोध किया। गृह मंत्रालय ने बिलकिस बानो केस मामले के दोषियों की समय से पहले रिहाई की सिफारिश की।
11 दोषी 15 अगस्त को गोधरा उप जेल से बाहर आए थे
बता दें, इस मामले में 11 दोषी 15 अगस्त को गोधरा उप जेल से बाहर आए थे। गुजरात सरकार ने कैदियों को माफी नीति के तहत दोषियों की रिहाई को मंजूरी दी। सभी ने जेल में 15 साल की सजा पूरी कर ली थी। साल 2002 में गोधरा ट्रेन में आगजनी की घटना के बाद भड़की हिंसा के दौरान 21 साल की बिलकिस बानो 5 महीने की गर्भवती थी।
इसी हालत में उसके साथ गैंगरेप किया गया। मरने वालों में उसकी 3 साल की बेटी भी थी। 21 जनवरी 2008 को मुंबई में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने सभी 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सभी को बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप करने और उसके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या का दोषी ठहराया गया था। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा।
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