Bihar Election Result 2020: कांग्रेस को 70 सीट देकर RJD ने गलती कर दी ? टीम का फिसड्डी खिलाड़ी निकली

नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है। अभी तक नीतीश कुमार की अगुवाई वाला एनडीए आगे चल रही है। इसके पहले एग्जिट पोल में महागठबंधन को आगे दिखाया गया था। मतगणना शुरू हुई तो भी तेजस्वी के नेतृत्व वाला महागठबंधन तेजी से आगे बढ़ता नजर आया लेकिन धीरे-धीरे जैसे मतो की गिनती आगे बढ़ी महागठबंधन पीछे होने लगा।

Tejashwi Yadav

महागठबंधन में आरजेडी (RJD) सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। वाम दल भी बेहतरीन प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। लेकिन कांग्रेस तेजस्वी की टीम में सबसे कमजोर खिलाड़ी साबित हुई है। अभी तक की मतगणना के बाद कांग्रेस को 20 सीटें मिलने की संभावाना नजर आ रही है। ऐसा तब है जब कांग्रेस ने इस बार सीट बंटवारे में बड़ी बाजी मारते हुए 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।

कांग्रेस पिछले प्रदर्शन से भी पीछे
अगर तेजस्वी चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बनने से दूर होते नजर आ रहे हैं तो उसमें कांग्रेस का खराब प्रदर्शन को बड़ा जिम्मेदार माना जाएगा। 144 सीट पर लड़ने वाले आरजेडी को 70 से अधिक सीट मिलती दिखाई दे रही है। वाम दलों के हिस्से 29 सीटें आई थीं और वे 19 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं 70 सीट पर लड़ने वाली कांग्रेस सिर्फ 20 सीट के साथ सबसे फिसड्डी साबित हुई है।

आरजेडी के लिए ये पहला चुनाव था जो पार्टी ने लालू प्रसाद यादव के बिना लड़ा। इसका असर महागठबंधन के सीट बंटवारे में भी साफ नजर आया। 2015 के विधानसभा चुनाव में जहां महागठबंधन के खाते में कांग्रेस को केवल 40 सीट मिली थी। बावजूद इसके 2015 में कांग्रेस ने 27 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। अभी तक के रुझानों को देखा जाए तो कांग्रेस इस बार 2015 के प्रदर्शन तक भी नहीं पहुंचती दिख रही है।

सीट बंटवारे में दबाव में रहे तेजस्वी
इस चुनाव में राहुल गांधी ने बिहार में कई रैलियां की लेकिन उनकी सभाओं में वैसी भीड़ नहीं नजर आई। पिछले कई दशकों से बिहार की सत्ता की कमान खो चुकी कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा भी राज्य में मजबूत नहीं है। ऐसे में कांग्रेस को गठबंधन में 70 सीट देना आरजेडी के लिए कोई समझदारी भरा फैसला नहीं था। लेकिन जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के गठबंधन से हटने के बाद कांग्रेस ने भी अपने तेवर तेज किए थे और आखिरकार तेजस्वी ने कांग्रेस को 70 सीटें देने का फैसला किया। यहां आरजेडी को लालू प्रसाद यादव की कमी जरूर खली थी। सीट बंटवारे के ऐलान के वक्त भी ये चर्चा जरूर उठी थी कि अगर लालू यादव होते तो शायद आरजेडी और अधिक सीटों पर चुनाव लड़ती और आज तस्वीर कुछ और होती।

वाम दलों को भी मिली ज्यादा सीटें
सीट बंटवारे में वाम दलों को भी काफी सीटें मिली थीं। पिछले चुनावों में इकाई में सिमट चुकी भाकपा-माले इस बार विधानसभा में दहाई की संख्या में पहुंचती नजर आ रही है। इसके साथ ही भाकपा और माकपा भी ठीक प्रदर्शन करती नजर आ रही है। अभी तक के रुझान के मुताबिक वाम दलों में भाकपा और माकपा दोनों विधानसभा में पहुंच रहे हैं। बता दें महागठबंधन में वाम दलों को 29 सीटें मिली थीं।

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