हर्ष राज हत्याकांड का क्या बिहार के अंतिम चरण के चुनाव पर असर पड़ेगा? आरोपी चंदन यादव का निकला सियासी कनेक्शन
Bihar Lok Sabha Election: पटना यूनिवर्सिटी के छात्र हर्ष राज की खौफनाक की हत्या की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, इसमें नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अबतक जितने भी तथ्य पब्लिक डोमेन में हैं, उससे साफ है कि हर्ष सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के नेताओं के प्रचार के लिए काम रहा था। वहीं हत्या का आरोपी चंदन यादव विपक्षी इंडिया ब्लॉक के प्रचार में सक्रिय था।
हालांकि, हर्ष की इतनी बेरहमी से हत्या आपसी रंजिश की वजह से हुई या फिर इसके पीछे कोई गंभीर राजनीतिक साजिश है? इसकी तफ्तीश पटना पुलिस कर रही है।

इंडिया ब्लॉक के प्रचार अभियान में सक्रिय था आरोपी चंदन यादव
स्वभाव से सौम्य माने जाने वाले और छात्र संघ का चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले हर्ष के हत्या के आरोप में जिस चंदन यादव नाम के छात्र को पकड़ा गया है, उसकी हकीकत बहुत ही चौंकाने वाले हैं।
वामपंथी छात्र संघ का नेता निकला हत्या का आरोपी
चंदन यादव न सिर्फ वामपंथी छात्र संगठन आईसा (AISU) का उपाध्यक्ष है, बल्कि नालंदा लोकसभा क्षेत्र में इंडिया ब्लॉक के प्रत्याशी के लिए प्रचार करते हुए भी दिख चुका है। वह पटना जिले के बिहटा के अम्हारा गांव (पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र) का रहने वाला है।
नालंदा सीट पर इस बार महागठबंधन ने पालीगंज के लेफ्ट के एमलए संदीप सौरव को उतारा है और सोशल मीडिया की तस्वीरों में चंदन उनके लिए वोट भी मांगता दिख रहा है। यही नहीं वह 3 मार्च को पटना के गांधी मैदान में इंडिया ब्लॉक की जन विश्वास रैली में भी बहुत ज्यादा सक्रिय रह चुका है। वैसे इस वारदात के बाद आईसा ने आरोपी को संगठन से बाहर कर दिया है और सभी आरोपियों को सख्त सजा देने की मांग की है।
एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार कर चुका था मृतक हर्ष राज
पीड़ित हर्ष राज वैशाली जिले के मझौली का रहने वाला था। वह समस्तीपुर (सुरक्षित) लोकसभा सीट पर एनडीए उम्मीदवार और लोजपा (रामविलास) की प्रत्याशी शांभवी चौधरी के बहुत ही सघन प्रचार अभियान में शामिल रह चुका है।
हर्ष राज हत्याकांड का क्या बिहार के अंतिम चरण के चुनाव पर असर पड़ेगा?
देश के लगभग सभी राज्यों में चुनावी राजनीति पर जातियों का प्रभाव रहता है। लेकिन, बिहार में यह बहुत ही ज्यादा असरदार है। ऐसे में अगर अंतिम दौर से पहले हुई इस हत्याकांड का आरोपी यादव निकला है और पीड़ित भूमिहार जाति से ताल्लुक रखता है तो इसका राजनीतिक अंजाम क्या होगा, यह देखने वाली बात है।
1 जून बिहार की जिन 8 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें पटना साहिब, पाटलिपुत्र और जहानाबाद भी शामिल हैं। इनमें से खासकर पाटलिपुत्र और जहानाबाद लोकसभा सीटों पर भूमिहार मतदाताओं का काफी दबदबा रहा है। इस बार पाटलिपुत्र में जहां बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में भूमिहारों में ज्यादा उत्साह नहीं दिखने की बात सामने आ रही थी, तो जहानाबाद में जेडीयू प्रत्याशी चंद्रेश्वर चंद्रवंशी के खिलाफ इनके एक वर्ग में नाराजगी खुलकर नजर दिख रही थी।
इन दोनों ही सीटों पर भूमिहारों की नाराजगी का फायदा राष्ट्रीय जनता दल को मिलने की संभावना है। यही नहीं राजद नेता ने जिस तरह से नौकरियों के वादों की झरी लगाई है, उससे सवर्ण जातियों के युवाओं के एक वर्ग में भी उनके प्रति आकर्षण बढ़ते देखा गया है।
वैसे बिहार में आमतौर पर सवर्ण मतदाताओं का भाजपा समर्थक माना जाता है। कुछ सीटों पर अगर नाराजगी की खबरें सामने आई हैं तो उसके पीछे मुख्य रूप से संबंधित उम्मीदवार ही बताए जाते हैं। अब हर्ष हत्याकांड में जो तथ्य सामने आए हैं, उसका मौजूदा माहौल में चुनावों पर क्या असर पड़ता है, यह 4 जून को पता चल पाएगा।












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