Bihar Lok Sabha Chunav: बिहार में तेजस्वी यादव की 'तेजी' में घिर चुका है NDA?
Bihar Lok Sabha Election: बिहार में इंडिया ब्लॉक का झंडा इस बार अकेले आरजेडी नेता तेजस्वी यादव अपने कंधों पर उठाए दिख रहे हैं। राज्य में विपक्षी महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद है और इसके सुप्रीमो लालू यादव बीमारी की वजह से प्रचार में ज्यादा सक्रिय नहीं हैं। लेकिन, पूर्व उपमुख्यमंत्री ने अपने दम पर सत्ताधारी एनडीए की हवा टाइट करने की पूरी कोशिश की है।
बिहार में इंडी अलायंस के सबसे बड़े सक्रिय चेहरा होने की वजह से तेजस्वी यादव एक तरफ अपने 'चाचा' मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी तंज करने से नहीं झिझकते तो दूसरी तरफ सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी शब्द बाण चलाने से नहीं चूक रहे।

तेजस्वी यादव 'पीड़ा' में भी कर रहे हैं प्रचार
34 वर्षीय तेजस्वी यादव इस समय शारीरिक रूप से तकलीफ में हैं। वह कई बार व्हीलचेयर पर नजर आते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें पेनकिलर खाकर चुनाव प्रचार की जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही है। लेकिन, शारीरिक पीड़ा के बावजूद उनका जोश और उत्साह कम नहीं है और वह बिहार में एनडीए का पूरी तरह से सफाया करने का दावा कर रहे हैं।
पीएम मोदी पर कसा 'म' से महंगाई वाला तंज
हाल में आरा की एक सभा में वह प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसने के लिए कुछ चुने हुए शब्दों के तीर चला रहे थे, जिसपर सुनने वालों का खूब मनोरंजन हो रहा था। उनके शब्द थे, 'मुजरा, मटन, मछली, मंगलसूत्र, मुसलमान मंदिर..।'
उन्होंने इन शब्दों में 'म' अक्षर का इस्तेमाल महंगाई के मुद्दे पर पीएम मोदी को घेरने के लिए किया। बाद में उन्होंने एक्स पर लिखा, 'सुन लीजिए- जनता गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और सब्जियों के भाव बता रही है। 'म' अक्षर से लगाव है मोदी जी महंगाई का 'म' भी नहीं बोल पा रहे।' ऊपर तेजस्वी ने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया, उनका इस बार के अभियान में कभी न कभी प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर हमले के लिए उपयोग किए हैं।
समर्थकों के बीच खूब लोकप्रिय हो रहे हैं तेजस्वी
इस बार के चुनाव अभियान में तेजस्वी बीमारी के नाम पर जेल से जमानत पर निकले अपने पिता की कमी नहीं खलने दे रहे। वह अपने भाषणों, गानों, चुटकियों और तंज से सभाओं में आने वाले पार्टी समर्थकों की ऊर्जा बढ़ाए रखने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे।
'फोर्थ जून बीजेपी गोइंग सून'
प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी को घेरने के लिए वह 90 के दशक के बॉलीवुड के कुछ हिट गानों के माध्यम से भी उसपर हमला करते हैं। एक एक्स पोस्ट में वे लिखते हैं, 'टन टनाटन टन टन टारा, बीजेपी हो गई नौ दो ग्यारह....फोर्थ जून बीजेपी गोइंग सून।'
'तुम मुझे वोट दो मैं तुन्हें नौकरी दूंगा'
इसके अलावा सबको नौकरी देने का वादा तो वह करते ही आ रहे हैं। एक एक्स पोस्ट पर उन्होंने लिखा, 'तुम मुझे वोट दो मैं तुन्हें नौकरी दूंगा।' पिछले हफ्ते एक सभा में उन्होंने कहा, 'माहौल है एकदम टना टन, टना टन। बीजेपी हो गई सफाचट, सफाचट, सफाचट। दीदी को 1 लाख रुपए मिलेंगे खटाखट,खटाखट,खटाखट। एक करोड़ नौकरियां मिलेगी फटाफट और इंडिया ब्लॉक को वोट मिलेगा ठकाठक, ठकाठक, ठकाठक।'
इंडी अलायंस के लिए '300 पार' सीटों का दावा
गठबंधन की सभाओं में पहुंचने वाली भीड़ को देखकर तेजस्वी का हौसला इतना बुलंद है कि 40 सीटों वाले बिहार के दम पर वह एनडीए के '400 पार' वाले नारे के जवाब में इंडी अलायंस के लिए '300 पार' का दम भर चुके हैं। इसमें कोई दो राय नहीं की बिहार में 2019 में जिस तरह से एनडीए एकतरफा 39 सीटें जीत गया था और इस बार कई सीटों पर कांटे की लड़ाई बताई जा रही है तो उसमें लालू के छोटे बेटे सबसे बड़े किरदार बनकर उभरे हैं।
तेजस्वी के दावों ने राहुल में भी भर दिया जोश
इस चुनाव में बिहार में अपनी पार्टी की बड़ी सहयोगी आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के दावों ने कांग्रेस के राहुल गांधी में भी जोश भर दिया है। वह पटना में रैली करने आए तो बिहार की सभी 40 सीटें विपक्षी गठबंधन को मिलने का दावा करके चले गए।
तेजस्वी की 'तेजी' में तपेगा कौन?
1999 में कारगिल युद्ध के बाद लोकसभा के चुनाव हो रहे थे। तब बिहार का विभाजन नहीं हुआ था। राज्य में लोकसभा की 54 सीटें थीं और राज्य की सत्ता लालू यादव के हाथों में थी। पूरे चुनाव अभियान में वह लगातार यही दावा कर रहे थे कि बिहार की सभी 54 की 54 सीटें 'लालटेन' (पार्टी का चुनाव चिन्ह) को मिलेंगी।
तब भी आरजेडी का कांग्रेस और लेफ्ट के साथ गठबंधन था। लेकिन, 54 में से 41 सीटें भाजपा की अगुवाई वाला एनडीए जीत गया और खुद लालू यादव भी मधेपुरा में अपनी सीट नहीं बचा सके। जिसके बारे में बिहार में एक कहावत प्रचलित है, 'रोम पोप का और मधेपुरा गोप' का।











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