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टेंशन को बाय बाय, तफरीह के मूड में नीतीश को पिज्जा भी पसंद है

नई दिल्ली। एग्जिट पोल के रुझानों से एनडीए में उत्साह है। घटक दल के नेता मिल-जुल रहे हैं। भोज-भात हो रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार एनडीए के प्रमुख नेता हैं। उन्होंने भी दिल्ली के पांच सितारा होटल में आयोजित भोज का लुत्फ उठाया। चुनाव के बाद नीतीश कुमार तफरीह के मूड में हैं। नीतीश कुमार को जब भी मौका मिलता है वे सैरसपाटा और मनपसंद भोजन का आनंद जरूर उठाते हैं। जब इंजीनियरिंग कॉलेज के होस्टल में रहते थे तब दाल-भात, आलू की छनी हुई भुजिया और चोखा बड़े चाव से खाते थे। मुख्यमंत्री हुए तो डोसा के मुरीद हो गये। अब तो वे पिज्जा के भी शौकीन हो गये हैं। छात्र जीवन से लेकर अब तक उनके खान पान में बहुत बदलाव आया है। पसंद चाहे जो हो लेकिन एक बात आज भी कॉमन है कि उनका खाना बिल्कुल सादा रहता है।

 छात्र जीवन के 'भुजिया' को नहीं भूले नीतीश

छात्र जीवन के 'भुजिया' को नहीं भूले नीतीश

जब इंजीनियरिंग कॉलेज के होस्टल में रहते थे तब दरभंगा के एक महाराज जी खाना पकाते थे। वे दाल भात सब्जी तो बढ़िया बनाते ही थे, आलू की भुजिया खास तरीके से बनाते थे। नीतीश कुमार के मुताबिक ऐसी भुजिया तब आम घरों में नहीं बनती थी। महाराज जी आलू को बारीक काट देते थे और उसे सीधे सरसो तेल में छान देते थे। कुरकुरी भुजिया नीतीश कुमार को इतनी पसंद थी कि वे भोजन का बेसब्री से इंतजार करते रहते थे। अन्य छात्रों का भी यही हाल रहता था।

नमकीन में कचरी और मिठाई में खुरचन भी पसंद

नमकीन में कचरी और मिठाई में खुरचन भी पसंद

इंजीनियरिंग कॉलेज के बाद पटना सिटी का इलाका शुरू हो जाता था। सिटी चौक के पास आज भी 'लालजी कचरीवाले' की मशहूर दुकान है। 1972 के आसपास तब ये छोटी दुकान थी। लेकिन यहां की कचरी (दाल को पीस कर बनायी हुई बड़ी) बहुत मशहूर थी। नीतीश कुमार जब शाम को घूमने निकलते थे तो इस दुकान पर भूंजा और कचरी जरूर खाते थे। नीतीश कुमार जब मुख्यमंत्री बन गये तो वे लालजी कचरीवाले को नहीं भूले। आज भी सीएम आवास में जब कोई भोज होता है तो लालजी के पुत्र नंदूजी को कचरी बनाने के लिए बुलाया जाता है। शुरू में नीतीश कुमार मिठाई के भी शौकीन थे। पटना सिटी में ही प्रभात जी की मिठाई की दुकान है। यहां का खुरचन (दूध को बहुत देर तक उबाल कर बनायी जानी वाली पटना की खास मिठाई ) बहुत नामी है। उस समय नीतीश कुमार की पत्नी मंजू सिन्हा दुकान के पास स्थिति एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं। नीतीश कुमार तब छात्र नेता थे। वे जब भी पत्नी को लेने आते यहां से खुरचन जरूर खरीदते थे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद डोसा खाने का शौक

मुख्यमंत्री बनने के बाद डोसा खाने का शौक

नीतीश कुमार जब नये-नये मुख्यमंत्री बने थे तब उनकी भाजपा नेता संजय झा से बहुत दोस्ती थी। अब संजय झा जदयू के नेता बन चुके हैं। नीतीश कुमार अक्सर संजय झा के साथ पटना के मशहूर होटल वसंत बिहार में डोसा खाने निकल पड़ते थे। कभी कभी उनके साथ सहयोगी मंत्री ललन सिंह भी होते थे।

जब नीतीश कुमार ने नास्ते में मांगा पिज्जा

जब नीतीश कुमार ने नास्ते में मांगा पिज्जा

जनवरी 2017 में नीतीश कुमार बेतिया, बगहा और वाल्मीकिनगर का यात्रा पर गये थे। उनके साथ मंत्रियों और अधिकारियों की फौज थी। तफरीह के साथ साथ शासकीय कामकाज भी हो रहा था। नीतीश कुमार ने वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व में खुली जीप में सैर की थी। वे यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को देख कर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने घोषणा कर दी कि अब यहां कैबिनेट मीटिंग भी होगी। वे पटना जाने के लिए जब बेतिया पहुंचे तो सुबह का समय हो चला था। वे सर्किट हाउस में रुके तो अचानक पिज्जा खाने की इच्छा जाहिर कर दी। दस मिनट के अंदर ही उनके सामने डोमिनोज का पिज्जा हाजिर हो गया। पिज्जा खाने के बाद ही वे पटना के लिए निकले।

नीतीश के भोज में फ्रेंच और जर्मन व्यंजन

नीतीश के भोज में फ्रेंच और जर्मन व्यंजन

नीतीश कुमार अब सेहत के प्रति सचेत रहते हैं। सीएम आवास में सब्जियों की जैविक खेती होती है। उनके पिता वैद्य थे। उनको भी आयुर्वेद की अच्छी जानकारी है। नीतीश कुमार अपनी देखरेख में औषधीय पौधों की भी खेती कराते हैं। वे सुबह में गुनगुना पानी पीते हैं। फिर अंकुरित अनाज लेते हैं। भोजन में दाल, रोटी, जैविक सब्जी और मौसमी फल लेते हैं। 2015 में नीतीश कुमार ने लालू यादव के साथ मिल कर विधानसभा चुनाव लड़ा था। 21 नवम्बर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने सीएम आवास पर एक शानदार भोज दिया था। नीतीश कुमार खुद तो सादा भोजन करते हैं लेकिन उन्होंने मेहमानों के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनावाये थे। इसके लिए खास तौर पर बाहर से कुक बुलाये गये थे। इसमें फ्रेंच और जर्मन व्यंजन की बहुच चर्चा हुई थी। इसके अलावा मुर्ग रेशमी कबाब, पिश नगेट्स, मटन गोली कबाब, मसरूम वोलूवेंट, पनीर के सुले, मूंग दाल की कचरी भी लाजवाब बनी थी। आज भी कई विधायक इस भोज की तारीफ करते नहीं थकते।

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