बिहार को किसने बनाया इतना दीनहीन? सिर्फ 0.11% लोगों के पास है कार, इतनों के पास ही दुपहिया वाहन
बिहार में हुए जातिगत जनगणना के विस्तृत आंकड़े जैसे-जैसे सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे लंबे समय से राज्य की सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार की फजीहत हो रही है। अब राज्य के लोगों के वाहनों की संख्या का खुलासा हुआ है और इससे राज्य सरकार भी सवालों के घेरे में आती है।
इस सर्वे में जो बिहार के प्रवासियों के आंकड़े दिए गए हैं, उसपर पहले से ही नीतीश सरकार सवालों के घेरे में है। अब वहां रह रहे लोगों के पास वाहनों की न के बराबर संख्या से प्रदेश की दीनहीनता झलक रही है।

बिहार में 95.49% लोगों के पास कोई वाहन नहीं
बिहार सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के सिर्फ 45.78 लाख लोग दूसरे राज्यों में रोजी-रोटी कमाने गए हुए हैं। वहीं जो लोग विदेशों में रहते हैं, उनकी संख्या 2.17 लाख है। अब मंगलवार को विधानसभा में पेश किया गया वह आंकड़ा सामने आया है, जिसमें राज्य की जनता के पास मौजूद वाहनों की संख्या का पता चलता है।
सिर्फ 3.8% लोग ही दुपहिया वाहनों के स्वामी
जातिगत जनगणना की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में 95.49% लोगों के पास किसी तरह का कोई वाहन नहीं है। सिर्फ 0.11% लोगों के पास वाहन में कार मौजूद है। वहीं 13.07 करोड़ की आबादी में महज 3.8% लोग ही दुपहिया वाहनों के स्वामी हैं।
महज 1.67 लाख लोगों के पास ट्रैक्टर
बिहार सरकार के आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 13.07 करोड़ लोगों में से 12.48 करोड़ के पास किसी तरह का कोई वाहन नहीं है। विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, 'जनसंख्या के सिर्फ 49.68 लाख लोग या करीब 3.8% दुपहिया वाहनों के स्वामी हैं, जबकि सिर्फ 5.72 लाख या 0.11% के पास कार है। महज 1.67 लाख लोग ट्रैक्टरों के स्वामी हैं।'
कमाल की बात है कि बिहार सरकार ने वाहन स्वामियों में भी जातिगत आंकड़े खोजकर निकाल लिए हैं। इसके अनुसार सामान्य जाति के 2.01 लोगों में से 11.99 लाख के पास दुपहिया वाहन हैं। वहीं राज्य के जो 2.17 लाख लोग विदेश गए हुए हैं, उनमें से 23,738 उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
अगर जातियों की बात की जाए तो विदेश में रहने वाले बिहारियों में ऊंची जातियों के लोगों की संख्या 76,326 बताई गई है। जबकि, राज्य के कुल 45,78,669 लोग अन्य राज्यों में रहकर अपने और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
बिहार की मौजूदा सरकार ने जातिगत जनगणना को अपनी प्रशासनिक नीति का बहुत बड़ा हथियार बनाया है। कई राजनीतिक पार्टियां इससे प्रेरित होकर पूरे देश में जाति आधारित जनगणना की मांग कर रही हैं।
लेकिन, बिहार के जातिगत सर्वे से वहां के लोगों की जो दयनीय सामाजिक-आर्थिक स्थिति सामने आई है, उसका जिम्मेदार कौन है? जबकि, तथ्य यह है कि तीन दशकों से भी ज्यादा समय से बिहार में लालू-राबड़ी और नीतीश कुमार की ही सरकार चल रही है। (इनपुट-पीटीआई)
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