नीतीश और तेजस्वी के लिए क्यों अहम है दूसरे चरण का चुनाव? जानिए 94 सीटों का पूरा गणित
बिहार में दूसरे चरण के चुनाव को सीएम नीतीश और तेजस्वी यादव के लिए सबसे ज्यादा अहम क्यों माना जा रहा है।
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के बाद दूसरे चरण के मतदान को लेकर सियासी दलों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। दूसरे चरण में बिहार के 17 जिलों की 94 विधानसभा सीटों पर 3 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। बिहार में नीतीश कुमार जीत का चौका लगाकर एक बार फिर से सीएम बनेंगे या तेजस्वी यादव को राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री के तौर पर सरकार बनाने का मौका मिलेगा, ये काफी हद तक दूसरे चरण के चुनाव पर ही टिका है। आइए जानते हैं कि बिहार में दूसरे चरण के चुनाव को सीएम नीतीश और तेजस्वी यादव के लिए सबसे ज्यादा अहम क्यों माना जा रहा है।

दूसरे चरण से ही तय होगा जीत का गणित
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, मंगलवार को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में से दो-तिहाई सीटों पर वोट डाले जाएंगे, इसलिए इस चरण से ही जीत की रूपरेखा तय हो जाएगी। वहीं, तीसरा चरण जीतने वाले गठबंधन और हारने वाले गठबंधन के बीच केवल सीटों का अंतर तय करेगा। बिहार में पहले चरण के चुनाव में कोरोना वायरस महामारी के बावजूद हुए 54 फीसदी से ज्यादा मतदान ने भी सियासी जानकारों को चौंका दिया है। दरअसल बिहार ऐसा राज्य नहीं है, जहां मतदान का प्रतिशत ज्यादा रहता हो। अभी तक के विधानसभा चुनावों में केवल तीन चुनाव ऐसे रहे हैं, जब मतदान का प्रतिशत 60 फीसदी से ऊपर रहा है। 2015 के विधानसभा चुनाव में पूरे बिहार में केवल 56.66 फीसदी मतदान हुआ था।
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तेजस्वी की रैलियों में भीड़ से बना सस्पेंस
बिहार चुनाव का दूसरा चरण आरजेडी नेता और महागठबंधन के सीएम पद के दावेदार तेजस्वी यादव के लिए भी कई मायनों में अहम है। अभी तक की तेजस्वी यादव की चुनावी रैलियों में जबरदस्त भीड़ देखने को मिली है। हालांकि, विपक्ष के नेताओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर ज्यादा भीड़ की तस्वीरें दिखाने के लिए आरजेडी रणनीतिक रूप से छोटे मैदानों पर तेजस्वी यादव की रैलियां करा रही है।

51 सीटों पर BJP-JDU से RJD का मुकाबला
दूसरे चरण में 94 में से आरजेडी 56 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जहां 27 सीटों पर उसका मुकाबला भाजपा, 24 सीटों पर जेडीयू और बाकी बची पांच सीटों पर एनडीए के दूसरे घटक दलों के उम्मीदवारों से है। वहीं, कांग्रेस दूसरे चरण में 24 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और उसका मुकाबला भाजपा और जेडीयू के साथ 12-12 सीटों पर है। दूसरे चरण में भाजपा 46 सीटों और जेडीयू 43 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

2015 में किसे मिलीं कितनी सीट?
2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी इन 94 सीटों में से 42 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 33 सीटों पर उसने जीत हासिल की थी। हालांकि उस वक्त नीतीश कुमार आरजेडी के साथ गठबंधन में थे, इसलिए 2015 के चुनाव नतीजों को इस चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। इसी तरह जेडीयू 2015 के विधानसभा चुनाव में इन 94 सीटों में से 41 सीटों पर लड़ी और 30 सीटों पार्टी के प्रत्याशी जीते। भाजपा उस समय 63 सीटों पर लड़ी और महज 20 सीटें ही जीत पाई। एलजेपी को भाजपा के साथ गठबंधन में 21 सीटों में से केवल 2 और कांग्रेस को 11 में से सात सीटों पर जीत मिली थी। इस तरह 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी-जेडीयू और कांग्रेस के महागठबंधन ने 94 में से कुल 70 सीटों पर जीत का परचम लहराया था। इनमें से 18 सीटें ऐसी भी थीं, जहां जीत-हार का 5000 वोटों से भी कम था।

दूसरे चरण में मैदान में हैं ये दिग्गज
दूसरे चरण में जिन 94 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें तेजस्वी और तेजप्रताप यादव की सीटें भी शामिल हैं। तेजस्वी यादव वैशाली जिले की राघोपुर और तेजप्रताप यादव समस्तीपुर जिले की हसनपुर सीट से चुनाव मैदान में हैं। राघोपुर सीट पर तेजस्वी यादव का मुकाबला भाजपा के सतीश कुमार से है, जिन्होंने 2010 के विधानसभा चुनाव में उनकी मां राबड़ी देवी को यहां से हराया था। हालांकि 2015 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से चुनाव जीत गए। वहीं, हसनपुर में तेजप्रताप यादव का मुकाबला जेडीयू प्रत्याशी और दो बार के विधायक राजकुमार राय से है। दूसरे चरण में तेजप्रताप यादव के ससुर चंद्रिका राय सहित बिहार सरकार के कई मंत्री भी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें रामसेवक सिंह, श्रवण कुमार और नंद किशोर यादव शामिल हैं।












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