पीएम मोदी की बड़ी चुनौती, गिलानी कश्मीर में बना सबसे ताकतवर अलगावादी नेता
श्रीनगर। वादियों में अमन और चैन के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे अलगाववादी नेता अब सरकार के लिए बड़ी मुश्किल बनते जा रहे हैं। इन अलगावादी नेताओं ने बीते समय में अपना कद काफी उंचा कर लिया है जिसके चलते राज्य सरकार सहित केंद्र सरकार के लिए भी ये बड़ी चुनौती बन गये हैं।

गिलानी के समर्थन में आये 6 और शीर्ष अलगावादी
सैयद अली शाह गिलानी जम्मू का एक बड़ा अलगाववादी नेता बनकर उभरा है, इसकी ताकत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि मीरवाइज की हुर्रियत कांफ्रेंस के 6 नेता गिलानी का साथ देने को तैयार है। गिलानी को जम्मू में बहुत ही ताकतवर अलगाववादी नेता माना जाता है। ये सभी अलगाववादी नेता पाकिस्तान की वकालत करते हैं साथ ही पाक को ही अपना हमवतन मानते हैं।
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घाटी में बनी सबसे बड़ी अलगावादियों की पार्टी
गिलानी की हुर्रियत कांफ्रेंस में मौजूदा वक्त में 10 सदस्य हैं ऐसे में 6 और सदस्यों को मिलाकर यह पार्टी जम्मू-कश्मीर में अलगावादियों के सबसे बड़ी पार्टी बन जायेगी।
उदारवादी अलगावादी बिखरे, कट्टर नेताओं की बढ़ी ताकत
मीरवाईज की हुर्रियत कांफ्रेंस को यह बड़ा झटका लगा है। हुर्रियत कांफ्रेस 1993 में अस्तित्व में आयी थी, इस समय इस पार्टी में 26 अलगाववादी नेता थे। इन सभी
नेताओं ने भारत में कश्मीर के अधिग्रहण के खिलाफ एकजुट होकर ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस का निर्माण किया था। लेकिन जल्द ही यह पार्टी 2002 के चुनाव के बाद बिखर गयी। जिसमें से लोन बंधुओं ने अपने आपको अलग कर लिया था। जिसके बाद यह पार्टी दो टुकड़ों में बिखर गयी। एक गुट उदारवादी सदस्यों का बना जिसका मुखिया मीरवाइज बना जबकि दूसरा कट्टर गुट बना जिसका नेता गिलानी बना।
पार्टी को दूसरा झटका 2014 में उस वक्त लगा जब शबीर शाह ने खुद को असली हुर्रियत नेता बताते हुए अन्य शीर्ष नेताओं के साथ एक अलग पार्टी साथ जम्मू-कश्मीर हुर्रियत कांफ्रेंस का निर्माण किया।
गिलानी की हुर्रियत पार्टी में शामिल होने के लिए जेकेएसएम के अध्यक्ष जफर भट्ट, मुस्लिम लीग के चेयरमैन अब्दुल राशिद, कश्मीर फ्रीडम फ्रंट के चेयरमैन सैयद बशीर इंद्राबी, सैयद सलीम, शेख याकूब, यास्मीन राजा, ख्वातीन मरकज ने अपनी इच्छा जाहिर की है। गिलानी के प्रवक्ता अयाज अकबर ने बताया कि ये सभी नेता गिलानी के साथ आने को तैयार हैं।
मीरवाईज हुए कमजोर, साथियों ने बताया निष्क्रिय
मीरवाईज की हुर्रियत से अलग हुए इन नेताओं ने मीरवाइज पर आरोप है कि हुर्रियत के संविधान को उन्होंने ताक पर रख दिया है और वह पूरी तरह से निष्क्रिय हो गये हैं। वहीं मीरवाइज के प्रवक्ता का कहना है कि ये सदस्य पार्टी की कार्यकारिणी समिति के सदस्य बनना चाहते थे।
लेकिन ऐसा नहीं होने की वजह से इन लोगों ने पार्टी के भीतर षड़यंत्र रचा। लेकिन इन नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद भी इन लोगों ने पार्टी के संविधान को मजबूत करने की बजाए अलग रास्ता चुना।
गिलानी के प्रवक्ता का कहना है कि हमें 15 नेताओं के पत्र मिले हैं जो हमारे साथ आना चाहते हैं। लेकिन इन सदस्यों को पार्टी में शामिल किये जाने का फैसला गिलानी ही लेंगे।
कैसे निपटेंगे पीएम मोदी
एक तरफ जहां वादियों में भाजपा और पीडीपी मिलकर सरकार चला रही हैं। वहीं दूसरी तरफ घाटियों में अलगावादियों की बढ़ती ताकक भाजपा और नरेंद्र मोदी की लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। इन नेताओं से निपटने का मौजूदा वक्त में पीएम मोदी के पास कोई पुख्ता योजना नजर नहीं आती। वहीं देखने वाली बात यह होगी कि इन सब हालात में भाजपा पीडीपी के साथ किस तरह से सरकार चलाती है।












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