Uttarakhand: पर्यटकों के लिए सुगम हुई देवभूमि की यात्रा, जानिए सरकार ने उठाए क्या बड़े कदम

देवभूमि उत्तराखंड को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। हाल में पूरी हुई परियोजनाओं ने उत्तराखंड में दुर्गम स्थानों पर भी यात्रा को आसान बना दिया है।

मौजूदा समय में उत्तराखंड के राजमार्ग, किसी आम परिवहन मार्ग से कहीं बढ़कर हैं। प्रदेश समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य के प्रवेश द्वार हैं। ये सड़कें न केवल शहरों और कस्बों को, बल्कि दूरदराज के गांवों, देवस्थलों, मंदिरों, आश्रमों, ऐतिहासिक महत्व के स्थलों जैसे कई महत्वपूर्ण सांस्कृतिक व आध्यात्मिक स्थलों को भी आपस में जोड़ती हैं।

Uttarakhand Devbhoomi tourism

उत्तराखंड का चार धाम राजमार्ग को चार महत्वपूर्ण तीर्थ स्थानों बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को जोड़ता है। सराकर ने उत्तराखंड में सड़क व राजमार्गों के विकास के लिए, केंद्र सरकार ने परिवर्तनकारी परियोजनाओं को धरातल पर उतारा। इसके लिए केंद्रीय सड़क निधि से 2.5 अरब रुपये की राशि आवंटित की गई। वर्तमान प्रशासन के नेतृत्व में कनेक्टिविटी से जुड़ी ये पहल, राज्य में आर्थिक विकास के एक नए युग की शुरुआत कर रहा है। बुनियादी ढांचे के विकास और परिवर्तनकारी परियोजनाओं से, उत्तराखंड राज्य अपने चमकदार भविष्य की नई तस्वीर दिख रही है।

सुविधाजनक और आसान हुई यात्रा
पहले की तुलना में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। दरअसल, राजधानी देहरादून को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे का निर्माण, भविष्य की कई बड़ी क्रांतिकारी संभावनाओं के विकसित कर रहा है। ये एक ऐसा रणनीतिक कदम है जिसने दो प्रमुख केंद्रों के बीच परिवहन व्यवस्था को सुव्यवस्थित कर, बड़ी व्यावसायिक संभावनाओं के रास्ते खोल दिए हैं।

चार धाम मंदिरों, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों का कुल 825 किलोमीटर का विस्तार, इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पर्यटन को बढ़ाने की दिशा में बड़े क्रांतिकारी बदलाव लाने को तैयार हैं। इन परियोजनाओं की सबसे बड़ी खासियत ये है, कि इसमें पर्वतीय चुनौतियों का खास तौर से ध्यान रखा गया है। ताकि मौसमी चुनौतियों के बावजूद इन मार्गों पर परिवहन निर्बाध रूप से जारी रहे। इसके अलावा, पर्वत माला रोपवे परियोजना धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ, स्थायी पर्यटन को भी बढ़ावा देने को तैयार है।

पर्यटकों को कैसे होगा फायदा?
वर्तमान सरकार जब 2014 में पहली बार सत्ता में आई, तो पूरे उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई महज़ा 2,282 किलोमीटर ही थी, जो बाद में 2022 में बढ़कर 3,449 किलोमीटर हो गई। ये वो परियोजनाएं साबित हो रही हैं, जो आर्थिक विकास का साथ-साथ, नागरिकों के लिए रोज़गार और आजीविका के नए द्वार खोल रही हैं। इस तरह के प्रयासों से राज्य के परियोजना वाले और निकट के क्षेत्रों के लिए तो नई संभावनाएं विकसित हुई ही हैं, लेकिन साथ ही इससे पूरे उत्तराखंड राज्य के समग्र विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 दिसंबर 2021 में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की नींव रखी थी। कुल 210 किलोमीटर लंबा, यह छह से बारह लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है। जो दिल्ली और देहरादून को जोड़ता है। करीब 13,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस एक्सप्रेसवे से दूरी और समय दोनों कम हो जाएंगे। राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम, जिसे 'पर्वतमाला परियोजना' के नाम से जाना जाता है, ये अगले पांच वर्षों में 200 से ज्यादा परियोजनाएं शुरू करने को तैयार है। जिसकी कुल अनुमानित लागत 1.25 लाख करोड़ रुपये है। चार धाम राष्ट्रीय राजमार्ग, दो-लेन का राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसे लगभग 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। ये राजमार्ग उत्तराखंड राज्य के चार पवित्र स्थानों बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को आपस में जोड़ेगा।

केंद्र सरकार के प्रयासों से ये कनेक्टिविटी परियोजनाएं उत्तराखंड में आर्थिक बदलाव ला रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड राज्य, राजमार्गों के शानदार विस्तार के साथ, असीम आर्थिक संभावनाओं का अनुभव कर रहा है। ये रणनीतिक परियोजनाएं न केवल व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देंगी, बल्कि उत्तराखंड के सतत विकास और समृद्धि के लिए, उम्मीदों से भरे भविष्य का भी प्रतीक होंगी।

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