SC का Amazon-Flipkart के खिलाफ CCI जांच रोकने से इनकार
नई दिल्ली, 09 अगस्त। एक बड़ी खबर दिल्ली से है, जहां देश की सर्वोच्च अदालत ने ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन और फ्लिपकार्ट की उस याचिका में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें उनके बिजनेस के तरीकों में एंटी-ट्रस्ट जांच पर रोक की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप दोनों ई-कॉमर्स की बहुत बड़ी कंपनियां हैं ऐसे में आपको CIC जांच का सहयोग करना चाहिए और आप आपत्ति जता रहे हैं, ये सही नहीं होगा। अब कोर्ट के फैसले के बाद अब अमेजन और फ्लिपकार्ट को कॉम्पीटीशन कमीशन ऑफ इंडिया की जांच का सामना करना होगा।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल अमेजन और फ्लिपकार्ट पर आरोप लगे हैं कि ये दोनों मार्केट में अपनी पहुंच स्थापित करने के लिए कुछ खास तरह के प्रोडक्ट को प्रमोट करती हैं और मार्केट में ग्राहकों को तोड़ने के लिए जानबूझकर डिस्काउंट देती हैं। हालांकि अमेजन और फ्लिपकार्ट दोनों ने इस बात से इनकार किया है और वो दोनों इन आरोपों के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट भी गए थे लेकिन दोनों को वहां से निराशा हाथ लगी और दोनों की याचिका का खारिज कर दिया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी आज दोनों को झटका दे दिया।
'फ्लिपकार्ट' को चार हफ्ते का वक्त मिला
फिलहाल कोर्ट ने सीआईसी जांच के लिए फ्लिपकार्ट को चार हफ्ते का वक्त दिया है । बता दें कि फ्लिपकार्ट की ओर से वकील डॉ अभिषेक मनु सिंघवी थे जबकि अमेजन के वकील गोपाल सुब्रमण्यम और साजन पुवय्या थे। जबकि सीआईसी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहताा आज कोर्ट में पेश हुए हैं।
क्या है कॉम्पीटीशन कमीशन ऑफ इंडिया ( CIC)
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग या कॉम्पीटीशन कमीशन ऑफ इंडिया ( CIC) का गठन केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर, 2003 में किया था। जिसका मकसद स्वच्छ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और मार्केट पर नजर रखना है, जिससे ये पता चल सके कि बाजार में जो भी सामान बेचे जा रहे हैं, वो किस तरह से बेचे जा रहे हैं। क्या जो समान उपभोक्ता को बेचा जा रहा है वो सही है या फिर उन्हें दिखाया कुछ जा रहा है और बेचा कुछ जा रहा है।












Click it and Unblock the Notifications