Bharat Ratna: लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न मिलने के बाद क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
Bharat Ratna: भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भारत के सर्वोच्य सम्मान, भारत रत्न से नवाजा जाना है। ये सम्मान कुछ विशेष लोगों को ही प्राप्त है। अब इस में जल्द ही एल के आडवाणी का नाम भी शामिल हो जाएगा।
भारत रत्न राजनीति, कला, साहित्य, विज्ञान के क्षेत्र में किसी विचारक, वैज्ञानिक, उद्योगपति, लेखक और समाजसेवी को दिया जाता है। यह सम्मान देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जो किसी क्षेत्र में असाधारण और सर्वोच्च सेवा को मान्यता देने के लिये दिया जाता है।

लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न मिलने के बाद क्या क्या सुविधाएं मिलेंगी?
भारत रत्न पाने वालों को भारत सरकार की ओर से एक प्रमाणपत्र और एक मेडल दिया जाता है। इस के साथ किसी प्रकार की कोई धनराशि नहीं प्रदान की जाती है। हालांकि इस सम्मान के साथ कई प्रकार की अन्य सुविधाएं जरुर प्रदान की जाती हैं।
लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न मिलने के बाद उन्हें सरकारी महकमे की ओर से सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। भारत रत्न पाने वालों को रेलवे की ओर से मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है। इसके अलावा उन्हें अहम सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए न्योता दिया जाता है।
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लाल कृष्ण आडवाणी को सरकार वॉरंट ऑफ प्रेसिडेंस में जगह देगी। भारत रत्न मिलने के बाद उन्हें प्रोटोकॉल में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, पूर्व राष्ट्रपति, उपप्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री और संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता के बाद जगह मिलेगी।
आपको बता दें, वॉरंट ऑफ प्रेसिडेंस का इस्तेमाल सरकारी कार्यक्रमों में वरीयता देने के लिए होता है। राज्य सरकारें भी भारत रत्न पाने वाले लोगों को अपने राज्यों में सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं
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भारत रत्न पाने वालों को इनकम टैक्स न भरने की छूट भी दी जाती है। साथ ही वे संसद की बैठकों और सत्र में भाग ले सकते हैं। उन्हें कैबिनेट मंत्री के बराबर वीआईपी का दर्जा मिलता है। ये हस्तियां अगर किसी राज्य में घूमने जाती हैं, तो उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा दिया जाता है।
भारत रत्न
देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान जो किसी क्षेत्र में असाधारण और सर्वोच्च सेवा को मान्यता देने के लिये दिया जाता है। इसकी शुरुआत 2 जनवरी, 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने की थी। सबसे पहला सम्मान स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन और वैज्ञानिक डॉक्टर चंद्रशेखर वेंकट रमन को 1954 में दिया गया था।
एक साल में सिर्फ तीन भारत रत्न ही दिए जाते हैं। यह भी जरूरी नहीं कि हर साल भारत रत्न सम्मान दिया जाए। पहले यह सम्मान केवल जीवित रहते दिया जाता था, लेकिन 1955 में भारत रत्न मरणोपरांत भी दिये जाने का प्रावधान जोड़ा गया। भारत रत्न सम्मान के लिए भारत के प्रधानमंत्री किसी व्यक्ति के नाम की सिफारिश राष्ट्रपति से करते हैं।
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कैसा होता है मेडल?
भारत रत्न के मेडल में तांबे के बने पीपल के पत्ते पर प्लैटिनम का चमकता सूर्य बना हुआ होता है। पत्ते का किनारा भी प्लैटिनम का बना होता है। इसके नीचे चांदी से हिंदी में भारत रत्न लिखा रहता है। इसके पीछे की तरफ अशोक स्तंभ के नीचे हिंदी में सत्यमेव जयते लिखा होता है।
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