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Bharat Bandh Impact: कहीं थमी बसों की रफ़्तार, कहीं स्टेशनों पर फंसे मुसाफिर, क्या आपका शहर भी बंद की चपेट में?

Bharat Bandh Impact: देशभर की सड़कों पर आज सन्नाटा और हंगामे का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। क्या आपका शहर भी इस बंद की चपेट में है? क्या आज स्कूल-कॉलेज और बैंक जाने का रिस्क लेना सही होगा? केरल से लेकर ओडिशा तक की तस्वीरें बता रही हैं कि आज का दिन आम आदमी के लिए भारी पड़ने वाला है।

आज 12 फरवरी 2026 को ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने मिलकर 'भारत बंद' का बिगुल फूंका है। इस देशव्यापी हड़ताल का मुख्य कारण केंद्र सरकार के नए लेबर कोड, निजीकरण, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी है।

Aaj Bharat Bandh

  • प्रमुख मांगें: किसान संगठन MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी और कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं।
  • यूनियनों का दावा: AITUC की महासचिव अमरजीत कौर के अनुसार, इस बार भागीदारी पिछले साल से कहीं अधिक है। अनुमान है कि देशभर के 600 से ज्यादा जिलों में इसका असर दिखेगा और करीब 30 करोड़ मजदूर इसमें शामिल हो सकते हैं।

राज्यों का हाल: कहां क्या है स्थिति?

  • केरल (तिरुवनंतपुरम): रेलवे स्टेशनों के बाहर यात्रियों की भारी भीड़ है। बसें न चलने के कारण यात्री फंसे हुए हैं।
  • ओडिशा (भुवनेश्वर): ट्रेड यूनियनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया है। सामान्य जनजीवन और यातायात पूरी तरह प्रभावित है।
  • पश्चिम बंगाल (कोलकाता): कोलकाता के विभिन्न हिस्सों में बंद समर्थक रैलियां निकाल रहे हैं, जिससे सुबह की पीक ऑवर्स में यातायात बाधित हुआ है।

क्या खुला है और क्या बंद?

  • स्कूल और कॉलेज: शिक्षा संस्थानों के लिए कोई आधिकारिक छुट्टी नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन निर्णय ले सकता है। घर से निकलने से पहले स्कूल से संपर्क जरूर करें।
  • बैंकिंग सेवाएं: सरकारी बैंकों के कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल का समर्थन किया है। शाखाओं में कामकाज ठप हो सकता है, हालांकि ATM और ऑनलाइन बैंकिंग (UPI) चालू रहेंगे।
  • ट्रांसपोर्ट: सार्वजनिक परिवहन, विशेषकर रोडवेज बसें और ऑटो-टैक्सी का संचालन कई राज्यों में बाधित है।

कौन-कौन है इस बंद के पीछे?

यह हड़ताल 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच (AITUC, INTUC, CITU, HMS, आदि) द्वारा बुलाई गई है। इसे संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और विभिन्न छात्र संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है। इनका तर्क है कि नए श्रम कानून मजदूरों की जॉब सिक्योरिटी को खत्म कर मालिकों को मनमानी करने की छूट देते हैं।

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