भंडारा अग्निकांड: लापरवाही ने ली 10 मासूम बच्चों की जान, वार्ड में नहीं था कोई देखने वाला- सूत्र
नई दिल्ली। Bhandara Hospital Fire: साल 2020 को बीते अभी 10 दिन भी नहीं हुआ कि नए साल में महाराष्ट्र (Maharashtra) में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। महाराष्ट्र के भंडारा के जिला अस्पताल (Bhandara district hospital) में आग लगने से 10 नवजात बच्चों की मौत ने शनिवार को गहरा झटका दिया। घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Chief Minister Uddhav Thackeray) ने जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन सूत्रों की मानें तो यह हादसा बड़ी लापरवाही का नतीजा है। पुलिस के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक जिस समय आग लगी उस दौरान नवजात बच्चों के वार्ड में कोई मौजूद नहीं था।
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CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि नवजात वार्ड में काफी देर तक अस्पताल की तरफ से कोई वार्ड बॉय मौजूद नहीं था। जिस वक्त शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लगी, उस वक्त भी वार्ड में कोई वयस्क अंदर मौजूद नहीं था। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने पाया कि नवजात शिशु वार्ड काफी समय से खाली था, जब आग लगी उस दौरान भी वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। यानी नवजात शिशुओं को ऐसे ही मरने के लिए छोड़ दिया गया था।
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बता दें कि शुक्रवार और शनिवार देर रात महाराष्ट्र के भंडारा जिला अस्पताल में आग लगने की वजह से नवजात शिशु वार्ड में दस बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से कम से कम तीन शिशुओं की जलने से मौत हो हुई, जबकि सात अन्य बच्चों की मौत शनिवार को धुएं के कारण दम घुटने की वजह से हुए। अस्पताल प्रशासन को यह तक नहीं अंदाजा कि कितने बजे शॉर्ट सर्किट हुआ और कितने बजे आग लगी। हादसे के बाद महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे मृतक बच्चों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया है।












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