Bengal Election: 'TMC में रहकर पाप किया, अब प्रायश्चित', बेटे दिब्येंदु के लिए घुटनों पर बैठे शिशर अधिकारी
Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (Bengal Assembly Election 2026) का पारा सातवें आसमान पर है। राज्य में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले दो चरणों के मतदान से पहले सियासी जुमलेबाजी और भावनात्मक ड्रामे चरम पर हैं।
इसी बीच, पूर्व मेदिनीपुर के एग्रा विधानसभा चुनाव (Egra Assembly) में एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मजबूत स्तंभ रहे वरिष्ठ नेता शिशिर अधिकारी ने भाजपा प्रत्याशी और अपने पुत्र दिब्येंदु अधिकारी के लिए चुनाव प्रचार के दौरान मंच पर घुटनों के बल बैठकर जनता से माफी मांगी।

'TMC में रहना मेरा पाप था', शिशिर अधिकारी का भावनात्मक दांव
एग्रा के अलंगिरी में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए 80 वर्षीय शिशिर अधिकारी अचानक भावुक हो गए। उन्होंने मंच पर खड़े होकर न केवल अपनी पिछली पार्टी पर हमला बोला, बल्कि जनता के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। शिशिर अधिकारी मंच पर अचानक घुटनों के बल बैठ गए और अपना सिर जमीन पर पटक कर झुक गए। गले में कपड़ा डालकर उन्होंने कहा, मैंने TMC में रहकर पाप किया है।
इतने सालों तक उस पार्टी में रहना मेरी सबसे बड़ी गलती थी। अब मैं उसी पाप का प्रायश्चित कर रहा हूं। उन्होंने हाथ जोड़कर लोगों से कहा कि वे उन्हें माफ कर दें और अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कमल के फूल पर मुहर लगाकर बंगाल में बदलाव लाएं।
बेटे दिब्येंदु अधिकारी के लिए 'पिता' ने मांगी वोट
शिशिर अधिकारी के इस कदम को उनके बेटे दिव्येंदु अधिकारी के चुनावी भविष्य को सुरक्षित करने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दिव्येंदु एग्रा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार हैं। इस जनसभा का मुख्य उद्देश्य उनके बेटे दिव्येंदु अधिकारी के लिए समर्थन जुटाना था।
शिशिर अधिकारी ने हाथ जोड़कर लोगों से अपील की कि वे उनके बेटे को भारी मतों से जीत दिलाएं। उन्होंने कहा कि दिव्येंदु क्षेत्र के विकास और जनता की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। शिशिर अधिकारी ने लोगों से अपील की कि वे उनके बेटे को भारी मतों से विजयी बनाएं ताकि क्षेत्र के विकास और 'पाप' के दाग को धोया जा सके।
Bengal Election से पहले भावनात्मक राजनीति या चुनावी रणनीति?
शिशिर अधिकारी के इस कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे उनके आत्ममंथन और पछतावे का प्रतीक मान रहे हैं, तो वहीं कई विश्लेषक इसे चुनाव से पहले मतदाताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने की रणनीति बता रहे हैं। बंगाल की राजनीति में भावनात्मक अपीलें नई नहीं हैं, लेकिन इस तरह का दृश्य चुनावी माहौल को और भी दिलचस्प बना रहा है।
पूर्वी मेदिनीपुर में अधिकारी परिवार का प्रभाव, चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
पूर्वी मेदिनीपुर जिले में अधिकारी परिवार का लंबे समय से मजबूत राजनीतिक प्रभाव रहा है। ऐसे में शिशिर अधिकारी का यह कदम चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। स्थानीय स्तर पर यह संदेश गया है कि वे अपने बेटे के राजनीतिक करियर और क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर हैं।
23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले बंगाल में सियासी बयानबाजी और रणनीतियां अपने चरम पर हैं। ऐसे में शिशिर अधिकारी का यह कदम न सिर्फ चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि यह भी दिखाता है कि चुनाव जीतने के लिए नेता किस हद तक भावनात्मक दांव चल रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रायश्चित वाली राजनीति वोट में कितनी तब्दील होती है और एगरा सीट पर इसका क्या असर पड़ता है।














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