West Bengal CM Oath Ceremony: मंच पर Mithun Chakraborty से मिले PM मोदी, क्या हुई बात? Video
Bengal CM Oath Ceremony: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भव्य समारोह के बीच सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। लेकिन इस ऐतिहासिक समारोह में एक और पल ऐसा था जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शपथ ग्रहण के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच से जाने लगे, तो वे अचानक रुके और भाजपा के दिग्गज नेता और फिल्म स्टार मिथुन चक्रवर्ती से बातचीत करने लगे। आइए जानतें हैं मंच पर दोनों दिग्गजों के बीच क्या हुआ?
ब्रिगेड परेड ग्राउंड के मंच पर जब शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी हुई, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच से प्रस्थान कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने सामने खड़े मिथुन चक्रवर्ती को देखा और वे उनसे बात करने के लिए रुक गए।

करीब 10 सेकंड तक रुकी रही नजरें
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि पीएम मोदी ने करीब 10 सेकंड तक मिथुन दा से बातचीत की। हालांकि, शोर और सुरक्षा के बीच प्रधानमंत्री ने उनसे क्या कहा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों के चेहरे की मुस्कुराहट ने इस पल को यादगार बना दिया।
बंगाल की जीत में मिथुन का 'फाइटर' अंदाज
मिथुन चक्रवर्ती लंबे समय से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ और हिंदू हितों की रक्षा के लिए मोर्चा संभाले हुए हैं। उन्होंने चुनावी रैलियों में अपने 'फाइटर' वाले अंदाज से कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकी थी। 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की इस प्रचंड जीत (207 सीटें) के पीछे मिथुन चक्रवर्ती के जमीनी प्रचार को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। शायद यही वजह थी कि प्रधानमंत्री ने मंच पर उन्हें विशेष महत्व दिया।
मिथुन चक्रवर्ती का राजनीतिक सफर
मिथुन चक्रवर्ती का राजनीतिक सफर वास्तव में विचारधाराओं के एक बड़े बदलाव का गवाह रहा है, जो वामपंथी झुकाव से शुरू होकर आज भाजपा (BJP) के प्रमुख स्तंभ तक जा पहुंचा है। 1960 और 70 के दशक में नक्सली आंदोलन से प्रभावित रहने के बाद, उन्होंने एक लंबा समय राजनीति से दूर बिताया, लेकिन 2011 में ममता बनर्जी से बढ़ती नजदीकियों के कारण वे सक्रिय राजनीति में लौटे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का हिस्सा बन गए।
साल 2014 में उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया गया, लेकिन शारदा चिटफंड घोटाले में नाम आने और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने 2016 में इस्तीफा दे दिया और एक बार फिर राजनीति से दूरी बना ली। राजनीति में उनका सबसे बड़ा 'यू-टर्न' 7 मार्च 2021 को आया, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया।
भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने 'एक चोबले छोबी' (एक ही बार में तस्वीर साफ) जैसे अपने फिल्मी और असरदार संवादों से बंगाल के चुनावी माहौल में नई जान फूंकी। उनकी इसी सक्रियता और जनसेवा के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें 2024 में पद्म भूषण और सिनेमा में सर्वोच्च योगदान के लिए 2022 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भी प्रदान किया गया है।
सुवेंदु के शपथ ग्रहण में दिग्गजों का जमावड़ा
यह समारोह बंगाल के लिए एक नए युग की शुरुआत जैसा था। राज्यपाल आर.एन. रवि ने सुवेंदु अधिकारी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक पल के गवाह खुद पीएम मोदी, कई केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बने। सुवेंदु अधिकारी, जो कभी ममता बनर्जी के करीबी थे, आज उन्हीं के गढ़ (भवानीपुर) में उन्हें हराकर बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बन गए हैं।
सोनार बांग्ला के संकल्प की शुरुआत
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में 'सोनार बांग्ला' के युग की आधिकारिक शुरुआत हो गई है। उन्होंने इस जीत का श्रेय राष्ट्रवादी मतदाताओं को दिया और राज्य के विकास के लिए नई योजनाओं का खाका खींचा। अधिकारी का मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना उनके तीन दशकों से भी अधिक लंबे राजनीतिक सफर की परिणति है।
















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