Bengal Chunav से पहले ममता बनर्जी ने चला बड़ा दांव, ‘बांग्लार युवा शक्ति' योजना से युवाओं को साधने की तैयारी
Bengal Chunav: पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव हैं। चुनावसे ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार बड़े ऐलान कर रही हैं। इस बार के बजट के जरिए भी समाज के सभी वर्गों को साधने की कोशिश है। मंगलवार को उन्होंने "बांग्लार युवा शक्ति" नाम से नई योजना की घोषणा की, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। इस योजना के तहत राज्य में 'दुआरे सरकार' कार्यक्रम की तरह 294 कैंप लगाए जाएंगे।
सीएम ममता बनर्जी ने बताया कि इन कैंपों में युवा व खेल, कृषि-लघु सिंचाई और बिजली विभाग सीधे मौजूद रहेंगे। युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही जगह मिल सकेगा। चुनाव से पहले किसानों और अब युवाओं के लिए बड़ा ऐलान किया गया है।

Bengal Chunav में मिल सकता है फायदा
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह कदम सीधे तौर पर युवा मतदाताओं को साधने की रणनीति है। बंगाल की करीब 40 प्रतिशत आबादी 18-35 वर्ष आयु वर्ग की है और यही वर्ग चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाता है। हाल के महीनों में बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दे विपक्ष के प्रमुख हथियार बने हैं। ऐसे में ममता सरकार का यह ऐलान युवाओं के बीच भरोसा मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है।
Mamata Banerjee ने रमजान को लेकर भी दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने सामाजिक सौहार्द पर भी जोर देते हुए कहा कि 19 मार्च से रमजान शुरू हो रहा है और इसके साथ ही होली का त्योहार भी आएगा, इसलिए सभी लोग शांति और भाईचारे के साथ पर्व मनाएं। बंगाल में बीजेपी लगातार ममता सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाती है। दूसरी ओर टीएमसी बीजेपी पर सांप्रदायिकता के आरोप लगाती है। ऐसे समय में जब चुनावी माहौल में ध्रुवीकरण की आशंकाएं बढ़ जाती हैं, सीएम ने सबसे मिल-जुलकर रहने की अपील की है।
टीएमसी इस योजना के जरिये यह संदेश देना चाहती है कि सरकार सीधे जनता के दरवाजे तक पहुंच रही है। विपक्ष इसे चुनाव से पहले की "घोषणाओं की राजनीति" बता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर 'दुआरे सरकार' मॉडल का चुनावी फायदा ममता को मिला। अब देखना होगा कि बांग्लार युवा शक्ति चुनावी समीकरणों को कितना प्रभावित करती है।












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