Tomato Price Hike: टमाटर की बढ़ती कीमतों के पीछे हैं ये दो वायरस! नाम है ToMV और CMV
Tomato Price Hike: सीएमवी और टीओएमवी वायरस टमाटर की खेती को प्रभावित कर रहे हैं। टमाटर की बढ़ती कीमतों को लेकर किसानों ने इन्ही वायरस को जिम्मेदार ठहराया है।
Tomato Price Hike: टमाटर की कीमतें आग की तरह बढ़ती जा रही है। कहीं यह 140 तो कहीं 160 रुपए प्रति किलो बिक रहे हैं। टमाटर की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया है। टमाटर की कीमतों की देखा देखी अब प्याज, अदरक, मिर्च जैसी सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। ऐसे में महाराष्ट्र और कर्नाटक में टमाटर उत्पादकों ने इस साल की शुरुआत में पैदावार के नुकसान के लिए दो अलग-अलग वायरस को जिम्मेदार ठहराया है।
महाराष्ट्र में किसानों ने कहा है कि उनकी टमाटर की फसल ककड़ी मोजेक वायरस (सीएमवी) बैक्टीरिया के संक्रमण से प्रभावित हुई है। वहीं, कर्नाटक और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों के उत्पादकों ने फसल के नुकसान के लिए टमाटर मोजेक वायरस (टीओएमवी) को जिम्मेदार ठहराया है। पिछले तीन सालों में, टमाटर के उत्पादकों ने इन दोनों वायरस के बढ़ते संक्रमण की शिकायत की है, जिससे फसल को आंशिक से लेकर पूरी तरह नुकसान हुआ है।

ये दोनों वायरस कैसे फैलते हैं?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टमाटर मोजेक वायरस (टीओएमवी) मुख्य रूप से संक्रमित बीजों, पौधों, कृषि उपकरणों और अक्सर नर्सरी श्रमिकों के हाथों से फैलता है। जो खेतों में प्रवेश करने से पहले खुद को ठीक से साफ न करने में फैलते हैं। कुछ ही दिनों में पूरे खेत पर वायरस फैल जाता है। सीएमवी एफिड्स (छोटे मुलायम शरीर वाले कीड़े) द्वारा फैलता है। यह रस-चूसने वाले कीड़े हैं। वहीं, ककड़ी मोजेक वायरस (सीएमवी) भी मानव स्पर्श से फैल सकता है, लेकिन इसकी संभावना बेहद कम है।
कैसे करें बचाव?
भारतीय बागवानी संस्थान (आईआईएचआर), बेंगलुरु में फसल सुरक्षा के पूर्व प्रमुख डॉ एम कृष्णा रेड्डी की मानें तो उच्च तापमान की स्थिति और उसके बाद रुक-रुक कर होने वाली बारिश से पनपने वाले एफिड्स कीड़े टमाटर की खेती पर असर डालते हैं। ये स्थितियां महाराष्ट्र में देखी गईं। यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है कि नर्सरी जैव सुरक्षा बनाए रखें, और परिसर में प्रवेश को प्रतिबंधित करें।
डॉ. रेड्डी ने कहा कि भविष्य में वायरस के प्रसार को रोकने के लिए नर्सरी में बीज उपचार आवश्यक है। अगर समय पर उचित उपचार न किया जाए तो दोनों वायरस लगभग 100 प्रतिशत फसल नुकसान का कारण बन सकते हैं।












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