'इकलौते बेटे' ने नहीं पाया मां का प्यार तो रच डाला 'षड्यंत्र', पिता को जब पता चला पैरों तले खिसक गई जमीन
नई दिल्ली, 8 मार्च। ऐसे कई उदाहरण हमारे बीच हैं, जब लोग तेजी से करोड़पति और अरबपति बन जाते हैं लेकिन जब वे अधिक लालच में पड़कर गलत करने लगते हैं तो उन्हें रोड पर आने में देर भी नहीं लगती। लालच एक ऐसी ही बला का नाम है। बिहार (Bihar) में नालंदा के एक जमींदार के घर उसका इकलौते बेटे बनकर रह रहे व्यक्ति के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जब वह फर्श से अर्श पर जा पहुंचा। लेकिन चंद दिनों में वह उस काल कोठरी में पहुंच गया जहां कोई जाने की दूर उसके बारे में सोचना भी पसंद नहीं करता।

यह कोई कहानी नहीं बल्कि आज का सच है। इसके साथ ही उन लोगों के मिशाल भी है जो दूसरों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं। घटना बिहार (Bihar) के नालंदा जिले के एक बड़े जमींदार कामेश्वर सिंह के परिवार से जुड़ी है। जिनके पास करीब 100 बीधा जमीन, पटना में कई फ्लैट समेत करोड़ों की संपत्ति है। लेकिन कामेश्वर को यह यकीन था उनके बाद उनके घर को संभालने वाले उनसे कहीं दूर चला गया।
दरअसल, कामेश्वर का पैतृक घर बिहारशरीफ जिले के सिलाव के मुरगावां गांव में है। उनका पुत्र कन्हैया 1977 में मैट्रिक परीक्षा के दौरान कहीं लापता हो गया। कन्हैया पांच बहनों में वह एकलौता भाई था। काफी खोजबीन की लेकिन उसका पता नहीं चला।
कामेश्वर को अचानक मिली खबर
साल वर्ष 1981 में बिहार के हिलसा के केशोपुर में एक कथित योगी आए। उसने जमुई के लखैय गांव के एक नवयुवक को कामेश्वर सिंह के घर का बेटा बता डाला। जब यह खबर कामेश्वर सिंह को पता चला तो उन्हें पहले यकीन नहीं हुआ। घर वाले भी कथित योगी इस बात पर विश्वास नहीं कर पाए। लेकिन बाद में लोगों के समझाने पर कामेश्वर उस युवक को अपने घर ले आए और बेटे का प्यार देने लगे। इसके साथ ही वह कामेश्वर की करोड़ों की संपत्ति हकदार बन गया।
कामेश्वर की पत्नी ने युवक को नहीं माना अपना
जमींदार कामेश्वर सिंह का बेटा कन्हैया 1977 में मैट्रिक परीक्षा देने के दौरान लापता हो गया था। बाद में कथित योगी के कहने पर कामेश्वर भले ही युवक को बेटा मानकर उस पर अपना प्यार लुटाते रहे लेकिन उनकी पत्नी और पुत्रियों ने उसे कभी अपना भाई कन्हैया नहीं माना।
वर्षों बाद कामेश्वर की उड़ी नींद
बेटे के मिलने के खुशी में कामेश्वर सब कुछ भूल बैठे थे। वर्षों तक उनके साथ रहकर खेल करे युवक के सच का जब तक उन्हें पता चला बहुत देर हो चुकी थी। दरअसल, जिसे वे अपना बेटा मान रहे थे वह फर्जी निकला। उनके कथित बेटे का नाम कन्हैया नहीं बल्कि दयानंद गोस्वामी है। जब कामेश्वर को यह सच तब पता चला जब फर्जी रूप उनके घर में कन्हैया बनकर रह रहे दयानंद ने उनकी करोंड़ों की जमीन बेंच डाली। मामला जब कोर्ट पहुंचा तो अदालत में दयानंद अपने को कन्हैया साबित नहीं कर पाया। हालांकि अपनी पुरानी पहचान छिपाने के लिए उनसे दयानंद के नाम का डेथ सर्टिफिकेट तक बनवा डाला था।
जालसाज ने कामेश्वर की 45 बीघा जमीन का किया हेरफेर
कामेश्वर सिंह मुरगावां पंचायत के प्रतिष्ठित व्यक्ति रहे हैं। वे करीब 40 वर्षों तक यहां मुखिया रहे। उनके भाई दिलकेश्वर सिंह सांसद रह चुके हैं। इसके साथ भाई दिलकेश्वर सिंह सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी कर चुके हैं। कामेश्वर सिंह करीब 100 बीघा से अधिक के मालिक हैं। पटना के निलगिरी अपार्टमेंट में भी करीब 60 लाख का फ्लैट है। इसके साथ ही पटना के लक्ष्मी कॉप्लेक्स और सीताराम कॉम्पलेक्स में भी कामेश्वर और दिलकेश्वर सिंह के फ्लैट हैं। जिस पर दयानंद की नजरें थीं। कामेश्वर सिंह का फर्जी रूप से बेटा बनकर दयानन्द ने उनकी करीब 45 बीघा जमीन या तो बेंच दी या फिर अपनी पत्नी के नाम दर्ज करा दी।
कोर्ट में फर्जी बेटे को मिली सजा
कोर्ट में दयानंद अपने को कन्हैया साबित नहीं कर पाया। सच सामने आने पर यह पता चला की कामेश्वर सिंह के घर में उनका बेटा कन्हैया बनकर रह रहा व्यक्ति असल में दयानंद गोस्वामी है। जिसके बाद अदालत ने उसे अलग-अलग धाराओं के तहत तीन-तीन साल और एक धारा में 6 माह के कठोर कारावास की सजा सुना दी। कोर्ट ने दोषी पर 10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने कहा कि जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को 6 माह अतिरिक्त सजा काटनी होगी।












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