दुनिया को कोरोना महामारी से मुक्ति भी दिला सकते हैं चमगादड़, शोध में हुआ हैरतअंगेज खुलासा
नई दिल्ली। कहते है जहर का इलाज जहर होता है और लोहा लोहे को काटता है और घातक नोवल कोरोनावायरस से सुरक्षा अथवा इलाज के लिए वायरस के जन्म के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले चमगादड़ों के प्रभावशाली इम्यून सिस्टम का इस्तेमाल किया सकता है। यह बात एक अध्ययन में कहा गया है।

शोधरत वैज्ञानिकों की अध्ययनों की समीक्षा के अनुसार नोवल कोरोनोवायरस जैसे वायरस को सहन करने की क्षमता और सूजन (inflammation) बुखार को नियंत्रित करने की चमगादड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता से उपजी हो सकती है, क्योंकि यह साबित हो चुका है कि बैट्स यानी चमगादड़ों पर कोरोना का असर नहीं होता है और उड़ने वाले ऐसे स्तनधारी चमगादड़ों की प्रतिरक्षा प्रणाली पर शोध से कोविड-19 के खिलाफ एक नई दवा विकसित की जा सकती है।

चमगादड़ इबोला, रेबीज, कोविड19 और SARS-CoV-2 का पैतृक होस्ट है
अमेरिका में रोचेस्टर विश्वविद्यालय समेत शोधकर्ताओं का कहना है कि चमगादड़ इबोला, रेबीज और नोवल कोरोनावायरस, SARS-CoV-2 जैसे मनुष्यों को प्रभावित करने वाले कई घातक विषाणुओं के पैतृक होस्ट हैं और उड़ने वाले ऐसे स्तनधारी स्वयं इन रोगजनकों को बिना प्रभाव के सहन करते हैं, जो यह सुझाती है कि चमगादड़ों का इम्यून सिस्टम घातक वायरस के खिलाफ जबर्दस्त है,

चमगादड़ कोरोना का सामना कर लेता है और उससे प्रभावित नहीं होता है
चमगादड़ ऐसे वायरस का सामना आसनी से कर सकता है और उससे प्रभावित नहीं होता है, जबकि मनुष्य इन रोगजनकों से पीड़ित होने पर प्रतिकूल लक्षणों का अनुभव करते हैं, लेकिन चमगादड़ अभूतपूर्व रूप से वायरस को सहने में सक्षम हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, इसके अलावा समान आकार के जमीन पर रहने वाले स्तनधारियों की तुलना में अधिक लंबे समय तक जीवित भी रहते हैं।

रोग से लड़ने की प्रवृत्ति और लंबी उम्र चमगादड़ की प्राकृतिक क्षमता है
सेल मेटाबॉलिज्म जर्नल में प्रकाशित समीक्षा अनुसंधान में वैज्ञानिकों ने आकलन में पाया कि कैसे सूजन को नियंत्रित करने के लिए चमगादड़ की प्राकृतिक क्षमता उनकी लंबी उम्र और बीमारियों से लड़ने की प्रवृत्ति में योगदान दे सकती है। रोचेस्टर विश्वविद्यालय के सह-लेखक वेरा गोर्बुनोवा ने कहा कि कोविड-19 के साथ बुखार तेज हो जाती है, जो वायरस से भी अधिक संक्रमित व्यक्ति की मौत के लिए भड़काऊ प्रतिक्रिया हो सकती है।

मनुष्य वायरस से संक्रमित होता हैं, तो हमारा शरीर एक अलार्म बजाता है
गोर्बुनोवा ने समझाते हुए कहा कि मानव प्रतिरक्षा प्रणाली किस तरह काम करती है। उन्होंने बताया कि जब एक बार हम वायरस से संक्रमित हो जाते हैं, तो हमारा शरीर एक अलार्म बजाता है और हमारा बुखार और सूजन के लक्षण विकसित कर लेते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मनुष्यों में इस प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया का लक्ष्य वायरस को मारना है और संक्रमण से लड़ना है

मनुष्यों के विपरीत चमगादड़ों में विशिष्ट प्रतिरक्षा तंत्र होते हैं
लेकिन यह भी कहा कि यह एक हानिकारक प्रतिक्रिया भी हो सकती है क्योंकि रोगियों के शरीर खतरे में पहुंच जाते हैं, जबकि मनुष्यों के विपरीत चमगादड़ों में विशिष्ट प्रतिरक्षा तंत्र होते हैं जो उनके शरीर में वायरस की प्रतिकृति को कम करते हैं और उनकी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया वायरस को कमजोर भी कर देते हैं।

वायरस के नियंत्रण के लिए चमगादड़ों की प्रतिरक्षा प्रणाली एक लाभकारी संतुलन है
उन्होंने बताया कि शोध के दौरान उन्होंने पाया कि वायरस को नियंत्रित करने के लिए चमगादड़ों की प्रतिरक्षा प्रणाली एक लाभकारी संतुलन है, जो वायरस से लड़ते हुए एक ही समय में शरीर पर पड़ने वाली तीव्र प्रतिक्रिया नहीं बढ़ने देती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार इस क्षमता के कारकों में से एक महत्वपूर्ण क्षमता चमगादड़ों की उड़ान द्वारा संचालित हो सकती है, जो कि जमीन पर रहने वाले स्तनधारी मनुष्यों में नहीं होती है।

चमगादड़ एक ऐसा एक मात्र स्तनधारी हैं जो उड़ सकते हैं
चमगादड़ एक ऐसा एक मात्र स्तनधारी हैं जो उड़ सकते हैं और उन्हें इसके लिए शरीर के तापमान में तेजी से वृद्धि की जरूरत होती है, जो मेटोबोलिज्म में अचानक वृद्धि और आणविक क्षति के अनुकूल हों। उन्होंने कहा कि चमगादड़ों में यह अनुकूलन ही उन्हें घातक वायरस जनित रोग प्रतिरोध में भी सहायता कर सकते हैं।

चमगादड़ों में बढ़े हुए प्रतिरक्षा का एक कारक उनके माहौल हो सकते हैं
शोधकर्ताओं के मुताबिक चमगादड़ों में बढ़े हुए प्रतिरक्षा का एक कारक उनके माहौल हो सकते हैं, जहां उड़ने वाले स्तनधारियों की कई प्रजातियां घनी कॉलोनियों में रहती हैं, और गुफा की छत या पेड़ों पर एक साथ लटकती हैं।

चमगादड़ों की प्रतिरक्षा प्रणाली रोगज़नक़ों से युद्ध के लिए हमेशा तैयार होती है
शोध में एक अन्य सह-लेखक आंद्रेई सेलुआनोव ने बताया कि चमगादड़ लगातार वायरस के संपर्क में आते हैं और संक्रमित हुए बिना हमेशा बाहर निकल जाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली रोगज़नक़ों के साथ लड़ने के लिए हथियारों से लैस होती है। एक रोगज़नक़ जीव में शरीर में प्रवेश करेगी, तो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली रोगज़नक़ों का मुकाबला करने के लिए एक तंत्र विकसित करेगी, रोगज़नक़ फिर से विकसित होगा , और इसी तरह यह क्रम चलता रहता है।

सभी विषाणुओं से निपटना चमगादड़ों की दीर्घायु व प्रतिरोधक क्षमता की निशानी है
गोर्बुनोवा ने कहा, इन सभी विषाणुओं से निपटना चमगादड़ की प्रतिरोधक क्षमता और दीर्घायु को आकार देता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि मनुष्यों ने चमगादड़ों की तरह सोशल हैबिट्स विकसित किया है, लेकिन हम अभी तक चमगादड़ों के परिष्कृत तंत्र विकसित नहीं कर पाए हैं, क्योंकि वे वायरस का मुकाबला करते हैं और तेजी से उससे सुरक्षा के लिए फैलते हैं।

वृद्ध लोगों में कोविड-19 एक अलग रोगजनन (Pathogenesis) होता है
गोर्बुनोवा ने कहा कि वृद्ध लोगों में कोविड-19 एक अलग रोगजनन (Pathogenesis) है। जिंदा और मरने के बीच उम्र सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है और हमें व्यक्तिगत लक्षणों का इलाज करने के बजाय पूरी प्रक्रिया के रूप में उम्र बढ़ने का इलाज करना होगा।

मानव चिकित्सा के लिए नए लक्ष्य प्रदान कर सकते हैं चमगादड़
चमगादड़ की प्रतिरक्षा प्रणाली का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं के अनुसार चमगादड़ बीमारियों और बुढ़ापे से लड़ने के लिए मानव चिकित्सा के लिए नए लक्ष्य प्रदान कर सकते हैं। एक उदाहरण का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि चमगादड़ ने सूजन (Inflammation) में शामिल कई जीनों को उत्परिवर्तित या पूरी तरह से समाप्त कर दिया। यह जोड़ते हुए उन्होंने आगे कहा कि वैज्ञानिक मनुष्यों में इन जीनों को बाधित करने के लिए दवाओं का विकास कर सकते हैं।
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हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को चमगादड़ों की तरह नियंमन करना होगा
बकौल गोर्बुनोवा, अगर हम सूजन को रोकना चाहते हैं, और COVID -19 जैसी बीमारियों के घातक प्रभावों से बचना चाहते हैं, तो मनुष्य की दो संभावित रणनीतियाँ हैं। पहला, किसी भी वायरस के संपर्क में नहीं आना चाहिए, लेकिन यह व्यावहारिक नहीं है। दूसरा हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को चमगादड़ों की तरह नियंमन करना होगा
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