मद्रास HC में महिला न्यायाधीश गौरी की नियुक्ति के खिलाफ SC पहुंचे वकील, कॉलेजियम की सिफारिश को दी चुनौती
केंद्र द्वारा मद्रास उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में गौरी की नियुक्ति को मंजूरी देने के बावजूद वकीलों ने शीर्ष अदालत का रुख किया है।

woman judge Lekshmana Chandra Victoria: वकील लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी की मद्रास हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति हुई है। इसको लेकर चेन्नई में वकीलों के एक ग्रुप ने कॉलेजियम की सिफारिश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में वकील लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी की पदोन्नति के लिए कॉलेजियम की सिफारिश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को इस मामले को शुक्रवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की है।
केंद्र द्वारा मद्रास उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में गौरी की नियुक्ति को मंजूरी देने के बावजूद वकीलों ने शीर्ष अदालत का रुख किया है। वहीं, इसको लेकर कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि भारत के संविधान के तहत प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार, निम्नलिखित अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय, कर्नाटक उच्च न्यायालय और मद्रास उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किया जाता है। मैं उन सभी को अपनी शुभकामनाएं देता हूं।
कॉलेजियम में चीफ जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल और केएम जोसेफ शामिल थे। उन्होंने 17 जनवरी को उच्च न्यायालय में पदोन्नति के लिए गौरी और चार अन्य वकीलों के नाम प्रस्तावित किए थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को संबोधित अलग-अलग पत्रों में मद्रास उच्च न्यायालय बार काउंसिल के सदस्यों ने कॉलेजियम की सिफारिश पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कम कर देगी।
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वकीलों ने पूर्व में अल्पसंख्यकों के खिलाफ गौरी के कथित बयानों का हवाला दिया और दावा किया कि गौरी का उत्थान न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर चोट कर रहा है।
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