बप्पी लहरी, डिस्को से बीजेपी में शामिल होने तक
बप्पी लहरी का बुधवार को मुंबई के एक अस्पताल में 69 साल की उम्र में निधन हो गया.
उनकी पहचान एक लोकप्रिय गायक और संगीतकार की थी. लहरी को पिछले साल कोविड संक्रमित होने के बाद हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. लेकिन उन्हें जल्दी ही डॉक्टरों ने छुट्टी दे दी थी. पिछले साल सितंबर में ख़बरें आईं कि बप्पी लहरी अपनी आवाज़ खो रहे हैं.
हालांकि बाद में उनकी तरफ़ से एक बयान आया और कहा कि यह झूठी ख़बर है. लेकिन बुधवार को आख़िरकार उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. बप्पी लहरी के परिवार में उनकी पत्नी, बेटे बप्पा लहरी और बेटी रमा लहरी हैं.
बप्पी लहरी पिछली रात अपने घर पर ही थे लेकिन सेहत ख़राब होने के बाद उन्हें जुहू के अस्पताल में भर्ती किया गया था. एक महीने से वह अस्पताल में भर्ती थे और सोमवार को ही उन्हें डॉक्टरों ने छुट्टी दी थी.
मंगलवार रात जब उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई तो परिवार वालों ने डॉक्टरों को घर पर ही बुलाया. बाद में उन्हें फिर से अस्पताल ले जाया गया. वह कई समस्याओं से जूझ रहे थे.
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मंगलवार की रात बप्पी लहरी को जुहू के क्रिटी केयर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. समाचार एजेंसी पीटीआई से अस्पताल के निदेशक डॉ दीपक नामजोशी ने कहा, ''लहरी पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती थे और उन्हें इसी सोमवार को डिस्चार्ज किया गया था. लेकिन मंगलवार रात फिर से उनकी तबीयत बिगड़ गई. वह कई समस्याओं से जूझ रहे थे. उनकी मौत मंगलावार को आधी रात से ठीक पहले ओएसए (ऑब्सट्रक्टिव स्लीप ऐप्नीअ) से हुई है.''
बप्पी लहरी के बारे में कहा जाता है कि वो उन गायकों में से एक हैं, जिन्होंने भारत में डिस्को को प्रचलन में लाया. बप्पी लहरी के लोकप्रिय गानों में चलते-चलते, डिस्को डांसर और शराबी की धूम रही है. बप्पी लहरी का आख़िरी गाना 2020 में टाइगर श्रॉफ अभिनीत फ़िल्म बाग़ी 3 में भंकास टाइटल से था.
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बप्पी लहरी को लोग आमतौर पर बप्पी दा कहकर बुलाते थे. सोने की जूलरी को लेकर उनका मोह उनके पहनावे से साफ़ झलकता था. उनके पहनावे में चमक और रंग बहुत गहरे होते थे.
बप्पी लहरी ने जिन गानों का कंपोज किया उनमें डिस्को डांसर, हिम्मतवाला, शराबी, एडवेंचर ऑफ टार्ज़न, डांस-डासं, सत्यमेव जयते, कमांडो, आज के शंहंशाह, थानेदार, नंबरी आदमी, शोला और शबनम सबसे अहम हैं. बप्पी लहरी की जिमी-जिमी, आजा-आजा की लोकप्रियता तो आज भी सिर चढ़कर बोलती है.
बप्पी लहरी का सफ़र
आलोकेश लाहिड़ी को हम बप्पी लहरी के नाम से जानते थे. सिर्फ़ चार साल की उम्र में लता मंगेशकर के एक गीत में तबला बजाकर मशहूर हुए आलोकेश लाहिड़ी को सब प्यार से बप्पी बुलाने लगे थे.
तब से अब तक वो बप्पी दा के नाम से बॉलीवुड ही नहीं हॉलीवुड में भी फेमस हुए थे. 80 का दशक बप्पी लहरी की डिस्को धुनों पर नाचा और उन्हें डिस्को किंग बना दिया. बॉलीवुड में संगीत को डिज़िटल करने वाले संगीतकारों में बप्पी का बड़ा योगदान है.
बप्पी लहरी ने बीबीसी को 2016 में बताया था, "मैंने कई अवार्ड जीते, पर ग्रैमी आज तक नहीं जीत पाया. मैंने अब तक पांच बार ग्रैमी में एंट्री भेजी है. इस बार एक एल्बम 'इंडियन मेलोडी' - जिसमे सूफी, लोक गीत और भारतीय संगीत शैली के दूसरे गीत मैंने पेश किए हैं.''
उनका संगीत हॉलीवुड ने भी कई बार इस्तेमाल किया है. 1981 में आई फिल्म ज्योति का गाना 'कलियों का चमन' अमेरिकन टॉप 40 का हिस्सा बना था.
बप्पी लहरी ने मई 2014 में राजनीति में भी आने की कोशिश की थी. वह 2014 में बीजेपी में शामिल हुए थे. तब लहरी ने कहा था कि देश में नरेंद्र मोदी की लहर है.
2004 में लहरी ने कांग्रेस के लिए भी कैंपेन किया था. लहरी ने बीजेपी में शामिल होते हुए कहा था कि 10 साल पहले कांग्रेस की लहर थी. तब बीजेपी की कमान राजनाथ सिंह के पास थी. राजनाथ सिंह ने कहा था कि बप्पी लहरी अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल में पार्टी को मज़बूत करेंगे.
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बप्पी लहरी को हुगली ज़िले के श्रीरामपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था लेकिन वह चुनाव हार गए थे.
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