Bank strike के बीच कर्मचारियों की चिंता पर बोलीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, इस बात की गारंटी देगी सरकार
नई दिल्ली: सरकारी बैंकों के निजीकरण के खिलाफ बैंक यूनियनों की हड़ताल के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार के फैसले का जमकर बचाव किया है। लेकिन, इसके साथ ही बैंक कर्मचारियों की वाजिब चिंताओं को दूर करने का भरोसा भी दिया है। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के दूसरे दिन यानी मंगलावर को उन्होंने कहा है कि सरकार बैंक कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि, 'यह कहना सही नहीं है कि सभी सरकारी बैंक बेचे जा रहे हैं। हम निश्चित तौर पर उन कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित करेंगे, जिन्होंने इन बैंकों में दशकों काम किए हैं......उनकी सैलरी, उनका पेंशन सबको सुरक्षित किया जाएगा। '
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बैंक कर्मचारी कर रहे हैं निजीकरण के विरोध में हड़ताल
बता दें कि दो सरकारी बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की देशव्यापी हड़ताल के चलते देशभर में बैंकिंग सेवाओं पर आंशिक असर पड़ा है। वित्त मंत्री ने इस साल के बजट में सरकार की विनिवेश योजना की घोषणा के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण का ऐलान किया था। उसके करीब एक महीने बाद बैंक यूनियन उसके विरोध में हड़ताल कर रहे हैं। बता दें कि साल 2019 में ही सरकार ने आईडीबीआई बैंक के अधिकांश शेयर बेचकर उसका निजीकरण किया था और पिछले चार वर्षों में वह सार्वजनिक क्षेत्र के 14 बैंकों का विलय कर चुकी है। बैंक हड़ताल को कोई बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठन समर्थन दे रहे हैं।
राहुल के आरोपों पर निर्मला का पलटवार
बैंक कर्मचारियों के हितों की रक्षा का भरोसा देने के साथ ही केंद्रीय वित्त मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर भी जोरदार पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि '(यूपीए के जमाने में) करदाताओं का पैसा सिर्फ एक परिवार के लिए इस्तेमाल किया जाता था।' दरअसल, राहुल ने सरकार पर आरोप लगाया था कि वह करदाताओं के पैसों का निजीकरण कर रही है। इससे पहले कांग्रेस ने आज सरकार से मांग की थी कि वह सार्वजनिक क्षेत्र के 9 बैंक यूनियनों की मांगें मान ले। ये संगठन दो दिनों के हड़ताल पर हैं, जिसका आज दूसरा दिन है। राहुल ने मोदी सरकार पर फिर से यह आरोप लगाया है कि वह सिर्फ कुछ 'क्रोनी कैप्टलिस्ट' के फायदे के लिए काम कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर 'खास लोगों' के हाथों सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बेचने से देश की वित्तीय सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।












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