असम में डेंटल क्लिनिक की आड़ में अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे रहे बांग्लादेशी आतंकी
नयी दिल्ली। बर्दवान विस्फोट काण्ड की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अब तक कोई महत्वपूर्ण सुराग हाथ नहीं लगा है। मगर छानबीन के दौरान एनआईए ने जो महत्वपूर्ण खुलासे किये हैं वो देश की सुरक्षा को लेकर काफी संवेदनशील हैं। एनआईए ने खुलासा किया है कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिद्दीन को असम में बर्दवान जैसे 30 घातक मॉड्यूल बनाना था और इस ऑपरेशन को एक जोड़े (पति-पत्नी) ने अंजाम दे रहे थे। सहानुर आलम उर्फ डॉक्टर और उसकी पत्नी सुगना असम के बारपेटा जिले में एक डेंटल कैंप चला रहे थे। हालांकि ये सिर्फ दिखावे के लिए डेंटल कैंप था मगर इसका मकसद ऑपरेशन को प्रारंभिक चीजें मुहैया करना था।

महज दिखावे के लिए था डेंटल क्लिनिक
एनआईए के सूत्रों ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक सहानुर आलम उर्फ डॉक्टर अपना डेंटल क्लिनिक सिर्फ दिखावे के लिए चलाता था। उसकी पत्नी सुगना इसी डेंटल क्लिनिक की आड़ में आतंकी गतिविधियों के लिए फंड इधर से उधर पहुंचाती थी। एनआई को असम पुलिस ने एक अहम जानकारी दी है कि जमात उल मुजाहिद्दीन के असम के स्थानीय और छोटे-मोटे नेताओं से अच्छे संबंध हैं जिसके चलते जेएमबी आसानी से मॉड्यूल चला रहा है।
पुलिस ने जानकारी दी है कि पेशे से दांत के डॉक्टर सहानुर आलम जेएमबी के शिर्ष पद पर है और उसने पढ़े-लिखे कई युवकों को अपने संगठन में जोड़ा है। शीक्षित युवकों को संगठन से जोड़ने का साफ मतलब है कि जेएमबी एक मजबूत सेना बनाने की फिराक में है। एनआईए ने जब सहानुर के घर पर छापा मारा तो पासा कि वो डेंटल क्लिनिक सिर्फ दिखावे के लिए चला रहा था और उसके आड़ में अपने जमात के लिए रिक्रुटमेंट करता था।
एनआईए के हाथ लगे कई अहम सुराग
छानबीन के दौरान एनआईए को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले है। एनआईए को पता चला है कि आलम साल 2010 से ही असम के कुछ राजनीतिक लोगों से संबंध बनाना शुरु कर दिया था। उसने ऐसा इसलिए किया था ताकि वो अपने डेंटल क्लिनिक को फंड ट्रांसफर के लिए आसानी से प्रयोग में ला सके। वहीं दूसरी तरफ आलम की पत्नी सुगना रोजाना पश्चिम बंगाल के मदरसों में जाती थी। एनआईए का कहना है कि सुगना मदरसों तक फंड पहुंचाने का काम करती थी। एनआईए ने ये भी दावा किया है कि इन पैसों का इस्तेमाल बम बनाने में किया जाता था।
जेएमबी के छुपने का ठिकाना बना असम
एनआईए का कहना है कि सिर्फ पश्चिम बंगाल में सक्रिय जेएमबी के 55 स्लीपर सेल्स में 25 या 30 असम में हो सकते हैं। एनआईए का दावा है कि असम जेएमबी का सबसे महत्वपूर्ण मॉड्यूल था क्योंकि वहां पहले से उनके संबंण उल्फा और हूजी से थे। आपको बता दें कि असम में उल्फा और हूजी आतंकी संगठन सक्रिय हैं। बतौर एनआईए जेएमबी और असम के इन संगठनों (उल्फा और हूजी) में Give and Take के संबंध हैं। वहीं जेएमबी इन संगठनों को कैश और हथियार सप्लाई करता है और बदले में ये संगठन अपने लड़ाकों को जेएमबी के मॉड्यूल सेट करने के लिए भेज देते हैं।












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