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Bangladesh China की चालाकी से निपटने के लिए भारत का मास्टर प्लान, नॉर्थ ईस्ट की ओर नजर भी नहीं उठाएगा ड्रैगन

Bangladesh China News: बांग्लादेश और चीन की नजदीकियां पिछले कुछ महीने में काफी बढ़ी हैं। मोहम्मद यूनुस का झुकाव बीजिंग की तरफ है और शी जिनपिंग भी अपने विस्तारवादी मंसूबों को अंजाम देने के लिए ढाका से निकटता बढ़ा रहे हैं। चीन की टेढ़ी नजर अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर रही है। बांग्लादेश के जरिए नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में चीन अपने मंसूबों को अंजाम देने की रणनीति पर काम कर रहा था। पूर्वोत्तर के राज्यों की सीमा बांग्लादेश से लगती है और भारत को इसकी आशंका है कि इसका इस्तेमाल चीन अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए कर सकता है। हालांकि, भारत ने अब नॉर्थ ईस्ट के लिए ऐसा प्लान तैयार किया है कि ड्रैगन की सारी चालाकी और मंसूबे धरे रह जाएंगे।

Bangladesh China के मंसूबों को समझ रहा है भारत

दरअसल बांग्लादेश की ओर से लगातार भारत विरोधी बयान आ रहे हैं। अंतरिम सरकार के सलाहकार एएलएम फजलुर रहमान जो एक रिटायर्ड मेजर जनरल हैं ने एक पोस्ट में लिखा था कि भारत अगर पाकिस्तान पर हमला करे, तो बांग्लादेश को पूर्वोत्तर के 7 राज्यों पर कब्जा कर लेना चाहिए। चीन यात्रा के दौरान मोहम्मद यूनुस ने भारतविरोधी बयान देते हुए कहा था कि वह दक्षिणी एशिया में महासागर के एकमात्र संरक्षक हैं।

Bangladesh China

भारत ने दोनों देशों के गठजोड़ और रुख को देखकर अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि नॉर्थ ईस्ट भारत की समृद्धि और विविधता की पहचान है। आने वाले दशक में यह भारत के लिए वैश्विक बाजार खोलने वाला मुखद्वार भी बनेगा। चीन की चालाकी और बांग्लादेश की हिमाकत से निपटने के लिए भारत का मेगा प्लान तैयार है।

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चीन बांग्लादेश को रंगपुर डिवीजन के लालमोनिरहाट में सेकंड वर्ल्ड वॉर के समय के एयरबेस को रीस्टैबलिश करने के लिए बड़ा निवेश करने वाला है। यह एयरबेस जो भारतीय सीमा से सिर्फ 12-15 किमी दूर है। यह एयरबेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर से 135 किमी दूर है। भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चिकन नेक के इतने करीब चीनी एयरबेस सुरक्षा के लिए चुनौतियों को बढ़ाने वाले हैं। ऐसे में भारत के लिए सामरिक चुनौतियों का विस्तार हो सकता है। इन सभी स्थितियों ने भारत को पूर्वोत्तर की सीमाओं की सुरक्षा के लिए सतर्कता बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है।

नॉर्थ ईस्ट में निवेश और औद्योगिक योजनाओं का बिछेगा जाल

भारत के बड़े कारोबारी ग्रुप जिसमें अडानी ग्रुप, रिलायंस इंडस्ट्रीज और वेदांता ने नॉर्थ ईस्ट राइजिंग शिखर सम्मेलन में घोषणा की कि वे पूर्वोत्तर भारत में बड़ा निवेश करेंगे। अकेले अडानी ग्रुप अगले 10 सालों में 1 लाख करोड़ का निवेश करने वाला है। इसके अलावा, रिलायंस समूह और दूसरे औद्योगिक घराने लगभग 4 बिलियन डॉलर से 6 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त निवेश करने वाला है। नॉर्थ ईस्ट से पूरे भारत की कनेक्टिविटी बढ़ाई जा रही है और अलग-अलग राज्यों में उठने वाले अलगाववादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अहम शांति समझौता किया गया है। भारत ने बांग्लादेश के रेडिमिड कपड़ों के आयात पर बैन लगाकर भी बड़ा झटका दिया है। बांग्लादेश और चीन के मंसूबों को नाकाम करने के लिए मोदी सरकार बेहद सतर्कता से काम कर रही है।

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