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तख्तापलट की कगार पर बांग्लादेश? टाइमलाइन में जानिए पड़ोसी देश में कैसे एक साल में बदली सत्ता की तस्वीर

Bangladesh Politics: बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता गहराती नजर आ रही है। देश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस (Mohammad Yunus) के इस्तीफे की अटकलों ने राजनीतिक माहौल में हलचल बढ़ा दी है।

बीते नौ महीनों में यह दूसरी बार है जब देश में शासन व्यवस्था को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। साल 2024 के मध्य में शुरू हुए छात्र आंदोलनों से लेकर प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद छोड़ने और अंतरिम सरकार की स्थापना तक, बांग्लादेश एक कठिन दौर से गुजरता रहा है।

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अब, जब एक नई राजनीतिक उठा पटक होती दिख रही हैं, तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि कैसे यह देश फिर से एक नए तख्तापलट की कगार पर पहुंच गया।

Bangladesh Politics: कैसे शुरू हुआ बांग्लादेश का यह संकट?

जुलाई 2024 में बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल तब आया जब विश्वविद्यालयों के छात्रों ने सरकारी नौकरियों में कोटा सिस्टम के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। छात्रों का आरोप था कि यह सिस्टम स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों को 30% आरक्षण देता है, जिससे अन्य योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिलते। शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुए यह प्रदर्शन जल्द ही पूरे देश में फैल गए और फिर हिंसा की चपेट में आ गए।

एक साल की प्रमुख घटनाओं की टाइमलाइन

1 जुलाई 2024: देशभर में छात्रों ने सड़कें और रेलवे लाइनें जाम कर दीं। कोटा सिस्टम में सुधार की मांग की गई। पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए, जिससे तनाव और भड़क गया।

16 जुलाई 2024: छात्रों और सरकार समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। इसके बाद प्रदर्शन और तेज हो गए।

18 जुलाई 2024: प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश टेलीविजन के मुख्यालय और कई सरकारी इमारतों में आगजनी की। 'तानाशाह को हटाओ' जैसे नारे गूंजने लगे। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शांति की अपील की, लेकिन हालात बेकाबू हो चुके थे। हिंसा में अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी थी।

21 जुलाई 2024: सुप्रीम कोर्ट ने कोटा सिस्टम को अवैध करार दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी इससे संतुष्ट नहीं हुए। वे चाहते थे कि सभी प्रकार के आरक्षण को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

5 अगस्त 2024: प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना के आधिकारिक निवास पर हमला कर दिया, जिसके बाद वे देश छोड़ भारत चली गईं। जनता ने इसे जीत के रूप में देखा और जश्न मनाया।

मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का गठन: अगस्त 2024

शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद, अंतरिम सरकार की बागडोर नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के हाथों में सौंपी गई। उन्हें एक निष्पक्ष सुधारकर्ता के रूप में देखा गया था, जिनसे उम्मीद थी कि वे बांग्लादेश को राजनीतिक स्थिरता की ओर ले जाएंगे। लेकिन बीते नौ महीनों में न तो सुधार हुए और न ही चुनाव की कोई ठोस योजना सामने आई।

Mohammad Yunus की राजनीतिक समर्थन में दरार

मोहम्मद यूनुस को शुरुआत में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) समेत अन्य दलों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन समय के साथ यह समर्थन कमजोर पड़ने लगा। NCP और BNP जैसे छात्र संगठनों के भीतर काफी विरोध देखा जा रहा है।

स्टूडेंट्स कमेटी यह कह रही है कि जनता ने सिर्फ सरकार बदलने के लिए आंदोलन नहीं किया था, बल्कि सिस्टम बदलने के लिए किया था। बिना सुधार के चुनावों का कोई मतलब नहीं। बीएनपी अब सड़कों पर उतरकर यूनुस सरकार का विरोध कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार NCP के प्रति पक्षपात कर रही है और बीएनपी की मांगों को नजरअंदाज कर रही है।

मोहम्मद यूनुस के इस्तीफे की पेशकश

हाल के घटनाक्रमों में, मोहम्मद यूनुस ने राजनीतिक दलों के असहयोग और अपने ऊपर से भरोसे की कमी का हवाला देते हुए इस्तीफा देने की इच्छा जताई। यूनुस के पद छोड़ने की बात से बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक हलचल पैदा हो गई और उनसे इस फैसले पर विचार करने के लिए कहा गया।

हालांकि, 27 मई को हुई एक एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यूनुस पद पर बने रहने के लिए मान गए हैं। एडवाइजरी कमेटी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट शेयर करके इस बैठक की जानकारी साझा की है।

Bangladesh में सेना और चुनाव पर दबाव

राजनीतिक गतिरोध के बीच सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने बयान जारी कर कहा कि दिसंबर 2025 तक देश में आम चुनाव कराए जाने चाहिए। उनका कहना था कि देश का भविष्य एक निर्वाचित सरकार ही तय कर सकती है। हालांकि यूनुस ने यह संकेत दिया था कि चुनाव दिसंबर 2025 से जून 2026 के बीच कभी भी हो सकते हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस तारीख घोषित नहीं हुई है।

सरकार के भीतर भी असहमति बढ़ने लगी है। विदेश सचिव जसीम उद्दीन ने हाल ही में यूनुस और विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन के साथ समन्वय की कमी को कारण बताते हुए इस्तीफा दे दिया। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका में बांग्लादेश के राजदूत असद आलम सियाम उनके उत्तराधिकारी हो सकते हैं।

बांग्लादेश का क्या है भविष्य

जहां बीएनपी सरकार पर हमलावर है, वहीं जमात-ए-इस्लामी ने मौजूदा संकट से बाहर निकलने के लिए सभी दलों को एक मंच पर लाने की मांग की है। पार्टी प्रमुख अमीर शफीकुर्रहमान ने फेसबुक पोस्ट में सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपील की है।

बांग्लादेश आज एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है। जनता अब अंतरिम सरकार के वादों से थक चुकी है और राजनीतिक दलों की आपसी खींचतान ने देश को गहरे संकट में डाल दिया है। अगर मोहम्मद यूनुस सरकार आवश्यक सुधार लागू नहीं कर पाई, तो देश फिर से उसी अराजकता में डूब सकता है जिससे वह उबरने की कोशिश कर रहा था।

बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति न सिर्फ देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बन चुकी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल और प्रशासनिक नेतृत्व किस दिशा में कदम उठाते हैं सुधारों की ओर या फिर एक और अस्थिरता की ओर।

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