Bal Thackeray Death Anniversary: बाला साहेब की वजह से जिंदा हैं अमिताभ बच्चन, जानिए 'मुंबई के टाइगर' के बारे में ये खास बात
Bal Thackeray Death Anniversary: आज शिवसेना (Shivsena) संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की 8वीं पुण्यतिथि (Death Anniversary) है, इस खास मौके पर आज महाराष्ट्र के सीएम और उनके बेटे उद्धव ठाकरे ने अपने पूरे परिवार के साथ दादर स्थित शिवाजी पार्क में बने स्मृति स्थल पर अपने पिता को श्रद्धांजलि (Tribute) दी। CM और उनके परिवार के अलावा शिवसेना नेता संजय राउत, एनसीपी नेता छगन भुजबल, मुंबई की मेयर किशोरी पेडणेकर समेत कई बड़े नेताओं ने भी आज बालठाकरे को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांसुमन अर्पित किए हैं।
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कलाकारों की कद्र करते थे बाल ठाकरे
मालूम हो कि 'मुंबई के टाइगर' कहलाने वाले बाल ठाकरे ने अपने जीवन में कभी भी कोई चुनाव नहीं लड़ा था, इसके बावजूद वो हमेशा से राजनीति के 'किंग मेकर' रहे। 17 नवंबर 2012 को दुनिया को अलविदा कहने वाले बाला साहेब को लोग 'हिंदू हृदय सम्राट' और 'मराठी मानुष' के नाम से पुकारा करते थे। बाल ठाकरे कला प्रेमी थे और यही वजह रही कि उनका लगाव हमेशा से फिल्मों और बॉलीवुड की ओर रहा है, वो खुद एक मंझे हुए कार्टूनिस्ट थे इसलिए वो हमेशा से कलाकारों की कद्र करते थे।

'मैं अगर आज जिंदा हूं तो बाला साहेब की वजह से हूं'
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को वो अपने बेटे की तरह प्रेम करते थे, इस बात का खुलासा खुद अमिताभ ने किया था, उन्होंने कहा था कि बाल ठाकरे मेरे लिए क्या थे, उसे शब्दों में परिभाषित करना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकीन है। बाल ठाकरे के निधन पर अमिताभ ने कहा था कि 'मैं बाला साहब को कभी नहीं भूल सकता, वो मेरी लाइफ के सबसे बड़े हीरो थे, मेरे लिए पिता तुल्य थे, मैं अगर आज जिंदा हूं तो उन्हीं की वजह से हूं।'

शिवसेना की एंबुलेंस में अस्पताल पहुंचे थे अमिताभ
इसी के साथ ही अमिताभ ने बताया था कि 'जब मैं 'कुली' फिल्म की शूटिंग के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गया था और जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा था, उस वक्त बहुत तेज बारिश हो रही थी, जिसकी वजह से एक भी एंबुलेंस मिल नहीं रही थी। मैं दर्द से चिल्ला रहा था, तब ही ठाकरे साहब ने मेरी मदद की थी, उनके कहने पर ही मुझे शिवसेना की एंबुलेंस ने अस्पताल पहुंचाया था। अगर उस दिन वो भगवान बनकर नहीं आते तो शायद आज मैं आपके बीच में नहीं होता, मैं उन्हें कभी नहीं भूल सकता हूं, आपको अंदाजा भी नहीं कि बाला साहेब का ना होना मेरे लिए कितना बड़ा कष्ट है।'

1960 में पत्रिका 'मार्मिक' लॉन्च की थी बाला साहेब ने
आपको बता दें कि बाल ठाकरे का जन्म एक साधारण से मराठी कायस्थ परिवार में 23 जनवरी 1926 में हुआ था। पढ़ाई पूरी करते-करते उन्होंने समाज सेवा में कदम रखा और पिछड़ों के लिये जंग लड़नी शुरू की। 1950 के दशक में उन्होंने मुंबई के एक अखबार फ्री प्रेस जनरल में एक 'कार्टूनिस्ट' के रूप में काम शुरू किया था, उसके बाद उन्होंने लेख लिखने शुरू किए। 1960 में उन्होंने अपनी पत्रिका 'मार्मिक' लॉन्च की थी, यह एक कार्टून वीकली था, उन्होंने इसका इस्तेमाल तमाम अभियानों में किया था। ठाकरे ने अपने जीवन में कई नाटकों का भी मंचन भी किया था।
'लता मंगेशकर' के भी बहुत बड़े फैन थे बाला साहेब
देखते ही देखते ठाकरे राजनीति से जुड़ गए और 19 जून 1966 को उन्होंने 'शिवसेना' की स्थापना की। उन्होंने अपनी जंग की शुरुआत गैर मराठियों के खिलाफ की थी। शिवसेना के कार्यकर्ताओं को सैनिक का दर्जा दिया और अपनी सेना के साथ उन्होंने तमाम अभियान चलाए, बाला साहेब हमेशा से बॉलीवुड के करीब रहे। अमिताभ बच्चन से लेकर सुनील दत्त तक जैसे कई बड़े कलाकारों के साथ उनके रिश्ते काफी करीबी रहे हैं, वो सुर कोकिला 'लता मंगेशकर' के भी बहुत बड़े फैन थे, वो हमेशा कहते थे लता मंगेशकर को मां सरस्वती ने अपने आशीष से नवाजा है, वो साक्षात सुरों की देवी हैं।












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