Babri Masjid Demolition के 25 साल पूरे, जानिए 10 बड़ी बातें
25 साल पहले 6 दिसंबर के दिन बाबरी मस्जिद को ढाह दिया गया था। ये एक ऐसी घटना थी जिसने पूरे देशे के धार्मिक सौहार्द को हिलाकर रख दिया था। 6 दिसंबर 1992 को हिंदू कार सेवकों की लाखों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद के ढांचे को ढहा दिया।

नई दिल्ली। 25 साल पहले 6 दिसंबर के दिन बाबरी मस्जिद को ढाह दिया गया था। ये एक ऐसी घटना थी जिसने पूरे देशे के धार्मिक सौहार्द को हिलाकर रख दिया था। 6 दिसंबर 1992 को हिंदू कार सेवकों की लाखों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद के ढांचे को ढहा दिया। इस घटना के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसक घटनाएं हुईं। उत्तर प्रदेश में भी जगह-जगह बड़े पैमाने पर दंगे हुए। इस घटना में सैकड़ों लोगों ने अपने अजीज लोगों को खो दिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटकर विवाद का निपटारा किया था, लेकिन मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है। आइये जानते हैं बाबरी विध्वंस से जुड़ी दस बड़ी बातें...
- भारत के प्रथम मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर 1527 में इस मस्जिद का निर्माण किया गया था।
- पुजारियों से हिन्दू ढांचे या निर्माण को छीनने के बाद मीर बाकी ने इसका नाम बाबरी मस्जिद रखा।
- अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद सबसे पहले वर्ष 1949 में अदालत की चौखट पर पहुंचा था।
- महंत रामचंद्र दास परमहंस जो उस समय के महंत थे उन्होंने भगवान राम की पूजा करने इजाजत देने के लिए न्यायालय पहुंचे थे। मस्जिद को 'ढांचा' नाम दिया गया।
- बाबरी मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर करीब 50 हिंदूओं ने कथित तौर पर रामलला की मूर्ति रख दी थी, जिसके बाद यहां उनकी पूजा अर्चना शुरू हो गई और मुसलमानों ने यहां नमाज पढ़ना बंद कर दिया।
- हाशिम अंसारी ने भी अदालत में याचिका दाखिल करके बाबरी मस्जिद में रखी मूर्तियां हटाने के आदेश देने का आग्रह किया था।
- हाशिम अंसारी ही इकलौते ऐसे शख्स थे जो 1949 में इस मस्जिद में रामलाल की मूर्तियां रखे जाने के गवाह थे। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को खुद देखा था।
- साल 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली।
- हजारों की संख्या में कार सेवकों ने वर्ष 1992 में अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया, जिसके बाद सांप्रदायिक दंगे हुए।
- वर्ष 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस संबंध में फैसला सुनाया था। न्यायालय ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी।












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