अयोध्‍या फैसले पर उर्दू मीडिया में निराशा, इन बड़े अखबारों ने लिखी ये बातें

नई दिल्‍ली। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है। ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी है। यानी विवादित जमीन राम मंदिर के लिए दे दी गई है। जबकि मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान पर जगह देने के लिए कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर मिलीजुली प्रतिक्रिया आ रही है। उर्दू मीडिया ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर निराशा जाहिर की है। उर्दू के तमाम दिग्‍गज अखबारों ने अपनी खबरों में मुसलमानों के भीतर असंतोष का जिक्र करते हुए संयम बरतने की अपील की है। अखबरों ने फैसले पर सवाल भी उठाया है। उनका कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि विवादित स्‍थल पर एक मस्जिद थी और उसे अवैध तरीके से धवस्‍त किया गया तो फैसला मस्जिद के पक्ष में क्‍यों नहीं दिया गया?

सबसे बड़े उर्दू अखबार ने लिखा- आखिरी लौ बुझ गई

सबसे बड़े उर्दू अखबार ने लिखा- आखिरी लौ बुझ गई

अंग्रेजी वेबसाइट टेलीग्राफ के मुताबिक देश के जाने-माने उर्दू अखबार इंकलाब ने अपने संपादकीय में 'एक लंबे इंतजार के बाद' नामक शीर्षक से एक लेख छापा है। उसमें लिखा गया है कि जो फैसला आया उसे स्‍वीकार करने का ही एक मात्र विकल्‍प था। अब उम्‍मीद की आखिरी लौ भी बुझ गई है। अखबार ने लेख में लिखा है कि निराशा की भावना कभी खत्‍म नहीं होगी।

अखबार ने लिखा- फैसला सबूतों के बजाय परिस्थितियों पर आधारित

अखबार ने लिखा- फैसला सबूतों के बजाय परिस्थितियों पर आधारित

इंकलाब अखबार ने संपादकीय में लिखा कि फैसला सबूतों के बजाय परिस्थितियों पर आधारित है। अखबार ने लेख में मस्जिद के लिए जमीन दिए जाने पर भी सवाल उठाए। इसमें कहा गया है कि अदालत ने फैसला सुनाया है कि मुसलमानों को भी नुकसान के मुआवजे के रूप में जमीन दिए जाने का अधिकार है, (लेकिन) समय और स्थान तय नहीं किया गया है। जबकि इसके विपरीत मंदिर बनाने के लिए सरकार ने तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट बनाने को कहा है।

फैसले के तुरंत बाद अदालत के बाहर नारे लगाए गए जो कि...

फैसले के तुरंत बाद अदालत के बाहर नारे लगाए गए जो कि...

उर्दू अखबार ‘हमारा समाज' ने अपने मेन पेज पर लिखा है कि देश की सर्वोच्च अदालत ने बाबरी मस्जिद को ढहाये जाने की घटना को कानून का उल्लंघन मानने के बावजूद अयोध्या में राम मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। अखबार ने कहा कि फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद हिंदू समूहों के सदस्यों ने अदालत के बाहर नारे लगाने शुरू कर दिए और केंद्र तथा शीर्ष अदालत के निर्देशों के बावजूद अयोध्या में समारोह आयोजित किए गए।

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